भारत में रोजगार के मोर्चे पर बड़ी खुशखबरी: 2022 के बाद देश के 'वर्कर पॉपुलेशन रेशियो' में भारी उछाल; ग्रामीण महिलाओं ने संभाली कमान

Praveen Yadav
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JanDrishti Today: भारतीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के मोर्चे पर एक बेहद सकारात्मक और राहत देने वाली खबर सामने आ रही है। प्रसिद्ध अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' (The Hindu) द्वारा जारी ताजा डेटा रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में काम करने वाली आबादी का अनुपात लगातार बेहतर हो रहा है।

🔴 JanDrishti Today: भारतीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के मोर्चे पर एक बेहद सकारात्मक और राहत देने वाली खबर सामने आ रही है। प्रसिद्ध अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' (The Hindu) द्वारा जारी ताजा डेटा रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में काम करने वाली आबादी का अनुपात लगातार बेहतर हो रहा है।


देश का आधिकारिक **वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (Worker Population Ratio - WPR)** साल 2022 के बाद से लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहा है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) के सावधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के आंकड़ों ने इस बात की पुष्टि की है।


ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत का वर्कर पॉपुलेशन रेशियो जो साल 2022 में करीब 39.7% के आसपास दर्ज किया गया था, वह अब बढ़कर 43.5% के स्तर को पार कर गया है। यह आंकड़ा इस बात का सीधा संकेत है कि देश में पहले के मुकाबले अधिक लोगों को उत्पादक रोजगार मिल रहा है।


इस पूरे बदलाव में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली और बेहतरीन बात यह है कि कार्यबल (Workforce) में यह वृद्धि मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों के कारण हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को काम मिलने की दर में तेजी से सुधार देखा गया है।


ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी ने बदला देश के रोजगार का नक्शा

इस पूरे सर्वे में सबसे बड़ा आकर्षण भारतीय महिलाओं, विशेषकर ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी रही है। साल 2022 के बाद से ग्रामीण महिलाओं का लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) बहुत तेजी से बढ़ा है और यह अब 34.6% के करीब पहुंच गया है।


आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं में से लगभग 70.7% महिलाएं स्वरोजगार (Self-Employed) से जुड़ी हुई हैं। वे या तो अपने पारिवारिक कृषि कार्यों में हाथ बंटा रही हैं या छोटे स्थानीय व्यवसायों को संभाल रही हैं।


हालांकि, इसके विपरीत शहरी क्षेत्रों की स्थिति थोड़ी अलग नजर आती है। शहरी महिलाओं में कार्यबल की भागीदारी अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में काफी कम है, जो केवल 22.2% के आसपास ही सिमटी हुई है।


अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ग्रामीण महिलाओं का इस तरह आत्मनिर्भर होना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है। लेकिन इसके साथ ही यह भी ध्यान रखना होगा कि इनमें से अधिकांश महिलाएं कम उत्पादकता और कम आय वाले कामों में लगी हुई हैं।


विशेषज्ञों का विश्लेषण: आंकड़ों के पीछे का दूसरा पहलू भी समझना जरूरी

श्रम अर्थशास्त्रियों (Labour Economists) ने इस सरकारी सर्वे के आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि कृषि क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की संख्या पिछले चार सालों में लगातार बढ़ी है।


इसका एक अर्थ यह भी है कि गैर-कृषि क्षेत्रों (जैसे फैक्ट्रियों या कॉर्पोरेट कंपनियों) में उम्मीद के मुताबिक नए रोजगार नहीं बने हैं। इस वजह से लोगों को वापस ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि से जुड़ना पड़ा है।


विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि पीएलएफएस (PLFS) के सर्वे में **'अवैतनिक पारिवारिक श्रम' (Unpaid Family Labour)** को भी रोजगार माना जाता है। यानी घर की जो महिलाएं बिना किसी सीधे वेतन के अपने खेतों में काम करती हैं, वे भी इस आंकड़े में रोजगारशुदा गिनी गई हैं।


इसलिए, विशेषज्ञों का सुझाव है कि वर्कर पॉपुलेशन रेशियो बढ़ने के साथ-साथ सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों में सम्मानजनक वेतन और बेहतर गुणवत्ता वाली नौकरियों के निर्माण पर अधिक ध्यान देना चाहिए।


शहरी क्षेत्रों में शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी अभी भी एक बड़ी चुनौती

जहां एक तरफ ग्रामीण भारत रोजगार के नए रिकॉर्ड बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ शहरी युवाओं के लिए आंकड़े थोड़े चिंताजनक बने हुए हैं। सर्वे के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी दर (Educated Unemployment Rate) अभी भी ऊंची है।


राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य बेरोजगारी दर जहां 3.1% के बेहद निचले स्तर पर है, वहीं शिक्षित युवाओं में यह दर 6.5% तक देखी गई है। शहरी क्षेत्रों में रहने वाले शिक्षित युवाओं के लिए यह आंकड़ा और भी अधिक यानी 7.2% तक पहुंच जाता है।


सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला आंकड़ा शहरी युवा महिलाओं का है, जहां बेरोजगारी की दर 18.9% तक दर्ज की गई है। इसका मतलब है कि शहरों में काम करने की इच्छुक पढ़ी-लिखी युवतियों को उनकी योग्यता के अनुसार सही नौकरियां मिलने में कठिनाई हो रही है।


इसके बावजूद, शहरी क्षेत्रों में नियमित वेतन (Regular Wage) पाने वाली महिलाओं का अनुपात 50.9% है, जो ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में कहीं बेहतर है। ग्रामीण भारत में नियमित वेतन पर काम करने वाली महिलाएं मात्र 9.3% ही हैं।

  • 📌 WPR में कुल सुधार: भारत का वर्कर पॉपुलेशन रेशियो साल 2022 के 39.7% से बढ़कर अब 43.5% से ऊपर पहुंच चुका है।
  • 📌 ग्रामीण महिलाओं का योगदान: ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की लेबर फोर्स भागीदारी बढ़कर 34.6% के स्तर पर आ गई है।
  • 📌 शिक्षित बेरोजगारी की मार: देश में पढ़े-लिखे युवाओं में बेरोजगारी दर 6.5% है, जो शहरी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा (7.2%) देखी जा रही है।
  • 📌 नियमित वेतन का अंतर: शहरी क्षेत्रों में 50.9% कामकाजी महिलाओं को नियमित वेतन मिलता है, जबकि ग्रामीण भारत में यह आंकड़ा केवल 9.3% है।

इस महत्वपूर्ण रिपोर्ट से जुड़े सभी जरूरी सवाल और जवाब (Detailed FAQs)

Q1: 'द हिंदू' की रिपोर्ट के अनुसार साल 2022 के बाद भारत में किस दर में सुधार हुआ है?
ताजा रिपोर्ट के अनुसार, साल 2022 के बाद से भारत के वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (Worker Population Ratio - WPR) यानी कुल आबादी के मुकाबले रोजगार पाने वाले लोगों के अनुपात में लगातार सुधार और बढ़ोतरी देखी गई है।

Q2: भारत का वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR) 2022 से अब तक कितना बढ़ चुका है?
भारत का कुल वर्कर पॉपुलेशन रेशियो जो साल 2022 में लगभग 39.7% था, वह सरकार के ताजा पीएलएफएस (PLFS) आंकड़ों के अनुसार बढ़कर 43.5% के स्तर को पार कर चुका है।

Q3: भारत में रोजगार के आंकड़े जारी करने वाली इस रिपोर्ट या सर्वे का आधिकारिक नाम क्या है?
इस सर्वे का आधिकारिक नाम सावधिक श्रम बल सर्वेक्षण (Periodic Labour Force Survey - PLFS) है, जिसे राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) और सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया जाता है।

Q4: इस रिपोर्ट के अनुसार कार्यबल (Workforce) में बढ़ोतरी का सबसे मुख्य कारण क्या है?
रोजगार के आंकड़ों में इस बड़े उछाल का सबसे मुख्य कारण ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी (Rural Female Labour Force Participation) में आई भारी तेजी है, जो अब बढ़कर 34.6% हो गई है।

Q5: ग्रामीण क्षेत्रों में कामकाजी महिलाएं मुख्य रूप से किस प्रकार के रोजगार से जुड़ी हुई हैं?
ग्रामीण क्षेत्रों की लगभग 70.7% कामकाजी महिलाएं स्वरोजगार (Self-Employed) से जुड़ी हुई हैं, जिनमें से अधिकांश महिलाएं अपने घरेलू कृषि कार्यों या छोटे कुटीर उद्योगों में सक्रिय योगदान दे रही हैं।

Q6: ग्रामीण भारत के मुकाबले शहरी महिलाओं की रोजगार में भागीदारी कितनी है?
शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की रोजगार भागीदारी ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में काफी कम है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, शहरी महिलाओं की भागीदारी दर केवल 22.2% के आसपास है

Q7: देश में वर्तमान राष्ट्रीय बेरोजगारी दर (National Unemployment Rate) कितनी दर्ज की गई है?
ताजा पीएलएफएस सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वर्तमान सामान्य राष्ट्रीय बेरोजगारी दर मात्र 3.1% है, जो पिछले कुछ वर्षों के मुकाबले एक बेहतर और स्थिर आंकड़ा माना जा रहा है।

Q8: देश के शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी दर (Educated Unemployment) का क्या स्तर है?
सामान्य बेरोजगारी कम होने के बावजूद देश के पढ़े-लिखे शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी दर काफी ऊंची है, जो वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर पर 6.5% दर्ज की गई है।

Q9: शहरों और गांवों में रहने वाले शिक्षित युवाओं में से कहाँ बेरोजगारी अधिक है?
शिक्षित बेरोजगारी की मार गांवों के मुकाबले शहरों में अधिक है। आंकड़ों के अनुसार, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षित बेरोजगारी 6% है, वहीं शहरी क्षेत्रों में यह बढ़कर 7.2% तक पहुंच जाती है

Q10: शहरी युवा महिलाओं में उच्च बेरोजगारी दर (Unemployment Rate) क्या दर्शाती है?
शहरी युवा महिलाओं में बेरोजगारी की दर 18.9% जैसी बेहद ऊंची सीमा पर है। यह दर्शाती है कि शहरों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद युवतियों को उनकी योग्यता और कौशल के अनुसार पर्याप्त नौकरियों के अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।

Q11: ग्रामीण और शहरी कामकाजी महिलाओं को मिलने वाले नियमित वेतन (Regular Wage) में क्या अंतर है?
शहरी कामकाजी महिलाओं को मिलने वाले नियमित वेतन की स्थिति काफी बेहतर है, जहां 50.9% महिलाओं को फिक्स सैलरी मिलती है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 9.3% महिलाएं ही नियमित वेतन वाली नौकरियों में हैं

Q12: श्रम अर्थशास्त्रियों के अनुसार पीएलएफएस (PLFS) सर्वे में रोजगार मापने की क्या सीमा है?
विशेषज्ञों के अनुसार, पीएलएफएस सर्वे में 'अवैतनिक पारिवारिक श्रम' (Unpaid Family Labour) यानी घर के खेतों में बिना सीधे वेतन के काम करने वाली महिलाओं को भी रोजगार की श्रेणी में गिना जाता है, जो इस बढ़े हुए आंकड़े की एक मुख्य वजह है।

Q12: पिछले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र (Agriculture Sector) में काम करने वालों के अनुपात में क्या बदलाव आया है?
आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले लगातार चार वर्षों से कृषि क्षेत्र में काम करने वाले लोगों का हिस्सा (Share) बढ़ा है, जो यह दर्शाता है कि गैर-कृषि क्षेत्रों में पर्याप्त रोजगार नहीं बन रहे हैं।

Q14: ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-रोजगार (Self-Employment) का स्तर इतना ऊंचा क्यों है?
ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित वेतन वाली सरकारी या निजी नौकरियों का गंभीर अभाव है, जिसके कारण अधिकांश आबादी (विशेषकर महिलाओं) को मजबूरी या पारिवारिक खेती और छोटे कुटीर उद्योगों के तहत स्व-रोजगार का सहारा लेना पड़ता है।



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