फीफा विश्व कप 2026 में हाइड्रेशन ब्रेक पर बोले संदीश झिंगन, 48 टीमों के विस्तार का किया समर्थन

Praveen Yadav
0
मुंबई: भारतीय फुटबॉल टीम के स्टार डिफेंडर संदीश झिंगन ने फीफा विश्व कप 2026 में लागू किए गए हाइड्रेशन ब्रेक और टूर्नामेंट के 48 टीमों तक विस्तार को लेकर अपनी राय रखी है। झिंगन ने जहां खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए हाइड्रेशन ब्रेक की जरूरत को स्वीकार किया, वहीं इसके मैच की गति और रोमांच पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता भी जताई। दूसरी ओर उन्होंने विश्व कप में 48 टीमों को शामिल करने के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि इससे टूर्नामेंट और अधिक प्रतिस्पर्धी और रोमांचक बना है।

मुंबई: भारतीय फुटबॉल टीम के स्टार डिफेंडर संदीश झिंगन ने फीफा विश्व कप 2026 में लागू किए गए हाइड्रेशन ब्रेक और टूर्नामेंट के 48 टीमों तक विस्तार को लेकर अपनी राय रखी है। झिंगन ने जहां खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए हाइड्रेशन ब्रेक की जरूरत को स्वीकार किया, वहीं इसके मैच की गति और रोमांच पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता भी जताई। दूसरी ओर उन्होंने विश्व कप में 48 टीमों को शामिल करने के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि इससे टूर्नामेंट और अधिक प्रतिस्पर्धी और रोमांचक बना है।


हाइड्रेशन ब्रेक से मैच की लय हो रही प्रभावित

फीफा विश्व कप 2026 के दौरान उत्तर अमेरिका में पड़ रही भीषण गर्मी और उमस को देखते हुए खिलाड़ियों के लिए प्रत्येक हाफ में हाइड्रेशन ब्रेक की व्यवस्था की गई है। आमतौर पर पहला ब्रेक 22वें मिनट और दूसरा 67वें मिनट के आसपास दिया जा रहा है। प्रत्येक ब्रेक लगभग तीन मिनट का होता है।


संदीश झिंगन ने कहा कि जब उन्होंने पहली बार टीवी पर विश्व कप मैचों में इन ब्रेक्स को देखा तो उन्हें यह अवधि काफी लंबी लगी। उनके अनुसार फुटबॉल की सबसे बड़ी खूबी इसकी तेज रफ्तार और लगातार चलने वाला खेल होना है।


उन्होंने कहा कि फुटबॉल में सिर्फ 10 सेकंड के अंदर मैच का रुख बदल सकता है और यही वजह है कि दुनिया भर के करोड़ों लोग इस खेल को पसंद करते हैं।


“ऐसा लगता है जैसे मैच चार हिस्सों में बंट गया हो”

झिंगन का मानना है कि तीन-तीन मिनट के दो हाइड्रेशन ब्रेक के कारण मैच की प्राकृतिक गति टूट जाती है। उन्होंने कहा कि अब कई मुकाबले ऐसे महसूस होते हैं जैसे उन्हें चार क्वार्टर में बांट दिया गया हो।


भारतीय डिफेंडर के अनुसार इन ब्रेक्स के दौरान कोच खिलाड़ियों को रणनीतिक निर्देश देते हैं, फॉर्मेशन बदलते हैं और मैच की दिशा को प्रभावित करते हैं। इससे खेल की स्वाभाविक लय और रोमांच कम हो जाता है।


उन्होंने कहा कि फुटबॉल का असली मजा तब आता है जब खिलाड़ी थकान के बावजूद पूरी ताकत से खेलते हैं। इसी दौरान मैदान पर जगह बनती है, मौके पैदा होते हैं और दर्शकों को रोमांचक फुटबॉल देखने को मिलती है।


झिंगन ने यह भी कहा कि आंकड़ों से यह साबित हुआ है कि हाइड्रेशन ब्रेक के बाद मैच का मोमेंटम अक्सर नीचे चला जाता है, जो इस बात का संकेत है कि लंबे ब्रेक खेल की तीव्रता को प्रभावित कर रहे हैं।


फीफा को नियमों में बदलाव पर करना चाहिए विचार

संदीश झिंगन ने सुझाव दिया कि हाइड्रेशन ब्रेक केवल उन्हीं परिस्थितियों में दिए जाने चाहिए जब तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो या आर्द्रता का स्तर बहुत ज्यादा हो।


उन्होंने यह भी कहा कि ब्रेक की अवधि तीन मिनट से कम होनी चाहिए और खिलाड़ियों को टचलाइन के बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसके बजाय पानी लेकर स्टाफ मैदान पर आए और खिलाड़ी वहीं रहकर हाइड्रेट हों।


उनका मानना है कि इससे खिलाड़ियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी और फुटबॉल की मूल पहचान भी बरकरार रहेगी।


48 टीमों वाले विश्व कप का किया समर्थन

जहां हाइड्रेशन ब्रेक को लेकर उन्होंने चिंता जताई, वहीं फीफा विश्व कप को 32 से बढ़ाकर 48 टीमों का करने के फैसले का उन्होंने खुलकर समर्थन किया।


टूर्नामेंट शुरू होने से पहले कई विशेषज्ञों ने आशंका जताई थी कि नए प्रारूप में कमजोर टीमों के खिलाफ बड़े देशों की एकतरफा जीत देखने को मिलेगी। लेकिन अब तक के मुकाबलों ने इन आशंकाओं को काफी हद तक गलत साबित किया है।


झिंगन ने विशेष रूप से केप वर्डे जैसी टीमों का उदाहरण दिया, जिन्होंने स्पेन जैसी मजबूत टीम के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया और बाद में उरुग्वे के खिलाफ भी कड़ी चुनौती पेश की।


छोटी टीमों ने आलोचकों को दिया जवाब

संदीश झिंगन ने कहा कि लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि विश्व कप में पहुंचने वाली हर टीम ने लंबी और कठिन क्वालिफिकेशन प्रक्रिया पार की होती है।


उन्होंने कहा कि अर्जेंटीना, फ्रांस और स्पेन जैसी बड़ी टीमों की तरह छोटी टीमें भी 18 से 24 मैच खेलकर विश्व कप के लिए क्वालिफाई करती हैं। इसलिए उनकी मौजूदगी पूरी तरह योग्यता पर आधारित होती है।


भारतीय फुटबॉलर का मानना है कि विश्व कप में नए देशों की भागीदारी से खेल का वैश्विक विस्तार हो रहा है और इससे टूर्नामेंट में नई कहानियां और नए रोमांच देखने को मिल रहे हैं।


केप वर्डे बना विश्व कप का सरप्राइज पैकेज

केप वर्डे के प्रदर्शन की तारीफ करते हुए झिंगन ने कहा कि स्पेन के खिलाफ ड्रॉ के बाद बहुत से लोगों को लगा था कि उरुग्वे के खिलाफ टीम बुरी तरह हार जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।


उरुग्वे के खिलाफ भी केप वर्डे ने शानदार खेल दिखाया और मुकाबला 2-2 से ड्रॉ कराया। कई मौकों पर तो ऐसा लगा कि वह मैच जीत भी सकते हैं।


झिंगन के अनुसार यही विश्व कप की खूबसूरती है, जहां कोई भी टीम किसी भी दिन बड़ी टीम को चुनौती दे सकती है।


फुटबॉल की लोकप्रियता का प्रमाण है विश्व कप विस्तार

संदीश झिंगन ने कहा कि 48 टीमों वाला विश्व कप यह दिखाता है कि फुटबॉल दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल क्यों है।


उन्होंने कहा कि इस खेल में किसी टीम की जीत पहले से तय नहीं होती। बड़े खिलाड़ी और बड़ी टीम होने के बावजूद यदि कोई टीम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं करती, तो उसे हार का सामना करना पड़ सकता है।


उनके अनुसार विश्व कप का विस्तार अधिक देशों को अवसर देता है और वैश्विक स्तर पर फुटबॉल के विकास को बढ़ावा देता है।


क्या भविष्य में और बढ़ेगी टीमों की संख्या?

झिंगन ने कहा कि 48 टीमों का प्रारूप अभी सफल साबित होता दिख रहा है, लेकिन भविष्य में इससे आगे विस्तार को लेकर सावधानी बरतनी होगी।


उन्होंने कहा कि एक सीमा तय होना जरूरी है और इस संबंध में अंतिम फैसला फीफा के अधिकारियों को ही करना चाहिए।


फिलहाल विश्व कप 2026 में 48 टीमों के प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि फुटबॉल का स्तर दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहा है और छोटे देश भी अब बड़ी ताकतों को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Please Select Embedded Mode To show the Comment System.*