नई दिल्ली: भारतीय टेबल टेनिस स्टार और ओलंपियन Manika Batra ने Asian Games 2026 के लिए घोषित भारतीय महिला टीम से बाहर किए जाने के बाद चयन प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया (TTFI) द्वारा घोषित 10 सदस्यीय टीम में मनिका बत्रा को मुख्य स्क्वाड से बाहर रखते हुए रिजर्व खिलाड़ियों में शामिल किया गया, जिसके बाद खेल जगत में बहस तेज हो गई है।
“मैं चयन नहीं, जवाब चाहती हूं” — Manika Batra
मनिका बत्रा ने अपने बयान में साफ कहा कि वह टीम में जगह मांग नहीं रही हैं, बल्कि चयन प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता चाहती हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों से वह भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और हर तरह के परिणाम स्वीकार किए हैं, लेकिन इस बार उन्हें कारण नहीं बताया गया कि उन्हें टीम से बाहर क्यों किया गया।
उनका कहना था कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और निर्णय के पीछे कोई स्पष्ट आधार नहीं दिया गया है।
मनिका ने कहा:
“No specific reason for my non-selection has been communicated to me.”
रैंकिंग और चयन प्रक्रिया पर सवाल
Manika Batra ने अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग सिस्टम पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि टेबल टेनिस रैंकिंग हर सप्ताह बदलती है और यह रोलिंग प्वाइंट सिस्टम पर आधारित होती है।
उन्होंने पूछा कि चयन में किस समयावधि (6 महीने, 12 महीने या हाल की रैंकिंग) को आधार बनाया गया।
मनिका वर्तमान में विश्व रैंकिंग में 51वें स्थान पर हैं और उन्होंने कहा कि केवल एक या दो हफ्तों के उतार-चढ़ाव से किसी खिलाड़ी की योग्यता तय नहीं होनी चाहिए।
“हाल के प्रदर्शन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता”
उन्होंने यह भी कहा कि उनके हालिया प्रदर्शन काफी मजबूत रहे हैं और उन्होंने कई शीर्ष एशियाई और चीनी खिलाड़ियों को हराया है।
उनका मानना है कि केवल रैंकिंग ही नहीं बल्कि वर्तमान फॉर्म और प्रदर्शन भी चयन का हिस्सा होना चाहिए।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि खेल मंत्रालय भी लगातार इस बात पर जोर देता है कि चयन में वर्तमान फॉर्म को प्राथमिकता दी जाए।
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का मुद्दा
मनिका ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए घरेलू टूर्नामेंट और वैश्विक प्रतियोगिताओं के बीच संतुलन बनाना कठिन होता है।
उन्होंने कहा कि लगातार यात्रा, रिकवरी और वीज़ा जैसी समस्याओं के कारण घरेलू टूर्नामेंट में भाग लेना हमेशा संभव नहीं होता।
अन्य खिलाड़ियों के बाहर होने पर भी सवाल
उन्होंने चयन प्रक्रिया में अन्य अनुभवी खिलाड़ियों के बाहर होने पर भी चिंता जताई।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अय्हिका मुखर्जी जैसी खिलाड़ी, जिन्होंने एशियन गेम्स में भारत के लिए मेडल जीता था, उन्हें भी बाहर किया गया है।
Voting-based selection पर विवाद
मनिका बत्रा ने चयन प्रणाली पर एक और गंभीर सवाल उठाया कि क्या चयन वोटिंग प्रक्रिया से हुआ है।
उन्होंने पूछा कि अगर ऐसा है तो क्या यह प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष हो सकती है और क्या इसमें पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि चयन समिति के सदस्यों की योग्यता और अनुभव क्या है और क्या उन्होंने खुद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है।
निष्कर्ष
Manika Batra का यह बयान भारतीय खेल प्रशासन में चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
उनका कहना स्पष्ट है — उन्हें टीम में जगह नहीं चाहिए, बल्कि सिर्फ एक ईमानदार और स्पष्ट जवाब चाहिए।

