नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने इंडियन रेलवे फाइनंस कॉर्पोरेशन (IRFC) में हिस्सेदारी बेचकर करीब ₹2,084 करोड़ जुटाए हैं। IRFC OFS 2026 को संस्थागत और खुदरा निवेशकों से जबरदस्त समर्थन मिला, जिसके चलते सरकार ने ग्रीन शू ऑप्शन का भी इस्तेमाल किया। दो दिनों तक चले इस ऑफर फॉर सेल (OFS) के दौरान कुल 22.88 करोड़ शेयर बेचे गए।
निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि IRFC OFS को निवेशकों का उत्साहजनक समर्थन मिला। उन्होंने कहा कि संस्थागत और रिटेल निवेशकों की भागीदारी से सरकार को लगभग ₹2,084 करोड़ की राशि प्राप्त हुई है।
पहले दिन ही ओवरसब्सक्राइब हुआ OFS
सरकार ने 24 जून को IRFC में 1 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव रखा था। इसके साथ 1 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचने के लिए ग्रीन शू ऑप्शन भी रखा गया था। पहले ही दिन OFS को 1.86 गुना सब्सक्रिप्शन मिला, जिसके बाद सरकार ने अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया।
DIPAM के अनुसार, मजबूत निवेशक मांग को देखते हुए ग्रीन शू ऑप्शन लागू किया गया, जिससे सरकार को अधिक पूंजी जुटाने में मदद मिली। इसके बाद 25 जून को खुदरा निवेशकों और कर्मचारियों को भी बोली लगाने का मौका दिया गया।
क्या होता है OFS?
Offer For Sale (OFS) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके जरिए किसी सूचीबद्ध कंपनी के प्रमोटर या सरकार अपनी हिस्सेदारी शेयर बाजार के माध्यम से बेचती है। इस प्रक्रिया में बड़े संस्थागत निवेशकों के साथ-साथ आम निवेशक भी भाग ले सकते हैं। इसका उद्देश्य सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाना और बाजार में शेयरों की उपलब्धता को बढ़ाना होता है।
IRFC क्यों है महत्वपूर्ण?
इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC) भारतीय रेलवे की प्रमुख वित्तीय संस्था है। यह रेलवे परियोजनाओं, ट्रेनों, इंजन, कोच और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है। रेलवे के विस्तार और आधुनिकीकरण में IRFC की अहम भूमिका मानी जाती है।
पिछले कुछ वर्षों में IRFC ने निवेशकों के बीच एक मजबूत PSU स्टॉक के रूप में अपनी पहचान बनाई है। यही वजह है कि OFS में भी निवेशकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
शेयर बाजार में कैसा रहा प्रदर्शन?
हालांकि OFS को शानदार प्रतिक्रिया मिली, लेकिन गुरुवार के कारोबारी सत्र में IRFC के शेयर में हल्की गिरावट देखने को मिली। कंपनी का शेयर 0.79 प्रतिशत की कमजोरी के साथ ₹91.77 पर बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि OFS के दौरान अतिरिक्त शेयर बाजार में आने से अल्पकालिक दबाव बन सकता है, लेकिन लंबी अवधि में कंपनी की स्थिति मजबूत बनी हुई है।
विनिवेश कार्यक्रम को मिली मजबूती
सरकार लगातार अपने विनिवेश कार्यक्रम के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में हिस्सेदारी घटा रही है। इसका उद्देश्य सरकारी राजस्व बढ़ाना, सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ावा देना और बाजार में निवेशकों की हिस्सेदारी को मजबूत करना है।
IRFC OFS की सफलता सरकार के लिए एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। इससे यह भी साफ हुआ है कि रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों का भरोसा बरकरार है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सरकार अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में भी इसी तरह के विनिवेश कदम उठा सकती है। IRFC OFS की सफलता भविष्य के विनिवेश कार्यक्रमों के लिए एक मजबूत आधार तैयार करती है।

