कोलकाता: भारत की पूर्वी सीमाओं की सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने भारतीय वायुसेना के दो महत्वपूर्ण एयरबेस—हासीमारा एयर फोर्स स्टेशन और कलाईकुंडा एयर फोर्स स्टेशन—के विस्तार के लिए अतिरिक्त जमीन आवंटित करने का फैसला किया है। हासीमारा एयरबेस को 25 एकड़ और कलाईकुंडा एयरबेस को 37 एकड़ जमीन दी जाएगी।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब भारत-चीन सीमा पर सामरिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। नई जमीन मिलने से दोनों एयरबेस की परिचालन क्षमता, लॉजिस्टिक नेटवर्क और सैन्य बुनियादी ढांचे को नई मजबूती मिलेगी।
हासीमारा एयरबेस क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में स्थित हासीमारा एयरबेस भारतीय वायुसेना के सबसे रणनीतिक फॉरवर्ड बेस में से एक माना जाता है। यह एयरबेस भूटान सीमा और चीन के संवेदनशील चुंबी घाटी क्षेत्र के बेहद करीब स्थित है।
यहीं पर भारतीय वायुसेना के अत्याधुनिक राफेल फाइटर जेट की दूसरी स्क्वाड्रन तैनात है। राफेल अपनी लंबी मारक क्षमता, एडवांस्ड रडार सिस्टम, हवा से हवा और हवा से जमीन पर सटीक हमले की क्षमता के लिए जाना जाता है।
सैन्य सूत्रों के अनुसार, इसी क्षेत्र में S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम भी तैनात है, जो 400 किलोमीटर तक की दूरी पर दुश्मन के विमान, ड्रोन और मिसाइलों को निशाना बना सकता है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
राफेल और S-400 का खतरनाक कॉम्बिनेशन
आधुनिक युद्ध में हवाई सुरक्षा और आक्रामक क्षमता दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण होती हैं। S-400 जहां दुश्मन के हवाई हमलों को रोकने का काम करता है, वहीं राफेल फाइटर जेट दुश्मन के ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम है।
विशेषज्ञों का कहना है कि राफेल और S-400 का संयोजन हासीमारा एयरबेस को भारत की सबसे मजबूत रक्षा चौकियों में शामिल करता है। इस एयरबेस का विस्तार भविष्य में पूर्वी सेक्टर में भारतीय वायुसेना की ताकत को और बढ़ाएगा।
कलाईकुंडा एयरबेस भी होगा और मजबूत
पश्चिम मेदिनीपुर जिले में स्थित कलाईकुंडा एयरबेस भारतीय वायुसेना के पूर्वी कमान का एक प्रमुख संचालन और प्रशिक्षण केंद्र है। यहां Su-30 MKI लड़ाकू विमान और हॉक ट्रेनर एयरक्राफ्ट तैनात रहते हैं।
यह एयरबेस कई अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों की मेजबानी भी करता है। सिंगापुर एयर फोर्स के साथ आयोजित संयुक्त युद्धाभ्यासों में कलाईकुंडा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
37 एकड़ अतिरिक्त जमीन मिलने के बाद यहां नए हैंगर, आवासीय सुविधाएं, तकनीकी रखरखाव केंद्र, लॉजिस्टिक्स हब और सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को मिलेगा बड़ा फायदा
हासीमारा और कलाईकुंडा दोनों एयरबेस भारत के बेहद संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर या 'चिकन नेक' की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं। यह संकरा भूभाग भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है।
यदि किसी आपात स्थिति में इस कॉरिडोर को खतरा होता है, तो पूर्वोत्तर राज्यों से संपर्क प्रभावित हो सकता है। ऐसे में इन एयरबेसों की मजबूत उपस्थिति राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
भारत-चीन सीमा पर बढ़ेगी निगरानी
पूर्वी लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक चीन की सैन्य गतिविधियों पर भारत लगातार नजर बनाए हुए है। ऐसे में पूर्वी भारत में स्थित एयरबेसों का आधुनिकीकरण और विस्तार राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बन गया है।
नई जमीन मिलने के बाद वायुसेना यहां आधुनिक रडार सिस्टम, कम्युनिकेशन नेटवर्क, ड्रोन ऑपरेशन सेंटर और अन्य उन्नत रक्षा सुविधाओं का विकास कर सकती है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा फायदा
एयरबेस विस्तार परियोजनाओं का लाभ केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। निर्माण कार्यों, तकनीकी सेवाओं और सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा और आसपास के इलाकों में विकास की गति तेज हो सकती है।
भारत की रक्षा क्षमता को मिलेगी नई मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध केवल लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं रह गया है। एयरबेस अब कमांड सेंटर, ड्रोन हब, इंटेलिजेंस यूनिट और लॉजिस्टिक सपोर्ट सेंटर के रूप में भी काम करते हैं।
हासीमारा और कलाईकुंडा एयरबेस के विस्तार से भारतीय वायुसेना की पूर्वी कमान और अधिक सक्षम होगी। राफेल फाइटर जेट, S-400 एयर डिफेंस सिस्टम और आधुनिक सैन्य सुविधाओं के साथ भारत अपनी पूर्वी सीमाओं की सुरक्षा को नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी कर रहा है।

