जिनेवा, 19 जून 2026: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में भारत ने पाकिस्तान को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कहा कि जो देश आतंकवाद को अपनी नीति का हिस्सा बनाता है, वह दोस्ती और सहयोग के आधार पर मिलने वाले विशेषाधिकारों की उम्मीद नहीं कर सकता। भारत ने साथ ही यह भी कहा कि 1960 में हुआ सिंधु जल समझौता (Indus Waters Treaty) आज के दौर की चुनौतियों और परिस्थितियों के हिसाब से पुराना पड़ चुका है।
UNHRC के 62वें सत्र में भारत की ओर से जवाब देते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ झूठा प्रचार करने के लिए करता है, जबकि उसे अपने आंतरिक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
भारत ने कहा- सिंधु जल समझौता अब पुराना हो चुका है
अनुपमा सिंह ने कहा कि भारत का सिंधु जल समझौते को लेकर रुख पहले से स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि एक ऐसा देश जो आतंकवाद को राज्य नीति के तौर पर इस्तेमाल करता है, वह सहयोग और सद्भावना पर आधारित व्यवस्था के लाभ मांगता रहे।
उन्होंने कहा कि 1960 में तैयार किया गया कोई भी समझौता हमेशा के लिए अपरिवर्तनीय नहीं माना जा सकता। पिछले छह दशकों में दुनिया, तकनीक, जलवायु और क्षेत्रीय परिस्थितियों में बड़े बदलाव आए हैं। ऐसे में किसी तकनीकी व्यवस्था को समय के साथ समीक्षा और जवाबदेही से अलग नहीं रखा जा सकता।
गौरतलब है कि पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को तब तक के लिए स्थगित कर दिया था, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह और विश्वसनीय तरीके से बंद नहीं करता।
पाकिस्तान को पहले अपना घर संभालने की सलाह
भारत ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उसे भारत के क्षेत्रों पर नजर रखने के बजाय अपने देश की समस्याओं को सुलझाने पर ध्यान देना चाहिए।
अनुपमा सिंह ने कहा, "पाकिस्तान अगर भारतीय क्षेत्रों पर दावा करने के बजाय अपने घर को व्यवस्थित करने में ऊर्जा लगाए, तो यह उसके लोगों के लिए कहीं अधिक फायदेमंद होगा। मानवाधिकार परिषद में उसकी मौसमी बयानबाजी अब अपनी प्रासंगिकता खो चुकी है।"
"फ्रेंकेंस्टाइन स्टेट" वाला बयान भी दोहराया
भारत ने पाकिस्तान के आतंकवाद संबंधी रिकॉर्ड पर भी तीखा हमला बोला। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि यह विडंबना है कि एक ऐसा देश, जिसके नेता खुद आतंकियों को पनाह देने और प्रशिक्षित करने की बात स्वीकार करते हैं, वही खुद को आतंकवाद का पीड़ित बताने की कोशिश करता है।
भारत ने पाकिस्तान को "फ्रेंकेंस्टाइन स्टेट" बताते हुए कहा कि उसने वर्षों तक जिन आतंकी संगठनों को बढ़ावा दिया, अब वही उसके लिए चुनौती बन गए हैं।
जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान के दावों को किया खारिज
भारत ने जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की टिप्पणियों को भी पूरी तरह खारिज कर दिया।
अनुपमा सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के आरोप पूरी तरह निराधार, भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा।
भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर से जुड़ा एकमात्र लंबित मुद्दा पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले भारतीय क्षेत्रों को खाली कराना है।
आतंकवाद और सीमा पार गतिविधियों पर भी उठाए सवाल
भारत ने कहा कि पाकिस्तान लगातार सीमा पार आतंकवाद और भारत विरोधी गतिविधियों को समर्थन देता रहा है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर झूठे आरोप लगाने के बजाय उसे अपने व्यवहार में बदलाव लाना चाहिए।
UNHRC में भारत की इस कड़ी प्रतिक्रिया को पाकिस्तान के हालिया आरोपों का करारा जवाब माना जा रहा है। भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि आतंकवाद, सीमा पार हिंसा और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर उसका रुख बिल्कुल स्पष्ट और अडिग है।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह संदेश भी दिया कि आतंकवाद और सहयोग एक साथ नहीं चल सकते। यदि पाकिस्तान सामान्य संबंध और सहयोग चाहता है, तो उसे पहले आतंकवाद के प्रति अपनी नीति में वास्तविक बदलाव दिखाना होगा।

