भगवंत मान ‘बेअदबी’ वीडियो विवाद ने पकड़ा तूल: फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट साजिश मामले में गुरुग्राम पुलिस ने 2 को किया गिरफ्तार

Praveen Yadav
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Punjab CM Bhagwant Mann Sacrilege Video Controversy एक बार फिर सुर्खियों में है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर वायरल हुए कथित बेअदबी (Sacrilege) वीडियो मामले में नया मोड़ आ गया है। गुरुग्राम पुलिस ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री को क्लीन चिट दिलाने के लिए कथित तौर पर फर्जी फॉरेंसिक और साइबर विश्लेषण रिपोर्ट तैयार कराने की साजिश रची गई। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

Punjab CM Bhagwant Mann Sacrilege Video Controversy एक बार फिर सुर्खियों में है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर वायरल हुए कथित बेअदबी (Sacrilege) वीडियो मामले में नया मोड़ आ गया है। गुरुग्राम पुलिस ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री को क्लीन चिट दिलाने के लिए कथित तौर पर फर्जी फॉरेंसिक और साइबर विश्लेषण रिपोर्ट तैयार कराने की साजिश रची गई। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।


गुरुग्राम पुलिस द्वारा दर्ज FIR और जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह मामला बेहद संवेदनशील है क्योंकि इसमें एक वायरल वीडियो की सत्यता को लेकर कथित तौर पर पूर्व निर्धारित निष्कर्ष वाली रिपोर्ट तैयार करवाने का आरोप लगाया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच में वित्तीय लेनदेन, कथित दबाव और रिपोर्टों में बदलाव जैसे गंभीर पहलू सामने आए हैं।


क्या है पूरा मामला?

इस साल की शुरुआत में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कथित तौर पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को सिख गुरुओं की तस्वीरों पर शराब छिड़कते हुए और अन्य कथित बेअदबी संबंधी गतिविधियां करते हुए दिखाया गया था।


वीडियो वायरल होने के बाद अकाल तख्त, जो सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था मानी जाती है, ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को तलब किया था।


भगवंत मान ने शुरुआत से ही दावा किया कि वीडियो फर्जी है और इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाया गया है।


हालांकि, अकाल तख्त ने बाद में बताया कि भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त दो फॉरेंसिक लैब्स से कराई गई जांच में वीडियो के AI या एडिटेड होने का कोई प्रमाण नहीं मिला।


इन रिपोर्टों के आधार पर 15 जून 2026 को अकाल तख्त ने भगवंत मान को “एंटी-गुरु” और “एंटी-खालसा पंथ” घोषित कर दिया था।


भगवंत मान ने क्या दावा किया था?

अकाल तख्त के फैसले के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा था कि पंजाब सरकार की ओर से 1,191 अलग-अलग एंगल से वीडियो की जांच कराई गई है।


उन्होंने दावा किया कि नई जांच रिपोर्टों में यह निष्कर्ष निकला है कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं।


यहीं से विवाद और गहरा गया क्योंकि विपक्षी दलों ने इन रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।


गुरुग्राम पुलिस की FIR में क्या आरोप हैं?

गुरुग्राम पुलिस ने जसप्रीत सिंह नामक व्यक्ति की शिकायत पर मामला दर्ज किया है। जसप्रीत सिंह डिजिटल फॉरेंसिक, साइबर जांच और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य विश्लेषण के क्षेत्र में काम करते हैं।


FIR के अनुसार शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने खुद को पंजाब सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के रूप में पेश किया और उनसे ऐसी रिपोर्ट तैयार करवाने के लिए संपर्क किया जो पहले से तय निष्कर्षों का समर्थन करे।


शिकायतकर्ता के मुताबिक उनसे कहा गया कि रिपोर्ट में यह साबित किया जाए कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत मान नहीं हैं और वीडियो से जुड़े सभी आरोप झूठे हैं।


जसप्रीत सिंह ने FIR में दावा किया कि उन्होंने कई बार बताया कि उपलब्ध सामग्री किसी निर्णायक फॉरेंसिक निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं है, लेकिन इसके बावजूद उन पर लगातार दबाव बनाया गया।

“मुझे बार-बार कहा गया कि रिपोर्ट ऐसी होनी चाहिए जिससे यह साबित हो सके कि वीडियो फर्जी है और मुख्यमंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोप गलत हैं। यह स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच नहीं बल्कि पहले से तय निष्कर्ष को साबित करने का प्रयास था।”

10 लाख रुपये के कथित भुगतान का आरोप

गुरुग्राम पुलिस के बयान में एक और गंभीर आरोप का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि रिपोर्ट तैयार कराने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए लगभग 10 लाख रुपये नकद दिए गए थे।


इसके अलावा अन्य लोगों को भी अलग-अलग माध्यमों से भुगतान किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।


पुलिस फिलहाल इन वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है और बैंकिंग रिकॉर्ड तथा डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है।


कौन-कौन गिरफ्तार हुए?

गुरुग्राम पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने FIR दर्ज होने के कुछ ही समय बाद दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

नाम निवास उम्र
अरुण मेहंदरू अग्रसेन कॉलोनी, सिरसा 25 वर्ष
अंकित खरक गागर गांव, जींद 25 वर्ष

पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों से कथित फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने, रिपोर्ट जारी करने वाले संस्थानों की वैधता, वित्तीय लेनदेन और अन्य सहयोगियों के बारे में पूछताछ की जा रही है।


डिजिटल साक्ष्यों की हो रही जांच

पुलिस ने बताया कि मामले से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं। इन सभी को वैज्ञानिक तरीके से जांच के लिए भेजा गया है।


जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि रिपोर्ट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका थी और क्या किसी सरकारी अधिकारी का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हस्तक्षेप था।


राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज

इस मामले में गिरफ्तारी के बाद पंजाब की राजनीति भी गर्मा गई है।


16 जून को वरिष्ठ अकाली नेता Bikram Singh Majithia ने दावा किया था कि पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी को ऐसी रिपोर्टें हासिल करने की जिम्मेदारी दी गई थी जिनसे यह साबित किया जा सके कि वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति भगवंत मान नहीं हैं।


इसके बाद शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष Sukhbir Singh Badal ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की ओर से अकाल तख्त के निष्कर्षों को चुनौती देने के लिए अलग-अलग लैब्स से रिपोर्टें जुटाने का प्रयास किया गया।


कांग्रेस नेता खैरा ने भी लगाए आरोप

कांग्रेस नेता Sukhpal Singh Khaira ने भी दावा किया कि मुख्यमंत्री के पक्ष में लाई गई फॉरेंसिक रिपोर्टें फर्जी हैं और जल्द ही पूरा मामला उजागर हो जाएगा।


उन्होंने सोशल मीडिया पर कई दस्तावेज, वीडियो और स्क्रीनशॉट साझा किए जिनमें कथित तौर पर शिकायतकर्ता जसप्रीत सिंह और पंजाब पुलिस अधिकारियों के बीच बैठकों का जिक्र था।


व्हाट्सएप चैट्स भी आईं सामने

बिक्रम सिंह मजीठिया ने कुछ कथित व्हाट्सएप चैट्स भी सार्वजनिक की हैं। उनका दावा है कि इन चैट्स में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रिपोर्टों के शब्दों और निष्कर्षों में बदलाव के सुझाव दे रहा था।


हालांकि इन चैट्स की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस जांच के बाद ही उनकी प्रामाणिकता स्पष्ट हो सकेगी।


पंजाब सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

अब तक पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस की ओर से गुरुग्राम पुलिस की FIR और गिरफ्तारी को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।


राजनीतिक दल लगातार मुख्यमंत्री भगवंत मान से जवाब मांग रहे हैं, जबकि आम आदमी पार्टी की ओर से भी इस मामले पर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है।


आगे क्या?

यह मामला अब केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रह गया है। फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट, कथित सरकारी दबाव, नकद भुगतान और राजनीतिक हस्तक्षेप जैसे आरोपों ने इसे राष्ट्रीय स्तर का विवाद बना दिया है।


जांच के अगले चरण में डिजिटल साक्ष्यों, वित्तीय रिकॉर्ड और कथित व्हाट्सएप चैट्स की फॉरेंसिक जांच महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला पंजाब की राजनीति और मुख्यमंत्री भगवंत मान की छवि पर बड़ा असर डाल सकता है। वहीं यदि रिपोर्टों की वैधता साबित होती है तो विपक्ष के आरोपों की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे।


फिलहाल सभी की नजरें गुरुग्राम पुलिस की जांच और पंजाब सरकार की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।

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