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| भारत सरकार 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना' (PMGKAY) के माध्यम से दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम चला रही है। |
नई दिल्ली | 27 मई 2026 | JanDrishti Today
देश के गरीब और जरूरतमंद परिवारों के हित में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। केंद्र सरकार ने देश के लगभग 80 करोड़ लाभार्थियों को मिलने वाले मुफ्त राशन की व्यवस्था को आधुनिक और पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए 'सार्थक पीडीएस' (SARTHAK PDS) योजना के विस्तार और इसके तहत तीन बड़े बुनियादी सुधारों को मंजूरी दे दी है।
इस महत्वाकांक्षी योजना को सुचारू रूप से संचालित करने और राज्यों को आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार करने में मदद देने के लिए सरकार ने ₹25,530 करोड़ के भारी-भरकम केंद्रीय वित्तीय आवंटन को भी मंजूरी दी है। इस कदम का सीधा उद्देश्य राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत 'वन नेशन-वन राशन कार्ड' (ONORC) जैसी कल्याणकारी व्यवस्थाओं को अधिक मजबूत, लीक-प्रूफ और डिजिटल रूप से सशक्त बनाना है।
योजना की पृष्ठभूमि और उद्देश्य (Background & Objective)
भारत सरकार 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना' (PMGKAY) के माध्यम से दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम चला रही है। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर अनाज के वितरण के दौरान अक्सर राज्यों के भीतर परिवहन में देरी, अनाज के रखरखाव में होने वाला नुकसान और राशन डीलरों द्वारा की जाने वाली हेराफेरी जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई नई 'सार्थक पीडीएस' योजना इन्हीं कमियों को दूर करने और पूरी व्यवस्था को पूरी तरह हाईटेक बनाने की दिशा में एक बड़ा संकल्प है।
जानिए क्या हैं वे 3 बड़े सुधार जो बदल देंगे राशन वितरण का चेहरा:
1. राज्यों को परिवहन और अनाज रख-रखाव के लिए वित्तीय कवच (Intra-State Movement Support)
'SARTHAK PDS' के तहत केंद्र सरकार अब राज्य की एजेंसियों को राज्य के भीतर ही अनाज के परिवहन, लोडिंग-अनलोडिंग और गोदामों में सुरक्षित रख-रखाव (Handling) के लिए विशेष वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।
आमतौर पर भारतीय खाद्य निगम (FCI) के मुख्य डिपो से स्थानीय स्तर पर उचित मूल्य की दुकानों (FPS) तक अनाज पहुंचाने का खर्च राज्यों को उठाना पड़ता था, जिससे कई राज्यों में वित्तीय बाधाओं के कारण सप्लाई चैन प्रभावित होती थी। केंद्र द्वारा इस खर्च का बड़ा हिस्सा वहन किए जाने से अब राज्यों पर से वित्तीय बोझ हटेगा और राशन की दुकानों तक अनाज बिना किसी देरी के समय पर पहुंचेगा।
2. पूर्ण स्वचालन और डिजिटलीकरण: राशन चोरी पर 'डिजिटल' सर्जिकल स्ट्राइक (Automation & Digitalization)
इस योजना का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है तकनीक का उपयोग। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पूरी तरह से ऑटोमेटेड (स्वचालित) किया जा रहा है। सरकार इसके तहत सभी उचित मूल्य की दुकानों पर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल (ePoS) उपकरणों को अपग्रेड करेगी और उन्हें सीधे केंद्रीय डेटाबेस से जोड़ेगी।
इससे अनाज के तौल और वितरण की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग (सटीक निगरानी) हो सकेगी। इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीनों को ePoS से लिंक किए जाने के बाद राशन डीलर तौल में हेराफेरी नहीं कर पाएंगे। परिणामस्वरूप, राशन माफियाओं द्वारा की जाने वाली अनाज की चोरी और खुले बाजार में अवैध बिक्री (कालाबाजारी) पर हमेशा के लिए लगाम लग जाएगी।
3. 'वन नेशन-वन राशन कार्ड' (ONORC) की व्यवस्था होगी अचूक
तीसरे बड़े सुधार के तौर पर सरकार देशव्यापी पोर्टेबिलिटी को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है। 'सार्थक पीडीएस' के तहत नेशनल डेटाबेस को और अधिक सीमलेस (बाधारहित) बनाया जा रहा है।
इसका सबसे बड़ा फायदा देश के करोड़ों प्रवासी मजदूरों, दिहाड़ी कामगारों और उनके परिवारों को होगा। अब यदि कोई व्यक्ति रोजगार की तलाश में उत्तर प्रदेश या बिहार से दिल्ली, मुंबई या किसी अन्य राज्य में जाता है, तो उसे नए सिरे से राशन कार्ड बनवाने या पहचान साबित करने की जरूरत नहीं होगी। नई तकनीकी सुधारों की वजह से वह देश के किसी भी कोने में स्थित राशन की दुकान पर जाकर अपने हिस्से का अनाज पूरी प्रामाणिकता के साथ ले सकेगा।
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा इसका असर?
कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए इस ₹25,530 करोड़ के भारी बजट से न केवल अनाज वितरण प्रणाली मजबूत होगी, बल्कि इससे सरकारी खजाने के दुरुपयोग पर भी रोक लगेगी। तकनीकी पारदर्शिता आने से फर्जी और दोहरे राशन कार्डों को सिस्टम से पूरी तरह बाहर कर दिया जाएगा, जिससे केवल वास्तविक हकदारों को ही योजना का लाभ मिल सके।
सरकार का यह कदम अंत्योदय (अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का उदय) के संकल्प को सिद्ध करता है, जहां बिना किसी भ्रष्टाचार और बिचौलियों के, शत-प्रतिशत सरकारी लाभ सीधे जनता की थाली तक पहुंचेगा।

