UP Police Constable Sunil Kumar Shukla Dismissed: भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाले सिपाही सुनील कुमार शुक्ला सेवा से बर्खास्त

Praveen Yadav
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस में विभागीय भ्रष्टाचार, कथित वसूली और प्रताड़ना के आरोप लगाकर सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करने वाले लखनऊ पुलिस लाइन में तैनात रहे आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने यह कार्रवाई की है। पुलिस का कहना है कि जांच में सोशल मीडिया नीति के उल्लंघन, विभागीय अनुशासनहीनता और बिना साक्ष्य गंभीर आरोप लगाने के मामले सिद्ध पाए गए।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस में विभागीय भ्रष्टाचार, कथित वसूली और प्रताड़ना के आरोप लगाकर सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करने वाले लखनऊ पुलिस लाइन में तैनात रहे आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने यह कार्रवाई की है। पुलिस का कहना है कि जांच में सोशल मीडिया नीति के उल्लंघन, विभागीय अनुशासनहीनता और बिना साक्ष्य गंभीर आरोप लगाने के मामले सिद्ध पाए गए।


पहले किया गया था निलंबित

सुनील कुमार शुक्ला ने कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर कई वीडियो जारी कर विभागीय अधिकारियों पर ड्यूटी लगाने के नाम पर कथित वसूली, भ्रष्टाचार और प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की गई थी।


रविवार को लखनऊ पुलिस के आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल के माध्यम से जानकारी दी गई कि विभागीय जांच पूरी होने के बाद आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।


जांच समिति ने दर्ज किए बयान

लखनऊ पुलिस के अनुसार, 7 मई 2026 को गठित जांच समिति ने मामले की विस्तृत जांच की। जांच के दौरान संबंधित पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए गए और सुनील कुमार शुक्ला सहित सभी संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने तथा साक्ष्य प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया गया।


विभाग का कहना है कि सुनील कुमार शुक्ला अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके।


बिना साक्ष्य लगाए गंभीर आरोप

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, आरक्षी द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर बिना पर्याप्त साक्ष्य गंभीर आरोप लगाए गए। विभाग ने इसे पुलिस की छवि धूमिल करने का प्रयास माना है।


जांच में यह भी कहा गया कि उनके आचरण से पुलिस बल में अनुशासनहीनता को बढ़ावा मिला तथा उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के प्रति आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया।


सोशल मीडिया नीति के उल्लंघन का आरोप

लखनऊ पुलिस के अनुसार, सुनील कुमार शुक्ला ने बिना विभागीय अनुमति सोशल मीडिया का उपयोग करते हुए उत्तर प्रदेश सोशल मीडिया नीति-2023, उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली तथा उत्तर प्रदेश वर्दी विनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया। इन्हीं आधारों पर उनके खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई की गई।


वीडियो में लगाए थे वसूली के आरोप

अपने वायरल वीडियो में सुनील कुमार शुक्ला ने दावा किया था कि पुलिसकर्मियों से ड्यूटी लगाने के नाम पर दो हजार रुपये तक की वसूली की जाती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि कथित रूप से यह रकम एक चेन सिस्टम के माध्यम से उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई जाती है। वीडियो में उन्होंने कुछ वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों पर भी तीखी टिप्पणी की थी।


इन आरोपों के सार्वजनिक होने के बाद पुलिस मुख्यालय ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए संबंधित शाखा से एक उपनिरीक्षक समेत कई पुलिसकर्मियों को भी हटाया गया था।


क्या होगा आगे?

आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला की बर्खास्तगी के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है। पुलिस विभाग का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह विभागीय जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर की गई है। वहीं इस मामले को लेकर आगे यदि कोई कानूनी चुनौती या अपील दायर की जाती है तो उस पर संबंधित न्यायिक अथवा विभागीय प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।


यह मामला उत्तर प्रदेश पुलिस में सोशल मीडिया के उपयोग, विभागीय अनुशासन और शिकायतों को सार्वजनिक मंचों पर उठाने की प्रक्रिया को लेकर भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।


पत्नी भी हैं उत्तर प्रदेश पुलिस में तैनात

आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला की पत्नी भी उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही के पद पर कार्यरत हैं और वर्तमान में उनकी तैनाती रायबरेली जिले में बताई जा रही है। हालांकि विभागीय कार्रवाई केवल सुनील कुमार शुक्ला के विरुद्ध की गई है और इसका उनकी पत्नी की सेवा से कोई संबंध नहीं है।


लखनऊ पुलिस ने क्या कहा?

लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की ओर से जारी जानकारी में कहा गया कि विभागीय जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी की गई। जांच के दौरान सभी संबंधित व्यक्तियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया, लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला पर लगाए गए आरोप सिद्ध पाए गए।


पुलिस का कहना है कि किसी भी सरकारी कर्मचारी को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए निर्धारित विभागीय प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। बिना अनुमति सोशल मीडिया के माध्यम से विभागीय मामलों को सार्वजनिक करना सेवा नियमों का उल्लंघन माना जाता है।


सोशल मीडिया पर फिर छिड़ी बहस

सुनील कुमार शुक्ला की बर्खास्तगी के बाद सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग विभागीय अनुशासन को बनाए रखने के लिए कार्रवाई को उचित बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग पूरे मामले में निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं।


हालांकि पुलिस विभाग का स्पष्ट कहना है कि कार्रवाई केवल विभागीय जांच रिपोर्ट, उपलब्ध तथ्यों और सेवा नियमों के आधार पर की गई है।


निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश पुलिस के सिपाही सुनील कुमार शुक्ला की बर्खास्तगी का मामला सोशल मीडिया, सरकारी सेवा नियमों और विभागीय अनुशासन को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है। जहां एक ओर पुलिस विभाग इसे अनुशासन बनाए रखने की कार्रवाई बता रहा है, वहीं यह मामला सरकारी कर्मचारियों द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल और शिकायत दर्ज कराने की निर्धारित प्रक्रिया पर भी नई बहस छेड़ सकता है। आने वाले समय में यदि इस फैसले के खिलाफ कानूनी अपील की जाती है तो मामले में नए घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।

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