Lucknow Fire Incident:लखनऊ अग्निकांड पर अखिलेश यादव का बड़ा हमला, मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ मुआवजा देने की मांग; भ्रष्टाचार और सुरक्षा लापरवाही पर उठाए सवाल

Praveen Yadav
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Lucknow Fire Incident: अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा, मृतकों के परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग
Lucknow Fire Incident: अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा, मृतकों के परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग

लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को कम से कम 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ।

मंगलवार को अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) पहुंचकर आग में घायल हुए लोगों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यदि सुरक्षा नियमों का पालन किया गया होता तो इतनी बड़ी त्रासदी कभी नहीं होती।

"सबसे बड़ा दुख परिवार के सदस्य को खोना"

मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि किसी भी परिवार के लिए अपने सदस्य को खोने से बड़ा दुख कोई नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि हादसे में जिन लोगों की जान गई, उनमें अधिकांश छात्र, प्रशिक्षु और कर्मचारी थे, जिनका भविष्य अभी शुरू ही हुआ था।

उन्होंने कहा कि भवन में सुरक्षा इंतजामों की कमी और नियमों की अनदेखी ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। सरकार को इस मामले को केवल एक हादसे के रूप में नहीं बल्कि प्रशासनिक विफलता के रूप में देखना चाहिए।

मृतकों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग

अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार को मृतकों के परिवारों को कम से कम 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देनी चाहिए ताकि वे इस कठिन समय में कुछ राहत महसूस कर सकें।

उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी त्रासदी के बाद केवल सांत्वना पर्याप्त नहीं है। सरकार को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए पीड़ित परिवारों के पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

"भ्रष्टाचार के कारण हुई त्रासदी"

समाजवादी पार्टी प्रमुख ने आरोप लगाया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच चुका है और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि जब भ्रष्टाचार व्यवस्था का हिस्सा बन जाता है तो सुरक्षा मानकों की अनदेखी होना स्वाभाविक है। यदि भवन निर्माण, अग्निशमन सुरक्षा और प्रशासनिक स्वीकृतियों में पारदर्शिता होती तो यह हादसा टाला जा सकता था।

अखिलेश यादव ने दावा किया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में कई भवनों को नियमों की अनदेखी करते हुए स्वीकृतियां दी गईं और अब उनके परिणाम सामने आ रहे हैं।

एनओसी जारी करने वालों की भूमिका पर सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने इस मामले में नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी करने वाली एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है कि संबंधित भवन को किस आधार पर अनुमति दी गई और क्या सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था।

उन्होंने मांग की कि जिन अधिकारियों और एजेंसियों ने भवन को अनुमति दी, उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार पाया जाता है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

क्या है अलीगंज अग्निकांड?

सोमवार को लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में स्थित एक तीन मंजिला इमारत में भीषण आग लग गई थी। इस इमारत में एक गेमिंग और एनीमेशन स्टूडियो संचालित हो रहा था, जहां बड़ी संख्या में छात्र, प्रशिक्षु और कर्मचारी मौजूद थे।

आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोग बाहर निकलने का मौका नहीं पा सके। हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए। मृतकों में अधिकांश युवा छात्र और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवक-युवतियां शामिल थे।

घटना के बाद राहत और बचाव अभियान कई घंटों तक चला। फायर ब्रिगेड और पुलिस टीमों ने बड़ी मुश्किल से आग पर काबू पाया।

सुरक्षा मानकों को लेकर उठे सवाल

हादसे के बाद भवन की संरचना, फायर सेफ्टी सिस्टम और आपातकालीन निकास व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पर्याप्त अग्निशमन उपकरण और सुरक्षित निकासी व्यवस्था मौजूद होती तो मृतकों की संख्या कम हो सकती थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार भवन में सुरक्षा मानकों को लेकर कई कमियां थीं।

राम मंदिर दान मामले पर भी सरकार को घेरा

अलीगंज अग्निकांड पर प्रतिक्रिया देने के साथ-साथ अखिलेश यादव ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित दान घोटाले के मुद्दे पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या जांच में कथित रूप से गायब हुई चांदी की शिला, आभूषण और अन्य कीमती वस्तुओं का भी उल्लेख किया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जनता की भावनाओं से जुड़े मामलों में भी पारदर्शिता आवश्यक है और जांच रिपोर्ट पूरी तरह सार्वजनिक की जानी चाहिए।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज

अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति भी गर्म हो गई है। विपक्ष जहां सरकार पर लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहा है, वहीं सत्तारूढ़ पक्ष इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बता रहा है।

हालांकि इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश में भवन सुरक्षा, फायर सेफ्टी मानकों और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

निष्कर्ष

लखनऊ का अलीगंज अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाली घटना बन गया है। 15 लोगों की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है।

अखिलेश यादव द्वारा 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग और सुरक्षा मानकों की जांच की मांग ने इस मुद्दे को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बना दिया है। अब सभी की निगाहें सरकार की कार्रवाई, जांच रिपोर्ट और पीड़ित परिवारों को मिलने वाली सहायता पर टिकी हैं।

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