चैतर वसावा को 7 साल की सजा पर भड़के अरविंद केजरीवाल, बोले- BJP की साजिश का नतीजा; अदालत के फैसले पर उठाए सवाल

Praveen Yadav
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नई दिल्ली/गांधीनगर। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुजरात के आदिवासी नेता एवं पार्टी विधायक चैतर वसावा को सात साल की सजा सुनाए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि वसावा को राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है और यह फैसला भाजपा की रणनीति का हिस्सा है।

गुजरात के AAP विधायक चैतर वसावा की सजा पर गरमाई राजनीति

नई दिल्ली/गांधीनगर। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुजरात के आदिवासी नेता एवं पार्टी विधायक चैतर वसावा को सात साल की सजा सुनाए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि वसावा को राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है और यह फैसला भाजपा की रणनीति का हिस्सा है।

गौरतलब है कि गुजरात की राजपीपला सत्र अदालत ने तीन साल पुराने एक मामले में चैतर वसावा, उनकी पत्नी शकुंतला वसावा तथा छह अन्य लोगों को वन अधिकारियों पर हमले और जबरन वसूली के मामले में दोषी ठहराते हुए सात-सात साल की कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

क्या है पूरा मामला?

सरकारी पक्ष के अनुसार, यह मामला वर्ष 2023 में वन विभाग के अधिकारियों पर कथित हमले और सरकारी कार्य में बाधा डालने से जुड़ा है। लंबी सुनवाई के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ए.वी. हिरपारा ने सभी आरोपियों को दोषी करार देते हुए सात साल की सजा सुनाई।

अदालत के फैसले के बाद चैतर वसावा की विधानसभा सदस्यता भी समाप्त हो गई है। वसावा गुजरात में आदिवासी समुदाय के बीच एक प्रभावशाली नेता माने जाते हैं और आम आदमी पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं।

केजरीवाल बोले- "ईडी पार्टी ने साजिश रची"

अदालत के फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि चैतर वसावा को जानबूझकर राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया गया है।

केजरीवाल ने कहा कि वसावा आदिवासी समाज की आवाज उठाते रहे हैं और सरकारी योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार बोलते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को डर था कि जब तक चैतर वसावा सक्रिय राजनीति में रहेंगे, तब तक वह इस क्षेत्र में राजनीतिक रूप से मजबूत नहीं हो पाएगी।

उन्होंने कहा कि भाजपा ने पहले झूठा मुकदमा दर्ज कराया और बाद में उन्हें सात साल की सजा दिलाने की साजिश रची। केजरीवाल ने दावा किया कि गुजरात की जनता इस कार्रवाई का जवाब चुनाव में देगी।

अदालत के फैसले पर परोक्ष सवाल

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केजरीवाल की टिप्पणी केवल भाजपा पर हमला नहीं है, बल्कि इससे अदालत के फैसले पर भी परोक्ष रूप से सवाल उठता है। उन्होंने सीधे तौर पर न्यायाधीश या अदालत का नाम नहीं लिया, लेकिन फैसले को भाजपा की साजिश बताकर न्यायिक प्रक्रिया पर अविश्वास जताने का आरोप विपक्षी दलों द्वारा लगाया जा रहा है।

यह पहली बार नहीं है जब केजरीवाल किसी न्यायिक फैसले को लेकर विवादों में आए हों। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को लेकर भी उनकी टिप्पणियों पर काफी राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा हुआ था।

जब अदालत के फैसले का किया था स्वागत

दिलचस्प बात यह है कि कथित दिल्ली शराब नीति मामले में जब अदालत ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों के खिलाफ कुछ आरोपों को खारिज किया था, तब आम आदमी पार्टी ने उसे न्याय की जीत बताया था।

राजनीतिक विरोधियों का कहना है कि जब फैसले उनके पक्ष में आते हैं तो उन्हें न्याय कहा जाता है और जब फैसले विपक्ष के खिलाफ आते हैं तो उन पर सवाल उठाए जाते हैं।

गुजरात की राजनीति में बढ़ सकता है असर

चैतर वसावा दक्षिण गुजरात के आदिवासी बहुल इलाकों में मजबूत जनाधार रखते हैं। उनकी सजा के बाद क्षेत्रीय राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला आगामी चुनावों में आदिवासी वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है।

वहीं भाजपा का कहना है कि अदालत ने उपलब्ध सबूतों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर फैसला सुनाया है और इसे राजनीतिक रंग देना न्यायपालिका का अपमान है।

आगे क्या?

चैतर वसावा के कानूनी प्रतिनिधियों द्वारा उच्च अदालत में फैसले को चुनौती दिए जाने की संभावना है। यदि उच्च न्यायालय से राहत मिलती है तो उनके राजनीतिक भविष्य पर लगे संकट को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

फिलहाल, अदालत के फैसले के बाद गुजरात की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है और अरविंद केजरीवाल की टिप्पणियों ने इस मामले को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का विषय बना दिया है।

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