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| VB-GRAM G के तहत ग्रामीण मजदूरों के लिए नई मजदूरी दरें लागू |
JanDrishti Today: केंद्र सरकार ने Viksit Bharat-Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) (VB-GRAM G) Act, 2025 के तहत देशभर के ग्रामीण मजदूरों के लिए नई दैनिक मजदूरी दरों की अधिसूचना जारी कर दी है। 1 जुलाई 2026 से लागू इस नई व्यवस्था के तहत अब न्यूनतम मजदूरी ₹300 प्रतिदिन तय की गई है। यह कानून अब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह ले चुका है।
21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिला बड़ा फायदा
जिन 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पहले मनरेगा के तहत मजदूरी ₹300 से कम थी, वहां अब मजदूरी बढ़ाकर सीधे ₹300 प्रतिदिन कर दी गई है। वहीं जिन राज्यों में पहले से ही मजदूरी ₹300 से अधिक थी, वहां केवल मामूली बढ़ोतरी की गई है।
नई अधिसूचना के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों में मजदूरी में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है।
- उत्तर प्रदेश: ₹48 की बढ़ोतरी
- बिहार: ₹45 की बढ़ोतरी
- मध्य प्रदेश: ₹39 की बढ़ोतरी
- राजस्थान: ₹19 की बढ़ोतरी
इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, असम, त्रिपुरा, सिक्किम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी मजदूरी में 15 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की गई है ताकि न्यूनतम ₹300 प्रतिदिन का स्तर सुनिश्चित किया जा सके।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा मजदूरी मिलेगी?
नई सूची के अनुसार हरियाणा, गोवा और केरल अभी भी देश में सबसे अधिक दैनिक मजदूरी देने वाले राज्यों में शामिल हैं।
- हरियाणा – ₹409 प्रतिदिन
- गोवा – ₹406 प्रतिदिन
- केरल – ₹401 प्रतिदिन
हालांकि इन राज्यों में बढ़ोतरी काफी सीमित रही क्योंकि यहां पहले से ही मजदूरी ₹300 से ऊपर थी। हरियाणा में केवल 2.25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
दक्षिण भारत के राज्यों में मामूली बढ़ोतरी
जिन राज्यों में पहले से ही दैनिक मजदूरी ₹300 से अधिक थी, वहां केंद्र सरकार ने केवल सीमित बढ़ोतरी की है। तेलंगाना में मजदूरी ₹307 से बढ़ाकर ₹308 प्रतिदिन की गई, जो महज ₹1 (करीब 0.33%) की वृद्धि है।
इसी तरह आंध्र प्रदेश में लगभग 1.6%, तमिलनाडु में 2.7% और कर्नाटक में 3.2% की वृद्धि की गई है। वहीं दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव में मजदूरी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
कांग्रेस ने उठाए सवाल, ₹400 न्यूनतम मजदूरी की मांग
कांग्रेस महासचिव और पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने केंद्र सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि ₹300 प्रतिदिन की मजदूरी आज की महंगाई के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान 'श्रमिक न्याय' कार्यक्रम के तहत सभी श्रमिकों के लिए ₹400 प्रतिदिन राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी की मांग की थी।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि केंद्र सरकार द्वारा गठित डॉ. अनूप सत्पथी समिति ने वर्ष 2019 में ही ₹375 प्रतिदिन राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी की सिफारिश की थी।
VB-GRAM G और MGNREGA में सबसे बड़ा बदलाव क्या है?
कांग्रेस सांसद और ग्रामीण विकास संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष सप्तगिरि उलाका ने कहा कि VB-GRAM G ने MGNREGA की मांग-आधारित व्यवस्था को बदलकर सरकार-आधारित मॉडल बना दिया है। उनके अनुसार सबसे बड़ा बदलाव फंडिंग पैटर्न में हुआ है।
MGNREGA के तहत श्रम लागत का अधिकांश हिस्सा केंद्र सरकार वहन करती थी, जबकि सामग्री लागत 60:40 के अनुपात में साझा होती थी। लेकिन VB-GRAM G में अब श्रम और सामग्री दोनों के संयुक्त खर्च पर 60:40 का नियम लागू होगा।
उलाका का कहना है कि यदि निर्धारित सीमा से अधिक रोजगार देना पड़ा तो अतिरिक्त वित्तीय बोझ राज्यों पर आएगा, जो कई मामलों में 40% से भी अधिक हो सकता है।
JanDrishti Today Analysis
VB-GRAM G के तहत न्यूनतम मजदूरी ₹300 प्रतिदिन तय होने से कम मजदूरी पाने वाले राज्यों के लाखों ग्रामीण श्रमिकों को तत्काल राहत मिलेगी। हालांकि विपक्ष का कहना है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए यह राशि अभी भी पर्याप्त नहीं है। आने वाले समय में इस नई योजना का असर ग्रामीण रोजगार, राज्य सरकारों के वित्तीय बोझ और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर किस प्रकार पड़ता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

