Delhi CAG Audit Row: CAG ऑडिट विवाद पर आमने-सामने AAP और BJP, आतिशी ने पूछा- ‘अगर संबंध थे तो ऑडिट क्यों कराया?’

Praveen Yadav
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Delhi CAG Audit Row News: दिल्ली में बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) के CAG ऑडिट को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और आम आदमी पार्टी (AAP) की वरिष्ठ नेता आतिशी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह बिजली कटौती, बढ़े हुए बिजली बिल और प्रशासनिक विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए AAP पर निराधार आरोप लगा रही है।

Delhi CAG Audit Row News: दिल्ली में बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) के CAG ऑडिट को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और आम आदमी पार्टी (AAP) की वरिष्ठ नेता आतिशी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह बिजली कटौती, बढ़े हुए बिजली बिल और प्रशासनिक विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए AAP पर निराधार आरोप लगा रही है।


आतिशी ने कहा कि यदि AAP और बिजली कंपनियों के बीच किसी प्रकार का गठजोड़ होता, तो उनकी सरकार अक्टूबर 2024 में DISCOM कंपनियों के विशेष ऑडिट का आदेश कभी नहीं देती। उन्होंने भाजपा के आरोपों को पूरी तरह तर्कहीन और राजनीतिक बताया।


क्या है Delhi CAG Audit Row?

दिल्ली सरकार द्वारा बिजली वितरण कंपनियों BRPL (BSES Rajdhani Power Limited) और BYPL (BSES Yamuna Power Limited) के खातों का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से ऑडिट कराने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस कदम का उद्देश्य बिजली उपभोक्ताओं और दिल्ली विद्युत बोर्ड (DVB) के हजारों पेंशनभोगियों के हितों की रक्षा करना बताया गया था।


हालांकि दोनों निजी बिजली कंपनियों ने दिल्ली सरकार के इस कदम को अदालत में चुनौती दी। कंपनियों का तर्क था कि यह कदम पूर्व में दिए गए न्यायिक फैसलों के विपरीत है।


आतिशी का BJP पर पलटवार

Atishi on BJP and CAG Audit मामले में आतिशी ने कहा कि भाजपा सरकार दिल्लीवासियों को 24 घंटे निर्बाध बिजली देने में विफल रही है। राजधानी में बिजली कटौती बढ़ी है और उपभोक्ताओं पर बिजली बिल का बोझ भी बढ़ा है।


उन्होंने कहा कि भाजपा अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए आम आदमी पार्टी को निशाना बना रही है। आतिशी ने सवाल उठाया कि यदि AAP और DISCOM कंपनियों के बीच कोई संबंध होता, तो उनकी सरकार उन कंपनियों के खिलाफ ऑडिट का आदेश क्यों देती?


उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2024 में AAP सरकार ने पेंशन सरचार्ज से जुड़े मुद्दे पर DERC को निर्देश दिया था कि वह CAG से अनुमोदित ऑडिटरों के माध्यम से विशेष ऑडिट कराए, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।


दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Delhi High Court CAG Audit Decision में सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने BRPL और BYPL की याचिकाओं को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा जारी किया गया नोटिस केवल एक कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) है और अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।


न्यायमूर्ति तेजस करिया ने अपने फैसले में कहा कि संबंधित नोटिस में कंपनियों के खिलाफ कोई प्रतिकूल टिप्पणी या अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है। इसलिए इस स्तर पर अदालत का हस्तक्षेप उचित नहीं है।


अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनियों को अपना पक्ष रखने और सुनवाई में भाग लेने का पूरा अवसर दिया जाएगा।


BJP ने AAP पर लगाए गंभीर आरोप

दिल्ली सरकार में मंत्री आशीष सूद ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि बिजली कंपनियों द्वारा CAG ऑडिट का विरोध करना ही उनके और AAP के बीच संबंधों को उजागर करता है।


उन्होंने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के सत्ता में रहते हुए बिजली कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया। सूद ने कहा कि भाजपा सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के उच्च मानकों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसी कारण CAG ऑडिट की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।


बिजली कटौती और बढ़ते बिल पर भी घिरी सरकार

आतिशी ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि पिछले एक वर्ष में राजधानी में बिजली कटौती की घटनाएं बढ़ी हैं। इसके अलावा पानी की कमी, बढ़ते बिजली बिल और नागरिक सुविधाओं की खराब स्थिति जैसे मुद्दों पर सरकार जवाब देने से बच रही है।


उन्होंने मालवीय नगर और साकेत में हुई आग की घटनाओं का भी उल्लेख किया, जिनमें कई लोगों की जान गई थी। आतिशी का आरोप है कि भाजपा सरकार हर विफलता के लिए पूर्ववर्ती AAP सरकार को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश करती है।


DISCOM ऑडिट क्यों है महत्वपूर्ण?

विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली की बिजली व्यवस्था में निजी वितरण कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में यदि CAG ऑडिट होता है तो बिजली दर निर्धारण, पेंशन सरचार्ज, परिचालन खर्च और उपभोक्ताओं से वसूले जाने वाले शुल्कों की पारदर्शिता की जांच हो सकेगी।


बिजली उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि ऑडिट से यह स्पष्ट होगा कि कंपनियां उपभोक्ताओं से वसूली गई राशि का उपयोग किस प्रकार कर रही हैं और क्या बिजली दरों में बढ़ोतरी उचित है या नहीं।


राजनीतिक रूप से क्यों अहम है यह मामला?

दिल्ली में बिजली हमेशा से एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है। AAP सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान मुफ्त बिजली और सब्सिडी को प्रमुख उपलब्धि बताया था। दूसरी ओर भाजपा का आरोप रहा है कि बिजली वितरण कंपनियों के साथ मिलीभगत के कारण कई महत्वपूर्ण सवालों का जवाब नहीं दिया गया।


अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद CAG ऑडिट का रास्ता और साफ होता दिखाई दे रहा है, जिससे दिल्ली की राजनीति में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमा सकता है।

निष्कर्ष

दिल्ली में CAG ऑडिट विवाद केवल एक प्रशासनिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह AAP और BJP के बीच बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। जहां आतिशी भाजपा पर जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगा रही हैं, वहीं भाजपा इसे पारदर्शिता और जवाबदेही का मामला बता रही है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि CAG ऑडिट प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ती है और इससे बिजली वितरण कंपनियों तथा दिल्ली की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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