पंजाब से 7163 लापता, राजस्थान में 4 साल में मिले 250 शव; हत्या कर लाशें बहाने का जरिया बनी नहरें

Praveen Yadav
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पंजाब से 7163 लापता, राजस्थान में 4 साल में मिले 250 शव; हत्या कर लाशें बहाने का जरिया बनी नहरें  चंडीगढ़/जयपुर। पंजाब और राजस्थान की नहरें, जिन्हें कभी खेती और सिंचाई के लिए जीवनदायिनी माना जाता था, अब अपराध और रहस्यमयी मौतों का बड़ा केंद्र बनती जा रही हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि कई मामलों में नहरों को हत्या के बाद शव ठिकाने लगाने का सबसे आसान जरिया माना जा रहा है।  रिपोर्ट्स के अनुसार पंजाब में पिछले कुछ वर्षों में हजारों लोग लापता हुए हैं, जबकि राजस्थान की नहरों से लगातार अज्ञात शव बरामद हो रहे हैं। कई मामलों में पहचान तक नहीं हो पाती और परिजन वर्षों तक अपने प्रियजनों की तलाश में भटकते रहते हैं।  पंजाब से 7163 लोग लापता  आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2024 से मई 2026 तक पंजाब में 7163 लोग लापता दर्ज किए गए। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिनका अब तक कोई सुराग नहीं मिला।  वहीं दूसरी ओर जनवरी 2025 से मई 2026 तक पंजाब पुलिस को 1560 से ज्यादा शव विभिन्न नहरों और जल स्रोतों से मिले, जिनमें से बड़ी संख्या की पहचान नहीं हो सकी। पुलिस रिकॉर्ड में कई शव सिर्फ “अज्ञात” बनकर रह गए।  विशेषज्ञों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों और लंबी नहर प्रणालियों के कारण शवों का एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचना आसान हो जाता है, जिससे जांच और भी जटिल हो जाती है।  राजस्थान में 4 साल में मिले 250 से ज्यादा शव  राजस्थान में पिछले चार वर्षों के दौरान विभिन्न नहरों से करीब 250 शव बरामद किए गए। इनमें कई शव ऐसे थे जो बुरी तरह सड़-गल चुके थे, जिसके कारण उनकी पहचान करना बेहद मुश्किल हो गया।  पुलिस अधिकारियों के अनुसार कई मामलों में शवों की पहचान डीएनए जांच के जरिए करने की कोशिश की गई, लेकिन रिपोर्ट आने में महीनों लग जाते हैं। कई परिवार आज भी अपने लापता रिश्तेदारों की तलाश में पुलिस थानों और अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं।  बेटे को नहर में खोजते रहे परिजन, 7 महीने बाद मिली सड़ी-गली लाश  फतेहगढ़ साहिब निवासी 35 वर्षीय युवक के परिवार की कहानी इस संकट की भयावह तस्वीर पेश करती है। युवक के लापता होने के बाद परिवार ने पंजाब और राजस्थान की कई नहरों के किनारे उसकी तलाश की।  कभी गोताखोर बुलाए गए, कभी नहरों की सफाई कराई गई, लेकिन महीनों तक कोई सुराग नहीं मिला। आखिरकार करीब 7 महीने बाद राजस्थान की एक नहर से सड़ी-गली हालत में शव बरामद हुआ।  हालांकि शव की पहचान को लेकर भी परिवार और पुलिस के बीच मतभेद बने रहे। परिजनों का कहना था कि वे डीएनए रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, जबकि पुलिस ने शुरुआती जांच के आधार पर पहचान की पुष्टि की बात कही।  हत्या के बाद नहरों में फेंके जा रहे शव  जांच एजेंसियों का मानना है कि कई मामलों में हत्या के बाद शवों को नहरों में फेंका जाता है ताकि सबूत मिटाए जा सकें। तेज बहाव के कारण शव दूर-दूर तक पहुंच जाते हैं, जिससे अपराध स्थल और शव मिलने की जगह अलग-अलग हो जाती है।  कई मामलों में पुलिस को यह तक पता नहीं चल पाता कि हत्या कहां हुई और शव किस राज्य से बहकर आया।  अपराध विशेषज्ञों के अनुसार नहरों का लंबा नेटवर्क अपराधियों के लिए आसान रास्ता बन गया है। यही वजह है कि जांच एजेंसियों को राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत महसूस हो रही है।  डीएनए सिस्टम और जांच प्रक्रिया पर सवाल  परिवारों का आरोप है कि डीएनए मिलान और पहचान प्रक्रिया बेहद धीमी है। कई बार शव महीनों तक अस्पतालों के मुर्दाघरों में पड़े रहते हैं और रिपोर्ट आने में लंबा समय लग जाता है।  सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि राज्यों के बीच साझा डेटा सिस्टम और तेज डीएनए ट्रैकिंग व्यवस्था विकसित की जाए तो कई परिवारों को राहत मिल सकती है।  जांच एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती  पुलिस अधिकारियों के मुताबिक कई मामलों में शवों की हालत इतनी खराब होती है कि पोस्टमार्टम से मौत का सही कारण पता लगाना भी मुश्किल हो जाता है।  कुछ मामलों में हत्या का खुलासा हुआ है, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे केस हैं जहां जांच अब भी अधूरी है। कई फाइलें वर्षों से लंबित पड़ी हैं।  विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि राज्यों के बीच बेहतर सूचना साझा प्रणाली और आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों की भी जरूरत है।  निष्कर्ष  पंजाब और राजस्थान की नहरों से लगातार मिल रहे शव केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक और मानवीय संकट बन चुके हैं। हजारों परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश में वर्षों से भटक रहे हैं, जबकि कई शव बिना पहचान के ही दफना दिए जाते हैं।  अब सवाल यह है कि क्या जांच एजेंसियां और सरकारें मिलकर इस भयावह समस्या का स्थायी समाधान निकाल पाएंगी या नहरें यूं ही रहस्यमयी मौतों और अधूरी कहानियों की गवाह बनी रहेंगी।

चंडीगढ़/जयपुर। पंजाब और राजस्थान की नहरें, जिन्हें कभी खेती और सिंचाई के लिए जीवनदायिनी माना जाता था, अब अपराध और रहस्यमयी मौतों का बड़ा केंद्र बनती जा रही हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि कई मामलों में नहरों को हत्या के बाद शव ठिकाने लगाने का सबसे आसान जरिया माना जा रहा है।


रिपोर्ट्स के अनुसार पंजाब में पिछले कुछ वर्षों में हजारों लोग लापता हुए हैं, जबकि राजस्थान की नहरों से लगातार अज्ञात शव बरामद हो रहे हैं। कई मामलों में पहचान तक नहीं हो पाती और परिजन वर्षों तक अपने प्रियजनों की तलाश में भटकते रहते हैं।


पंजाब से 7163 लोग लापता

आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2024 से मई 2026 तक पंजाब में 7163 लोग लापता दर्ज किए गए। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिनका अब तक कोई सुराग नहीं मिला।


वहीं दूसरी ओर जनवरी 2025 से मई 2026 तक पंजाब पुलिस को 1560 से ज्यादा शव विभिन्न नहरों और जल स्रोतों से मिले, जिनमें से बड़ी संख्या की पहचान नहीं हो सकी। पुलिस रिकॉर्ड में कई शव सिर्फ “अज्ञात” बनकर रह गए।


विशेषज्ञों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों और लंबी नहर प्रणालियों के कारण शवों का एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचना आसान हो जाता है, जिससे जांच और भी जटिल हो जाती है।


राजस्थान में 4 साल में मिले 250 से ज्यादा शव

राजस्थान में पिछले चार वर्षों के दौरान विभिन्न नहरों से करीब 250 शव बरामद किए गए। इनमें कई शव ऐसे थे जो बुरी तरह सड़-गल चुके थे, जिसके कारण उनकी पहचान करना बेहद मुश्किल हो गया।


पुलिस अधिकारियों के अनुसार कई मामलों में शवों की पहचान डीएनए जांच के जरिए करने की कोशिश की गई, लेकिन रिपोर्ट आने में महीनों लग जाते हैं। कई परिवार आज भी अपने लापता रिश्तेदारों की तलाश में पुलिस थानों और अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं।


बेटे को नहर में खोजते रहे परिजन, 7 महीने बाद मिली सड़ी-गली लाश


फतेहगढ़ साहिब निवासी 35 वर्षीय युवक के परिवार की कहानी इस संकट की भयावह तस्वीर पेश करती है। युवक के लापता होने के बाद परिवार ने पंजाब और राजस्थान की कई नहरों के किनारे उसकी तलाश की।


कभी गोताखोर बुलाए गए, कभी नहरों की सफाई कराई गई, लेकिन महीनों तक कोई सुराग नहीं मिला। आखिरकार करीब 7 महीने बाद राजस्थान की एक नहर से सड़ी-गली हालत में शव बरामद हुआ।


हालांकि शव की पहचान को लेकर भी परिवार और पुलिस के बीच मतभेद बने रहे। परिजनों का कहना था कि वे डीएनए रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, जबकि पुलिस ने शुरुआती जांच के आधार पर पहचान की पुष्टि की बात कही।


हत्या के बाद नहरों में फेंके जा रहे शव

जांच एजेंसियों का मानना है कि कई मामलों में हत्या के बाद शवों को नहरों में फेंका जाता है ताकि सबूत मिटाए जा सकें। तेज बहाव के कारण शव दूर-दूर तक पहुंच जाते हैं, जिससे अपराध स्थल और शव मिलने की जगह अलग-अलग हो जाती है।


कई मामलों में पुलिस को यह तक पता नहीं चल पाता कि हत्या कहां हुई और शव किस राज्य से बहकर आया।


अपराध विशेषज्ञों के अनुसार नहरों का लंबा नेटवर्क अपराधियों के लिए आसान रास्ता बन गया है। यही वजह है कि जांच एजेंसियों को राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत महसूस हो रही है।


डीएनए सिस्टम और जांच प्रक्रिया पर सवाल

परिवारों का आरोप है कि डीएनए मिलान और पहचान प्रक्रिया बेहद धीमी है। कई बार शव महीनों तक अस्पतालों के मुर्दाघरों में पड़े रहते हैं और रिपोर्ट आने में लंबा समय लग जाता है।


सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि राज्यों के बीच साझा डेटा सिस्टम और तेज डीएनए ट्रैकिंग व्यवस्था विकसित की जाए तो कई परिवारों को राहत मिल सकती है।


जांच एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक कई मामलों में शवों की हालत इतनी खराब होती है कि पोस्टमार्टम से मौत का सही कारण पता लगाना भी मुश्किल हो जाता है।


कुछ मामलों में हत्या का खुलासा हुआ है, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे केस हैं जहां जांच अब भी अधूरी है। कई फाइलें वर्षों से लंबित पड़ी हैं।


विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि राज्यों के बीच बेहतर सूचना साझा प्रणाली और आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों की भी जरूरत है।


निष्कर्ष

पंजाब और राजस्थान की नहरों से लगातार मिल रहे शव केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक और मानवीय संकट बन चुके हैं। हजारों परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश में वर्षों से भटक रहे हैं, जबकि कई शव बिना पहचान के ही दफना दिए जाते हैं।


अब सवाल यह है कि क्या जांच एजेंसियां और सरकारें मिलकर इस भयावह समस्या का स्थायी समाधान निकाल पाएंगी या नहरें यूं ही रहस्यमयी मौतों और अधूरी कहानियों की गवाह बनी रहेंगी।

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