मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ वर्षों के दौरान मिड और स्मॉल कैप शेयरों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिए हैं। कई कंपनियों के शेयरों ने रिकॉर्ड तेजी दिखाई और निवेशकों की संपत्ति में जबरदस्त बढ़ोतरी की। लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि किसी अच्छे शेयर को ढूंढना जितना मुश्किल है, उससे कहीं ज्यादा कठिन उसे लंबे समय तक अपने पोर्टफोलियो में बनाए रखना यानी “होल्ड” करना है।
हाल ही में बाजार विशेषज्ञों और निवेश सलाहकारों ने ऐसे कई मिड और स्मॉल कैप शेयरों की ओर ध्यान आकर्षित किया है जिन्हें लंबी अवधि के लिए मजबूत निवेश विकल्प माना जा रहा है। हालांकि इसके साथ यह चेतावनी भी दी गई है कि इस सेगमेंट में जोखिम काफी अधिक होता है और निवेशकों को बेहद सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए।
क्यों बढ़ रहा है मिड और स्मॉल कैप शेयरों का आकर्षण?
पिछले कुछ समय में भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज ग्रोथ, इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश, मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा और घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने मिड और स्मॉल कैप कंपनियों को नई ताकत दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई छोटी और मध्यम कंपनियां तेजी से अपने कारोबार का विस्तार कर रही हैं। इन कंपनियों में ग्रोथ की संभावनाएं बड़ी कंपनियों की तुलना में अधिक होती हैं। यही वजह है कि युवा निवेशक और हाई रिटर्न की तलाश करने वाले लोग इस सेगमेंट की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।
मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि जिन कंपनियों का बिजनेस मॉडल मजबूत होता है और जिनकी कमाई लगातार बढ़ती रहती है, वे लंबे समय में निवेशकों को बेहतरीन रिटर्न दे सकती हैं।
शेयर ढूंढने से ज्यादा मुश्किल क्यों है उन्हें होल्ड करना?
विशेषज्ञों के अनुसार शेयर बाजार में सबसे बड़ी चुनौती सही समय पर सही शेयर चुनना नहीं, बल्कि बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच धैर्य बनाए रखना है। कई बार निवेशक अच्छे शेयर खरीद तो लेते हैं, लेकिन थोड़ी गिरावट या बाजार में डर का माहौल बनने पर जल्दबाजी में उन्हें बेच देते हैं।
मिड और स्मॉल कैप शेयरों में उतार-चढ़ाव काफी अधिक होता है। एक ही दिन में इन शेयरों में भारी तेजी या गिरावट देखने को मिल सकती है। ऐसे में कमजोर मनोबल वाले निवेशक अक्सर नुकसान उठाते हैं।
बाजार जानकारों का कहना है कि लंबी अवधि में वही निवेशक सफल होते हैं जो मजबूत कंपनियों में विश्वास बनाए रखते हैं और अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होते।
निवेश से पहले किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?
विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि केवल तेजी देखकर किसी शेयर में पैसा लगाने से बचना चाहिए। निवेश से पहले कंपनी के कई पहलुओं की जांच करना जरूरी है।
कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति
कंपनी का रेवेन्यू, प्रॉफिट, कर्ज और कैश फ्लो मजबूत होना चाहिए। लगातार घाटे में चल रही कंपनियों से दूरी बनाकर रखना बेहतर माना जाता है।
मैनेजमेंट की विश्वसनीयता
किसी भी कंपनी की सफलता उसके मैनेजमेंट पर निर्भर करती है। निवेशकों को कंपनी के प्रमोटर्स और मैनेजमेंट की साख को ध्यान में रखना चाहिए।
बिजनेस मॉडल और भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का कहना है कि उन कंपनियों में निवेश करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है जिनका बिजनेस लंबे समय तक टिकाऊ हो और जिनके उत्पादों या सेवाओं की मांग लगातार बनी रहे।
वैल्यूएशन पर ध्यान
कई बार तेजी के कारण कुछ शेयर जरूरत से ज्यादा महंगे हो जाते हैं। ऐसे शेयरों में निवेश जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए सही वैल्यूएशन पर निवेश करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
घरेलू निवेशकों की बढ़ी भागीदारी
भारतीय शेयर बाजार में घरेलू निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। म्यूचुअल फंड SIP और ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स की वजह से अब छोटे शहरों के निवेशक भी बाजार में सक्रिय हो रहे हैं।
मिड और स्मॉल कैप म्यूचुअल फंड्स में भी हाल के महीनों में रिकॉर्ड निवेश देखा गया है। कई निवेशक बेहतर रिटर्न की उम्मीद में इन फंड्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए SIP एक बेहतर विकल्प हो सकता है क्योंकि इससे बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम होता है।
जोखिम भी कम नहीं
हालांकि विशेषज्ञ लगातार यह चेतावनी भी दे रहे हैं कि मिड और स्मॉल कैप शेयरों में जोखिम काफी अधिक होता है। बाजार में गिरावट आने पर सबसे ज्यादा दबाव इसी सेगमेंट पर देखने को मिलता है।
कमजोर कंपनियों के शेयरों में अचानक भारी गिरावट आ सकती है। कई बार लिक्विडिटी की कमी के कारण निवेशकों को समय पर बाहर निकलने में भी दिक्कत होती है।
इसी वजह से बाजार जानकार निवेशकों को संतुलित पोर्टफोलियो रखने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि केवल मिड और स्मॉल कैप शेयरों पर निर्भर रहना जोखिम बढ़ा सकता है।
लंबी अवधि की रणनीति को बताया बेहतर
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि शेयर बाजार में सफलता का सबसे बड़ा मंत्र धैर्य और अनुशासन है। छोटी अवधि के उतार-चढ़ाव की बजाय लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करने वाले निवेशक आमतौर पर बेहतर रिटर्न हासिल करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ सकती है। ऐसे में मजबूत फंडामेंटल वाली मिड और स्मॉल कैप कंपनियां निवेशकों को शानदार अवसर दे सकती हैं।
हालांकि निवेशकों को किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले खुद रिसर्च करने और जरूरत पड़ने पर वित्तीय सलाहकार की मदद लेने की सलाह दी जा रही है।
निवेशकों के लिए क्या है संदेश?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार मिड और स्मॉल कैप शेयरों में निवेश करने से पहले स्पष्ट रणनीति बनाना बेहद जरूरी है। केवल तेजी देखकर निवेश करने के बजाय मजबूत कंपनियों को चुनना, धैर्य बनाए रखना और जोखिम को समझना लंबे समय में सफलता की कुंजी माना जा रहा है।
भारतीय शेयर बाजार में आने वाले समय में भी मिड और स्मॉल कैप कंपनियों की भूमिका महत्वपूर्ण रहने की संभावना है। ऐसे में निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती सही शेयर चुनने के साथ-साथ उन्हें सही समय तक होल्ड करके रखना होगी।

