दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में 700 करोड़ का कथित महाघोटाला! 10 लाख की X-Ray मशीन 33 लाख में खरीदी, पूर्व CPA चीफ गिरफ्तार, फाइलें भी गायब

Praveen Yadav
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नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के सरकारी महकमे से भ्रष्टाचार की एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली इनसाइड स्टोरी सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को हिलाकर रख दिया है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के अंतर्गत काम करने वाली सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) में मेडिकल उपकरणों और जरूरी सामानों की खरीद के नाम पर करीब 700 करोड़ रुपये का कथित घोटाला हुआ है। इस मामले में जांच एजेंसी ने CPA के पूर्व प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा को गिरफ्तार कर लिया है।

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के सरकारी महकमे से भ्रष्टाचार की एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली इनसाइड स्टोरी सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को हिलाकर रख दिया है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के अंतर्गत काम करने वाली सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) में मेडिकल उपकरणों और जरूरी सामानों की खरीद के नाम पर करीब 700 करोड़ रुपये का कथित घोटाला हुआ है। इस मामले में जांच एजेंसी ने CPA के पूर्व प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा को गिरफ्तार कर लिया है।


सरकारी खजाने और आम जनता के टैक्स के पैसों पर किस तरह डाका डाला जाता है, इसका बड़ा उदाहरण इस मामले में देखने को मिला है। गरीब मरीजों के इलाज और सरकारी अस्पतालों को आधुनिक बनाने के लिए जारी बजट का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। जांच में सामने आया कि बाजार में बेहद कम कीमत पर मिलने वाले सामानों को कई गुना अधिक कीमत पर खरीदा गया।


जांच में सामने आया चौंकाने वाला खेल

खरीद से जुड़े दस्तावेजों और बाजार की वास्तविक कीमतों का मिलान करने पर जांच एजेंसियों को कई गंभीर अनियमितताएं मिलीं। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ कि यह मामला सामान्य वित्तीय गड़बड़ी नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से की गई कथित वित्तीय अनियमितता हो सकता है।


किन सामानों में मिली सबसे ज्यादा गड़बड़ी?

  • डिजिटल एक्स-रे मशीन: बाजार कीमत लगभग 10 लाख रुपये, जबकि खरीद करीब 33 लाख रुपये प्रति मशीन दिखाई गई।
  • अस्पताल की बेडशीट: लगभग 150 रुपये की चादर 450 रुपये प्रति पीस खरीदी गई।
  • ओआरएस पैकेट: करीब 2.5 रुपये का पैकेट 15 रुपये प्रति पैकेट की दर से खरीदा गया।

प्रारंभिक जांच के अनुसार सिर्फ इन्हीं वस्तुओं में नहीं बल्कि अन्य मेडिकल उपकरणों, सर्जिकल ग्लव्स, मॉनिटर, सिरिंज और कई जरूरी चिकित्सा सामग्री की खरीद में भी कथित रूप से भारी वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।


पूर्व CPA प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा गिरफ्तार

जांच एजेंसियों ने कार्रवाई करते हुए सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) के पूर्व प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान कई खरीद प्रक्रियाओं में नियमों का पालन नहीं किया गया और कुछ कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।


जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण सरकारी फाइलें और डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिले। अधिकारियों को आशंका है कि खरीद प्रक्रिया से जुड़े कुछ दस्तावेज जानबूझकर हटाए या नष्ट किए गए हो सकते हैं।

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, फाइलों के गायब होने से यह आशंका मजबूत होती है कि मामले में कई स्तरों पर लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।

 

सरकारी अस्पतालों पर क्या पड़ सकता है असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मेडिकल उपकरणों की खरीद में इस तरह की अनियमितताएं होती हैं तो इसका सीधा असर सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। कई अस्पताल पहले से ही संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं और ऐसी स्थिति में सरकारी धन का दुरुपयोग मरीजों के हितों को प्रभावित कर सकता है।


अगर कम कीमत वाली मशीनें कई गुना अधिक कीमत पर खरीदी जाती हैं तो समान बजट में कम उपकरण खरीदे जा सकते हैं। इससे अस्पतालों की क्षमता और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती हैं।


राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल

मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक स्तर पर भी आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। विपक्ष ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, जबकि जांच एजेंसियां खरीद प्रक्रिया, वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खातों और संबंधित सप्लायरों की भूमिका की जांच कर रही हैं।


सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में इस मामले में और भी अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की जा सकती है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित वित्तीय अनियमितताओं से किसे लाभ पहुंचा और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।


जनदृष्टि टुडे इस पूरे मामले की हर महत्वपूर्ण अपडेट पर नजर बनाए हुए है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस कथित 700 करोड़ रुपये के स्वास्थ्य विभाग खरीद घोटाले से जुड़े नए तथ्य सामने आने की संभावना है।

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