JanDrishti Today | अयोध्या: राम मंदिर सिल्वर ब्रिक्स को लेकर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे और आरोप वायरल हो रहे थे। कुछ पोस्ट में कहा जा रहा था कि राम मंदिर दान में मिली चांदी की ईंटों का कोई रिकॉर्ड नहीं है और वे गायब हो चुकी हैं। अब इस पूरे मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच ने बड़ा खुलासा किया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे कई दावे तथ्यों से मेल नहीं खाते और ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दान की गई सभी चांदी का पूरा हिसाब दर्ज है।
राम मंदिर सिल्वर ब्रिक्स को लेकर क्या था विवाद?
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु दान करते हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट तेजी से वायरल हुईं, जिनमें दावा किया गया कि मंदिर को दान में मिली चांदी की ईंटें गायब हो गई हैं। कुछ लोगों ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और दान की गई चांदी के उपयोग को लेकर संदेह जताया।
इन आरोपों के बाद मामला चर्चा में आया और जांच एजेंसियों ने रिकॉर्ड की विस्तार से पड़ताल शुरू की।
SIT जांच में क्या सामने आया?
आजतक को मिली विशेष जानकारी के अनुसार, राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच कर रही एसआईटी ने मंदिर ट्रस्ट के रिकॉर्ड, दान रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों की बारीकी से जांच की। जांच में पाया गया कि दान में मिली सभी चांदी का रिकॉर्ड विधिवत दर्ज है और सोशल मीडिया पर किए जा रहे कई दावे वास्तविक दस्तावेजों से मेल नहीं खाते।
एसआईटी ने विशेष रूप से उन आरोपों की भी जांच की जिनमें अनुराग रस्तोगी द्वारा दान की गई चांदी की ईंटों का उल्लेख किया गया था। जांच एजेंसी के अनुसार, रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि दान की गई चांदी गायब हुई हो।
दान की गई चांदी की ईंटों का पूरा रिकॉर्ड मौजूद
एसआईटी के अनुसार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अभिलेखों में चांदी के दान का पूरा विवरण सुरक्षित रखा गया है। जांच में सामने आया कि 21 जुलाई 2020 और 28 जुलाई 2020 के दौरान कुल 38 किलोग्राम चांदी ट्रस्ट को दान में मिली थी। इसके बाद 29 जुलाई 2020 को 25.576 किलोग्राम चांदी की ईंटें भी ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज हैं।
जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया कि इन सभी दानों का आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी के प्रमाण इस संबंध में नहीं मिले हैं।
चांदी की ईंटें कहां रखी गई हैं?
जांच में सबसे अहम खुलासा यह हुआ कि दान में मिली चांदी की ईंटें कहीं गायब नहीं हुई हैं। एसआईटी के अनुसार ट्रस्ट की निर्धारित प्रक्रिया के तहत इन चांदी की ईंटों को गलाकर सुरक्षित रूप में बैंक के लॉकर में रखा गया है।
इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों को जांच एजेंसी ने खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि चांदी की ईंटें लापता हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेज और रिकॉर्ड इन आरोपों का समर्थन नहीं करते।
फिर किस मामले की जांच जारी है?
हालांकि चांदी की ईंटों को लेकर लगाए गए आरोप गलत पाए गए हैं, लेकिन राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच अभी भी जारी है। एसआईटी की सिफारिश पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है।
इन आरोपियों पर दान राशि की चोरी, आपराधिक साजिश, अमानत में खयानत तथा भ्रष्टाचार से जुड़े विभिन्न आरोप लगाए गए हैं। पुलिस और एसआईटी दोनों अलग-अलग पहलुओं से पूरे मामले की जांच कर रही हैं।
जांच में सामने आईं कई व्यवस्थागत कमियां
सूत्रों के अनुसार शुरुआती जांच में मंदिर प्रशासन की कुछ व्यवस्थागत कमियां भी सामने आई हैं। इनमें कर्मचारियों की निगरानी व्यवस्था, नकदी की गिनती, सीसीटीवी मॉनिटरिंग और दान राशि को बैंक तक सुरक्षित पहुंचाने की प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता बताई गई है। जांच एजेंसियां इन बिंदुओं की भी विस्तार से पड़ताल कर रही हैं ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके।
चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की भी चर्चा
इसी बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे की खबरें भी चर्चा में हैं। हालांकि इन इस्तीफों को लेकर आधिकारिक रूप से अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं, लेकिन चढ़ावा मामले की जांच के बीच यह घटनाक्रम भी सुर्खियों में बना हुआ है।
निष्कर्ष
एसआईटी की अब तक की जांच के अनुसार राम मंदिर सिल्वर ब्रिक्स गायब होने का दावा सही नहीं पाया गया है। जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि दान में मिली चांदी की ईंटों का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है और उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रूप से बैंक लॉकर में रखा गया है। वहीं, चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े अन्य मामलों की जांच अभी जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे प्रकरण की अंतिम तस्वीर साफ हो सकेगी।

