जयपुर: NEET-UG 2026 री-एग्जाम के दौरान राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था, तकनीक के दुरुपयोग और नकल के बदलते तरीकों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। बिंदायका स्थित परीक्षा केंद्र में एक छात्रा को कथित रूप से मोबाइल फोन के जरिए नकल करने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया। जांच में सामने आया कि छात्रा ने मोबाइल फोन को अपने अंडरगारमेंट्स में छिपाकर परीक्षा केंद्र के अंदर पहुंचाया था और वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से प्रश्नों के उत्तर खोजने का प्रयास कर रही थी।
घटना के सामने आने के बाद परीक्षा केंद्र प्रशासन, पुलिस और शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने छात्रा को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। कोर्ट से बाहर निकलते समय छात्रा अपना चेहरा छिपाती हुई भी नजर आई।
AI से उत्तर खोजने की थी योजना
पुलिस अधिकारियों के अनुसार छात्रा ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन की सहायता से AI आधारित टूल्स का उपयोग कर सवालों के जवाब प्राप्त करना चाहती थी। हाल के वर्षों में AI तकनीक की बढ़ती पहुंच ने शिक्षा क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा की हैं, लेकिन इस घटना ने यह भी दिखा दिया कि तकनीक का गलत इस्तेमाल किस प्रकार परीक्षा की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि छात्रा ने प्रश्नपत्र की कुछ तस्वीरें अपने मोबाइल फोन से खींची थीं। हालांकि परीक्षा केंद्र के आसपास लगाए गए जैमर (Jammer) सक्रिय होने के कारण वह तस्वीरें किसी बाहरी व्यक्ति तक नहीं पहुंच सकीं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि छात्रा अकेले काम कर रही थी या उसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क भी सक्रिय था।
सुरक्षा जांच के बावजूद कैसे पहुंचा मोबाइल?
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद मोबाइल फोन परीक्षा कक्ष तक कैसे पहुंच गया। जांच में पता चला है कि परीक्षा केंद्र में प्रवेश के दौरान दो बार मेटल डिटेक्टर ने अलर्ट दिया था। जब सुरक्षा कर्मियों ने छात्रा से पूछताछ की तो उसने बताया कि अलर्ट उसके अंडरगारमेंट्स में लगे धातु के हुक के कारण आ रहा है।
छात्रा के इस जवाब के बाद सुरक्षा कर्मियों ने उसे अंदर जाने की अनुमति दे दी। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या सुरक्षा जांच में लापरवाही हुई या फिर किसी स्तर पर नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।
फॉरेंसिक जांच करेगी बड़ा खुलासा
डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण ने बताया कि बरामद मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है। फॉरेंसिक रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि मोबाइल में कौन-कौन से एप्लिकेशन इस्तेमाल किए गए, क्या AI टूल्स खोले गए थे, क्या किसी व्यक्ति से संपर्क किया गया था और क्या प्रश्नपत्र की तस्वीरें किसी को भेजने की कोशिश की गई थी।
फॉरेंसिक विशेषज्ञ मोबाइल के चैट रिकॉर्ड, इंटरनेट गतिविधियों, स्क्रीनशॉट, क्लाउड बैकअप और अन्य डिजिटल सबूतों की भी जांच करेंगे। यदि किसी बड़े नकल गिरोह की संलिप्तता सामने आती है तो मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
परीक्षा केंद्र के कर्मचारियों से भी पूछताछ
पुलिस केवल छात्रा की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहती। मामले की गंभीरता को देखते हुए परीक्षा केंद्र के अधीक्षक, सुरक्षा कर्मियों और ड्यूटी पर मौजूद अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यदि सुरक्षा जांच पूरी तरह प्रभावी होती तो मोबाइल परीक्षा हॉल तक नहीं पहुंच पाता।
जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा मानकों का पालन निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप किया गया था या नहीं।
परीक्षा सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET में हर साल लाखों छात्र शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है। हाल के वर्षों में पेपर लीक, ब्लूटूथ डिवाइस, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और अब AI आधारित नकल के प्रयासों ने परीक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मेटल डिटेक्टर और जैमर पर्याप्त नहीं हैं। भविष्य में अधिक उन्नत स्कैनिंग तकनीक, बॉडी स्कैनर और AI आधारित निगरानी सिस्टम की आवश्यकता पड़ सकती है ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
AI तकनीक का बढ़ता दुरुपयोग
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज शिक्षा, स्वास्थ्य, विज्ञान और उद्योग के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है। लेकिन जयपुर की यह घटना दिखाती है कि कुछ लोग इसका उपयोग अनुचित लाभ प्राप्त करने के लिए भी करने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि AI स्वयं समस्या नहीं है, बल्कि उसका गलत उपयोग चिंता का विषय है।
शिक्षा जगत के जानकारों का मानना है कि छात्रों को तकनीक के जिम्मेदार उपयोग के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
क्या हो सकती है आगे की कार्रवाई?
फिलहाल छात्रा न्यायिक हिरासत में है और पुलिस जांच जारी है। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद मामले में नई धाराएं जोड़ी जा सकती हैं। यदि यह साबित होता है कि प्रश्नपत्र बाहर भेजने या किसी संगठित नकल नेटवर्क से संपर्क करने की कोशिश की गई थी, तो कार्रवाई और भी सख्त हो सकती है।
यह मामला केवल एक छात्रा की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे परीक्षा तंत्र के लिए एक चेतावनी है कि तकनीक के इस नए दौर में सुरक्षा व्यवस्था को भी लगातार अपडेट करना होगा।
NEET Re-Exam 2026 की यह घटना आने वाले समय में परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और AI के उपयोग को लेकर नई नीतियों की दिशा तय कर सकती है।

