राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी आज ओडिशा के मयूरभंज दौरे पर, 47,600 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात

Praveen Yadav
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भुवनेश्वर: ओडिशा के लिए शनिवार का दिन बेहद खास रहने वाला है। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक साथ मयूरभंज जिले के दौरे पर पहुंचेंगे। किसी राज्य के दौरे में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की एक साथ मौजूदगी बेहद दुर्लभ मानी जाती है, जिससे इस कार्यक्रम का महत्व और बढ़ गया है।

भुवनेश्वर: ओडिशा के लिए शनिवार का दिन बेहद खास रहने वाला है। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक साथ मयूरभंज जिले के दौरे पर पहुंचेंगे। किसी राज्य के दौरे में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की एक साथ मौजूदगी बेहद दुर्लभ मानी जाती है, जिससे इस कार्यक्रम का महत्व और बढ़ गया है।


इस दौरान दोनों नेता मयूरभंज जिले के पहाड़पुर गांव का दौरा करेंगे और आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़े पवित्र स्थलों संथाली जाहेरा और हो जाहेरा में पूजा-अर्चना करेंगे। इसके अलावा वे स्किल सेंटर और पहाड़पुर स्कूल का भी दौरा करेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के प्रयासों को मजबूती देना है।


ओडिशा सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर विशेष कार्यक्रम

राष्ट्रपति मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी मयूरभंज जिले के रायरंगपुर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे। यह कार्यक्रम ओडिशा सरकार के दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है, जिसकी थीम 'विकास रा धारा, ओडिशा सारा' रखी गई है।


इस अवसर पर राज्यभर में विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया जाएगा। इन परियोजनाओं की कुल लागत 47,600 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। प्रधानमंत्री मोदी इस कार्यक्रम को संबोधित भी करेंगे।


ऊर्जा, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र को मिलेगी बड़ी मजबूती

इन विकास परियोजनाओं में ऊर्जा, औद्योगिक बुनियादी ढांचे, सड़क संपर्क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से राज्य में आधारभूत संरचना मजबूत होगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी।


इन बड़ी परियोजनाओं का होगा शिलान्यास

कार्यक्रम के दौरान जिन प्रमुख परियोजनाओं की आधारशिला रखी जाएगी, उनमें 600 मेगावाट का अपर इंद्रावती पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट और आईबी थर्मल पावर स्टेशन के दूसरे चरण का विस्तार शामिल है। इस विस्तार परियोजना के तहत 660-660 मेगावाट की दो नई इकाइयां स्थापित की जाएंगी।


इसके अलावा झारसुगुड़ा जिले के लखनपुर में भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (BCGCL) परियोजना का भी शिलान्यास होगा। यह परियोजना घरेलू कोयले के स्वच्छ उपयोग को बढ़ावा देने, आयात पर निर्भरता कम करने और क्षेत्र में नए रोजगार सृजित करने में मदद करेगी।


भुवनेश्वर में बायोगैस प्लांट और कटक-भुवनेश्वर को जोड़ने वाला पुल

अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं में भुवनेश्वर में 300 टन प्रतिदिन क्षमता वाला ठोस कचरे पर आधारित कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट, कटक और भुवनेश्वर को सीधे जोड़ने वाला काठजोड़ी नदी पर नया पुल, बौध जिले में ढालपुर-हरभंगा सड़क का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण तथा नुआपाड़ा से घाटीपाड़ा तक राष्ट्रीय राजमार्ग-353 के एक हिस्से का फोरलेन निर्माण शामिल है।


इसके साथ ही कुसुमडीही मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजना, रायरंगपुर में इग्नू क्षेत्रीय केंद्र और इंडोर बैडमिंटन कॉम्प्लेक्स का भी शिलान्यास किया जाएगा।


कई परियोजनाओं का होगा उद्घाटन

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन भी करेंगे। इनमें बौध जिले का 300 बेड वाला जिला मुख्यालय अस्पताल भवन, राज्य के विभिन्न जिलों में बने 24 अटल बस स्टैंड और नौ ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन शामिल हैं।


इसके अलावा नयागढ़ टाउन बाईपास, कुसुमी स्मार्ट सिंचाई परियोजना का भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क, जखपुरा-जाजपुर-केओंझार रोड-बैतरणी रोड मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना, हिंदोल रोड-मेरामंडली मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना, रायरंगपुर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और जनजातीय अनुसंधान केंद्र का भी उद्घाटन किया जाएगा।


आदिवासी और ग्रामीण विकास पर विशेष फोकस

केंद्र और राज्य सरकार का कहना है कि ये सभी परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समावेशी विकास के विजन को आगे बढ़ाने का काम करेंगी। विशेष रूप से आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं मयूरभंज जिले से संबंध रखती हैं, ऐसे में उनका यह दौरा स्थानीय लोगों के लिए भी भावनात्मक और ऐतिहासिक महत्व रखता है। माना जा रहा है कि इस कार्यक्रम से ओडिशा में विकास की नई गति देखने को मिलेगी।

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