FIFA World Cup 2026: लेरॉय साने ने रचा इतिहास, जर्मनी के लिए दागा विश्व कप इतिहास का दूसरा सबसे तेज गोल

Praveen Yadav
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न्यू जर्सी: फीफा विश्व कप 2026 में जर्मनी के स्टार मिडफील्डर लेरॉय साने ने इतिहास रच दिया। इक्वाडोर के खिलाफ ग्रुप ई के मुकाबले में उन्होंने मैच के केवल 1 मिनट 49 सेकंड में गोल दागकर जर्मनी के लिए विश्व कप इतिहास का दूसरा सबसे तेज गोल करने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। हालांकि इस उपलब्धि के बावजूद जर्मनी को मुकाबले में 2-1 से हार का सामना करना पड़ा।

न्यू जर्सी: फीफा विश्व कप 2026 में जर्मनी के स्टार मिडफील्डर लेरॉय साने ने इतिहास रच दिया। इक्वाडोर के खिलाफ ग्रुप ई के मुकाबले में उन्होंने मैच के केवल 1 मिनट 49 सेकंड में गोल दागकर जर्मनी के लिए विश्व कप इतिहास का दूसरा सबसे तेज गोल करने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। हालांकि इस उपलब्धि के बावजूद जर्मनी को मुकाबले में 2-1 से हार का सामना करना पड़ा।


शानदार शुरुआत, पहले ही हमले में गोल

जर्मनी ने मुकाबले की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज में की। मैच के दूसरे ही मिनट में फ्लोरियन विर्ट्ज़ ने बॉक्स के भीतर शानदार पास दिया, जिस पर लेरॉय साने ने बेहतरीन फिनिश करते हुए गेंद को गोलपोस्ट के निचले बाएं कोने में पहुंचा दिया। गोलकीपर हर्नान गालिंडेज़ के पास इसे रोकने का कोई मौका नहीं था।


Opta के आंकड़ों के अनुसार यह जर्मनी के विश्व कप इतिहास का दूसरा सबसे तेज गोल है। इससे पहले केवल एर्न्स्ट लेहनर ने 1934 विश्व कप में ऑस्ट्रिया के खिलाफ इससे तेज गोल किया था।


VAR जांच के बाद भी गोल रहा बरकरार

गोल के बाद इक्वाडोर के खिलाड़ियों ने दावा किया कि बिल्ड-अप के दौरान जर्मनी के अलेक्सांदर पावलोविच ने पेड्रो वीटे के सिर पर हाई बूट मारा था। रेफरी ने VAR की मदद ली, लेकिन समीक्षा के बाद मैदान पर दिया गया फैसला बरकरार रखा गया और गोल को वैध घोषित कर दिया गया।


इक्वाडोर ने दिखाई शानदार वापसी

शुरुआती झटके के बावजूद इक्वाडोर ने हिम्मत नहीं हारी। नौवें मिनट में निल्सन अंगुलो ने लंबी दूरी से शानदार शॉट लगाकर स्कोर 1-1 कर दिया। उनका शॉट डिफेंडर के पैरों के बीच से निकलते हुए मैनुअल नॉयर को छकाता हुआ गोल में समा गया।


इसके बाद मुकाबला काफी रोमांचक हो गया। दोनों टीमों ने कई मौके बनाए, लेकिन पहले हाफ तक कोई और गोल नहीं हो सका।


गोंजालो प्लाटा ने दिलाई जीत

दूसरे हाफ में इक्वाडोर ने लगातार दबाव बनाए रखा। 77वें मिनट में मिले कॉर्नर पर गोंजालो प्लाटा ने शानदार मूव बनाते हुए गेंद को गोल में पहुंचा दिया। यह गोल निर्णायक साबित हुआ और जर्मनी अंत तक बराबरी नहीं कर सका।


साने का रिकॉर्ड, लेकिन टीम को झटका

लेरॉय साने का ऐतिहासिक गोल जर्मनी के लिए गर्व का विषय जरूर रहा, लेकिन टीम को हार के कारण निराशा हाथ लगी। दूसरी ओर, इक्वाडोर ने पिछड़ने के बाद जिस तरह वापसी की, उसने टीम के आत्मविश्वास को काफी मजबूत किया है।


अब जर्मनी को नॉकआउट चरण से पहले अपनी रक्षात्मक कमजोरियों पर काम करना होगा, जबकि इक्वाडोर इस यादगार जीत के साथ अगले दौर की चुनौती के लिए तैयार होगा।

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