नई दिल्ली। कभी किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी को सिर्फ वयस्कों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब यह समस्या तेजी से बच्चों में भी देखने को मिल रही है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में बच्चों में किडनी स्टोन के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खराब खानपान, कम पानी पीना, जंक फूड, बढ़ती गर्मी और बदलती लाइफस्टाइल को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पहले जहां बच्चों में यह बीमारी बेहद दुर्लभ मानी जाती थी, वहीं अब अस्पतालों में कम उम्र के बच्चों और किशोरों में भी पथरी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में यह बच्चों की किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
क्या होता है किडनी स्टोन?
किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी तब बनती है जब शरीर में मौजूद मिनरल और नमक जमा होकर छोटे-छोटे कठोर कणों का रूप ले लेते हैं। ये कण धीरे-धीरे पत्थर जैसी संरचना बना लेते हैं। पथरी का आकार बेहद छोटा भी हो सकता है और कई बार बड़ा भी हो जाता है।
जब यह पथरी यूरिन के रास्ते में फंस जाती है तो तेज दर्द, पेशाब में जलन, उल्टी, पेट दर्द और कई अन्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में पथरी का दर्द कई बार अचानक शुरू होता है और माता-पिता इसे सामान्य पेट दर्द समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही वजह है कि कई मामलों में बीमारी देर से पकड़ में आती है।
बच्चों में क्यों बढ़ रहे हैं मामले?
डॉक्टरों के मुताबिक बच्चों में किडनी स्टोन बढ़ने के पीछे सबसे बड़ी वजह बदलती लाइफस्टाइल और खानपान है। आजकल बच्चे पहले की तुलना में ज्यादा प्रोसेस्ड फूड, पैकेट स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक्स और फास्ट फूड का सेवन कर रहे हैं।
इन खाद्य पदार्थों में नमक, शुगर और प्रिजर्वेटिव्स की मात्रा ज्यादा होती है, जो शरीर में मिनरल बैलेंस बिगाड़ सकते हैं।
इसके अलावा बच्चों में पानी कम पीने की आदत भी बड़ी वजह मानी जा रही है। गर्मियों में शरीर में पानी की कमी होने पर यूरिन ज्यादा कंसंट्रेट हो जाता है, जिससे पथरी बनने का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि आजकल मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम के कारण बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी भी कम हो गई है। लंबे समय तक बैठे रहने और पर्याप्त एक्सरसाइज न करने से भी शरीर के मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ता है।
जेनेटिक कारण भी हो सकते हैं जिम्मेदार
डॉक्टरों का कहना है कि कुछ मामलों में किडनी स्टोन का कारण आनुवंशिक यानी जेनेटिक भी हो सकता है। यदि परिवार में पहले किसी को पथरी की समस्या रही है तो बच्चों में इसका खतरा बढ़ सकता है।
कुछ बच्चों में शरीर में कैल्शियम या अन्य मिनरल्स की मात्रा असामान्य रूप से ज्यादा बनने लगती है, जिससे पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है।
इसके अलावा कुछ दुर्लभ बीमारियां और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर भी बच्चों में किडनी स्टोन का कारण बन सकते हैं।
क्या हैं इसके लक्षण?
विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों में किडनी स्टोन के लक्षण कई बार अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:
• पेट या कमर में तेज दर्द
• पेशाब करते समय जलन
• पेशाब में खून आना
• बार-बार पेशाब लगना
• मतली और उल्टी
• बुखार
• पेशाब रुक-रुक कर आना
• कमजोरी और चिड़चिड़ापन
छोटे बच्चों में समस्या पहचानना और भी मुश्किल हो जाता है क्योंकि वे दर्द को सही तरीके से बता नहीं पाते। कई बार बच्चे लगातार रोते रहते हैं या खाने-पीने से मना कर देते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि यदि बच्चे को बार-बार पेट दर्द हो रहा हो या पेशाब से जुड़ी कोई समस्या दिखे तो तुरंत जांच करवानी चाहिए।
क्या गर्मी भी बन रही है कारण?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती गर्मी और हीटवेव भी बच्चों में किडनी स्टोन बढ़ने की बड़ी वजह बन रही है।
गर्मी में शरीर से ज्यादा पसीना निकलता है, जिससे शरीर में पानी की कमी होने लगती है। यदि बच्चा पर्याप्त पानी नहीं पीता तो यूरिन में मिनरल्स का स्तर बढ़ जाता है और पथरी बनने का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान का असर स्वास्थ्य पर कई तरह से पड़ रहा है और किडनी स्टोन भी उनमें से एक है।
कैसे किया जाता है इलाज?
डॉक्टरों के अनुसार छोटी पथरी कई बार ज्यादा पानी पीने और दवाइयों से अपने आप बाहर निकल जाती है। लेकिन बड़ी पथरी होने पर इलाज जरूरी हो जाता है।
इलाज में अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और यूरिन टेस्ट के जरिए स्थिति का पता लगाया जाता है।
कुछ मामलों में डॉक्टर दवाइयों के जरिए पथरी को घोलने या बाहर निकालने की कोशिश करते हैं। वहीं बड़ी पथरी होने पर लेजर तकनीक या सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में समय रहते इलाज बेहद जरूरी है क्योंकि लंबे समय तक पथरी रहने से किडनी को नुकसान पहुंच सकता है।
क्या बदलना होगा?
डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों में किडनी स्टोन रोकने के लिए परिवारों और स्कूलों दोनों को जागरूक होना होगा।
सबसे जरूरी है बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की आदत डालना। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बच्चों को दिनभर में नियमित अंतराल पर पानी पीना चाहिए।
इसके अलावा जंक फूड, चिप्स, पैकेट स्नैक्स और कोल्ड ड्रिंक्स की मात्रा कम करनी होगी।
डाइट में ताजे फल, हरी सब्जियां और संतुलित भोजन शामिल करना जरूरी माना जा रहा है।
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाना बेहद जरूरी है। आउटडोर गेम्स, एक्सरसाइज और एक्टिव लाइफस्टाइल शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
स्कूलों की क्या भूमिका हो सकती है?
विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल भी बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
स्कूलों में हेल्दी फूड को बढ़ावा देना, बच्चों को नियमित पानी पीने के लिए प्रेरित करना और शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाना जरूरी है।
कई डॉक्टरों का कहना है कि स्कूल कैंटीन में जंक फूड और हाई-सोडियम स्नैक्स पर नियंत्रण होना चाहिए।
इसके अलावा बच्चों और अभिभावकों दोनों को स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता देना भी जरूरी माना जा रहा है।
क्या कोल्ड ड्रिंक्स बढ़ा रही हैं खतरा?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ज्यादा मात्रा में कोल्ड ड्रिंक्स और मीठे पेय पदार्थ पीना भी किडनी स्टोन का खतरा बढ़ा सकता है।
इन ड्रिंक्स में शुगर और फॉस्फोरिक एसिड की मात्रा ज्यादा होती है, जो शरीर में मिनरल बैलेंस को प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञ बच्चों को सॉफ्ट ड्रिंक्स की बजाय पानी, नारियल पानी और प्राकृतिक पेय पदार्थ देने की सलाह देते हैं।
माता-पिता को क्या ध्यान रखना चाहिए?
डॉक्टरों का कहना है कि माता-पिता को बच्चों की खानपान और पानी पीने की आदतों पर ध्यान देना चाहिए।
यदि बच्चा कम पानी पीता है, ज्यादा जंक फूड खाता है या बार-बार पेट दर्द की शिकायत करता है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
विशेषज्ञों के मुताबिक समय पर जांच और सही जीवनशैली अपनाकर बच्चों में किडनी स्टोन के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
बच्चों में तेजी से बढ़ते किडनी स्टोन के मामले इस बात का संकेत हैं कि आधुनिक लाइफस्टाइल और खानपान का असर अब कम उम्र में ही स्वास्थ्य पर दिखने लगा है। डॉक्टरों का मानना है कि यदि अभी से जागरूकता नहीं बढ़ाई गई तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

