ITR Filing 2026, Revised Return, Income Tax Return Correction और ITR-U इस समय देशभर के करोड़ों टैक्सपेयर्स के लिए चर्चा का विषय बने हुए हैं। आयकर विभाग ने रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया को पहले से आसान बनाया है, लेकिन इसके बावजूद कई लोग रिटर्न भरते समय गलतियां कर बैठते हैं। अच्छी बात यह है कि यदि आपने अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) जमा कर दिया है और बाद में कोई गलती सामने आती है, तो कानून आपको उसे सुधारने का अवसर देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार हर साल बड़ी संख्या में करदाता ब्याज आय छिपा देते हैं, गलत कटौती क्लेम कर लेते हैं, गलत ITR फॉर्म चुन लेते हैं या फिर आय के किसी स्रोत की जानकारी देना भूल जाते हैं। ऐसे मामलों में आयकर अधिनियम की धारा 139(5) के तहत Revised Return दाखिल करके गलती सुधारी जा सकती है।
ITR Filing 2026: क्यों जरूरी है सही टैक्स रिटर्न दाखिल करना?
आयकर विभाग अब Artificial Intelligence (AI), Annual Information Statement (AIS), Form 26AS और अन्य डेटा स्रोतों के जरिए टैक्सपेयर्स की जानकारी का मिलान करता है। ऐसे में छोटी सी गलती भी नोटिस का कारण बन सकती है। इसलिए रिटर्न फाइल करते समय पूरी सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो गया है।
यदि गलती हो भी जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। Revised Return का विकल्प करदाताओं को राहत देता है और बिना अतिरिक्त जुर्माने के रिटर्न में सुधार का मौका प्रदान करता है।
Revised Return क्या है?
Revised Return वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से कोई भी करदाता अपने पहले से दाखिल किए गए ITR में हुई त्रुटियों को सुधार सकता है। यह सुविधा उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी है जिन्होंने समय पर रिटर्न फाइल किया है लेकिन बाद में किसी आय, कटौती या अन्य जानकारी में गलती का पता चला है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| संबंधित धारा | धारा 139(5) |
| कौन फाइल कर सकता है? | जिसने पहले ITR दाखिल किया हो |
| उद्देश्य | गलतियों और छूटी हुई जानकारी को सुधारना |
| जुर्माना | नहीं |
| कितनी बार फाइल कर सकते हैं? | एक से अधिक बार |
किन गलतियों को Revised Return से सुधारा जा सकता है?
- ब्याज आय या अन्य आय की जानकारी छूट जाना
- गलत कटौती (Deduction) क्लेम करना
- आय की गलत गणना
- गलत ITR फॉर्म का चयन
- कैपिटल गेन की गलत रिपोर्टिंग
- विदेशी आय या संपत्ति का खुलासा न करना
- TDS या टैक्स क्रेडिट में त्रुटि
Revised Return दाखिल करने की समय सीमा
करदाता निर्धारित समय सीमा के भीतर Revised Return दाखिल कर सकते हैं। सामान्य रूप से यह सुविधा असेसमेंट ईयर के दौरान उपलब्ध रहती है। हालांकि, यदि आयकर विभाग द्वारा असेसमेंट पूरा कर लिया जाता है, तो फिर रिटर्न संशोधित नहीं किया जा सकता।
इसलिए जैसे ही गलती का पता चले, तुरंत रिटर्न संशोधित कर देना चाहिए।
क्या Refund मिलने के बाद भी Revised Return फाइल कर सकते हैं?
जी हां, यदि आपके खाते में टैक्स रिफंड आ चुका है और बाद में किसी गलती का पता चलता है, तब भी Revised Return दाखिल किया जा सकता है। हालांकि यदि संशोधित रिटर्न के बाद अतिरिक्त टैक्स देनदारी बनती है तो उसका भुगतान करना होगा।
ITR-U क्या है और कब उपयोग किया जाता है?
यदि Revised Return की समय सीमा निकल चुकी है, तब करदाता के पास ITR-U यानी Updated Return का विकल्प उपलब्ध रहता है। इसे आयकर अधिनियम की धारा 139(8A) के तहत पेश किया गया है।
यह उन लोगों के लिए है जिन्होंने रिटर्न फाइल नहीं किया या बाद में छूटी हुई आय का खुलासा करना चाहते हैं। हालांकि इसमें अतिरिक्त टैक्स और ब्याज देना पड़ता है।
| Revised Return | ITR-U |
|---|---|
| धारा 139(5) | धारा 139(8A) |
| गलती सुधारने के लिए | देर से सुधार या छूटी आय बताने के लिए |
| कोई अतिरिक्त जुर्माना नहीं | अतिरिक्त टैक्स और शुल्क लागू |
| कई बार फाइल कर सकते हैं | एक बार |
| रिफंड क्लेम संभव | रिफंड क्लेम नहीं |
ITR Filing 2026 में टैक्सपेयर्स को इन 8 बड़ी गलतियों से बचना चाहिए
विशेषज्ञों के अनुसार इस साल रिटर्न फाइल करते समय करदाताओं को निम्नलिखित गलतियों से बचना चाहिए:
- बिना प्रमाण के HRA या अन्य कटौतियां क्लेम करना
- AIS और Form 26AS का मिलान न करना
- गलत ITR फॉर्म चुनना
- सभी आय स्रोतों की जानकारी न देना
- कैपिटल गेन की गलत रिपोर्टिंग
- पुरानी नौकरी की आय छिपाना
- अंतिम तारीख के बाद रिटर्न दाखिल करना
- रिटर्न फाइल करने के बाद ई-वेरिफिकेशन न करना
कैसे करें Revised Return फाइल?
Revised Return दाखिल करने की प्रक्रिया काफी आसान है:
- इनकम टैक्स पोर्टल पर लॉगिन करें
- Revised Return विकल्प चुनें
- मूल ITR का Acknowledgement Number दर्ज करें
- जरूरी सुधार करें
- रिटर्न दोबारा सबमिट करें
- ई-वेरिफिकेशन पूरा करें
निष्कर्ष
ITR Filing 2026 के दौरान यदि आपसे कोई गलती हो जाती है तो Revised Return आपके लिए सबसे आसान और सुरक्षित विकल्प है। समय रहते गलती सुधार लेने से नोटिस, जुर्माने और अनावश्यक जांच से बचा जा सकता है। वहीं यदि समय सीमा निकल जाए तो ITR-U का विकल्प मौजूद है, लेकिन इसमें अतिरिक्त टैक्स का बोझ बढ़ सकता है। इसलिए करदाताओं को सलाह दी जाती है कि रिटर्न भरने से पहले सभी दस्तावेजों का मिलान करें और पूरी सावधानी के साथ ITR दाखिल करें।

