मुंबई: बांद्रा के गरीब नगर में रेलवे का अब तक का सबसे बड़ा अतिक्रमण विरोधी अभियान; दूसरे दिन भड़की भयंकर हिंसा, लाठीचार्ज और पथराव में कई घायल

Praveen Yadav
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मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद, पश्चिमी रेलवे (Western Railway) ने मुंबई के बांद्रा रेलवे स्टेशन के पूर्वी हिस्से में स्थित 'गरीब नगर' झुग्गी बस्ती में अपने इतिहास का सबसे बड़ा और व्यापक अतिक्रमण विरोधी अभियान शुरू किया है।

मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद, पश्चिमी रेलवे (Western Railway) ने मुंबई के बांद्रा रेलवे स्टेशन के पूर्वी हिस्से में स्थित 'गरीब नगर' झुग्गी बस्ती में अपने इतिहास का सबसे बड़ा और व्यापक अतिक्रमण विरोधी अभियान शुरू किया है। मंगलवार को शुरू हुआ यह विध्वंस अभियान बुधवार को भारी हिंसा, विरोध और तनाव के बीच भी जारी रहा। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य रेलवे की रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण और बहुमूल्य भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराना है।


₹600 करोड़ की 5,200 वर्ग मीटर जमीन को मुक्त कराने का लक्ष्य

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान लगभग 5,200 वर्ग मीटर रेलवे भूमि को खाली कराने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। इस प्राइम लोकेशन की जमीन की अनुमानित बाजार कीमत लगभग 600 करोड़ रुपये है। यह जमीन बांद्रा टर्मिनस और बांद्रा उपनगरीय स्टेशन के पास होने के कारण बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


पश्चिमी रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) विनीत अभिषेक ने बताया कि गरीब नगर में लगभग 500 अवैध झुग्गियों और बहुमंजिला ढांचों को गिराया जाना है। अभियान के पहले दो दिनों के भीतर अधिकारियों ने लगभग 60 प्रतिशत अतिक्रमण को सफलतापूर्वक ध्वस्त कर दिया है। यह पांच दिवसीय अभियान 23 मई तक जारी रहने की उम्मीद है, जिसके बाद रेलवे इस पूरी भूमि को कंटीले तारों और दीवारों से सुरक्षित (Fence) कर देगी ताकि भविष्य में दोबारा कब्जा न हो सके।


सुरक्षा का अभूतपूर्व सुरक्षा घेरा: 1,200 से अधिक जवान तैनात

अतिक्रमण हटाने की संवेदनशीलता और स्थानीय विरोध की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में भारी सुरक्षा बलों की तैनाती की है। इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा रखा गया है:


बल की तैनाती:

- लगभग 400 मुंबई पुलिसकर्मी

- 400 सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवान

- 200 से अधिक रेलवे के तकनीकी अधिकारी व कर्मचारी


बुधवार को तनाव बढ़ने के बाद सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ाकर 1,200 से अधिक कर दी गई।


रास्तों की नाकेबंदी:

कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए गरीब नगर और बांद्रा स्टेशन की तरफ जाने वाले कई प्रमुख रास्तों को पूरी तरह सील कर दिया गया है।


प्रमुख बंद मार्ग:

- बीएमसी स्काईवॉक

- चर्चगेट-एंड पैदल पुल

- विरार-एंड फुट ओवरब्रिज (FOB) के निकास द्वार बंद


स्टेशन रोड को कोर्ट और निर्मल नगर के बीच ब्लॉक किए जाने से पूरे बांद्रा पूर्व में भयंकर ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई।


दूसरे दिन क्यों भड़की हिंसा? पथराव और लाठीचार्ज का पूरा घटनाक्रम

मंगलवार को पहले दिन की कार्रवाई बिना किसी बड़ी अप्रिय घटना के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई थी, जिसमें करीब 15 से 18 प्रतिशत अवैध निर्माण हटाए गए थे। लेकिन बुधवार दोपहर करीब 3:00 बजे स्थिति अचानक नियंत्रण से बाहर हो गई।


जब रेलवे के बुलडोजर और विध्वंस दल बांद्रा ईस्ट स्काईवॉक के पास बने एक अवैध धार्मिक स्थल (Prayer Structure) को गिराने आगे बढ़े, तो स्थानीय निवासी और प्रदर्शनकारी उग्र हो गए। रेलवे का दावा है कि इस धार्मिक स्थल के पास एक निजी टेलीकॉम टॉवर भी अवैध रूप से स्थापित किया गया था।


जैसे ही मलबे पर पीला पंजा चला, भीड़ ने नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते प्रदर्शनकारियों ने विध्वंस दल और सुरक्षा बलों पर पथराव शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, छतों और तंग गलियों से पुलिस पर पत्थर, घरेलू बर्तन, पानी से भरी बाल्टियां और अन्य भारी वस्तुएं फेंकी गईं। भीड़ को तितर-बितर करने और स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस को मजबूरन लाठीचार्ज करना पड़ा।


झड़प का नुकसान और कानूनी कार्रवाई

इस हिंसक झड़प में 7 पुलिसकर्मियों सहित कुल 13 लोग घायल हुए हैं। घायलों का इलाज बांद्रा के भाभा अस्पताल और सांताक्रुज के वीएन देसाई अस्पताल में किया जा रहा है।


पुलिस की कार्रवाई:

- मौके से 10 उपद्रवियों को हिरासत में लिया गया

- निर्मल नगर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज

- दंगा, सरकारी काम में बाधा और हमला करने की धाराएं लगाई गईं


अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (पश्चिम क्षेत्र) अभिनव देशमुख ने चेतावनी दी है कि कानून हाथ में लेने वाले और सरकारी काम में बाधा डालने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


रेलवे परिचालन के लिए क्यों जरूरी था यह अभियान?

रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी के खिलाफ द्वेषवश नहीं, बल्कि रेल यात्रियों की सुरक्षा और भविष्य के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विस्तार के लिए अनिवार्य थी।


सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा:

गरीब नगर की झुग्गियां रेलवे अवसंरचना के खतरनाक रूप से करीब आ चुकी थीं। कई बहुमंजिला अवैध झुग्गियां और पक्के मकान पास के पैदल पुलों की ऊंचाई से भी ऊपर (3-4 मंजिल तक) उठ चुके थे। ये सीधे तौर पर हार्बर लाइन की पटरियों और ओवरहेड इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट (OHE) के खंभों को छू रहे थे, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता था।


बांद्रा टर्मिनस का कायाकल्प:

इस खाली कराई गई जमीन पर रेलवे 'इंटीग्रेटेड बांद्रा रेलवे कॉम्प्लेक्स' बनाने जा रही है। इस परियोजना के तहत:

- नए प्लेटफॉर्म बनेंगे

- मेंटेनेंस सुविधाएं विकसित होंगी

- एलिवेटेड सड़कें बनाई जाएंगी


50 नई ट्रेनों की शुरुआत:

इस जमीन के मिलने से सांताक्रुज-मुंबई सेंट्रल कॉरिडोर पर 5वीं और 6ठी रेलवे लाइन के विस्तार का काम तेज होगा। इससे बांद्रा टर्मिनस से 50 अतिरिक्त मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें चलाई जा सकेंगी।


2017 से कोर्ट में चल रही थी कानूनी जंग

रेलवे के अनुसार, इस जमीन पर लोक परिसर (Public Premises Act) अधिनियम के तहत कानूनी कार्यवाही 2017 से पहले ही शुरू हो गई थी। 27 नवंबर 2017 को पहली बार बेदखली के आदेश जारी किए गए थे।


इसके बाद यह मामला बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लगभग 9 वर्षों तक कानूनी मुकदमों में उलझा रहा। आखिरकार, बॉम्बे हाई कोर्ट ने 29 अप्रैल 2026 को रेलवे को अतिक्रमण हटाने की अनुमति दे दी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा।


मानवीय पहलू और विस्थापन का दर्द

एक तरफ जहां यह अभियान मुंबई के विकास के लिए जरूरी बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ मैदान पर बेहद भावुक और दर्दनाक दृश्य भी देखने को मिल रहे हैं। चिलचिलाती गर्मी और तेज धूप के बीच कई परिवार अपने सामान के साथ सड़क किनारे बैठने को मजबूर हैं।


कुछ लोगों का आरोप है कि उन्हें घर खाली करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। साथ ही, ईद से ठीक पहले कार्रवाई होने के कारण स्थानीय निवासियों में नाराजगी भी देखी जा रही है।


पुनर्वास की नीति

अगस्त 2021 में रेलवे और बीएमसी द्वारा किए गए संयुक्त सर्वे में लगभग 100 परिवारों को पुनर्वास के लिए पात्र पाया गया है। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि इन पात्र परिवारों को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाएगा। बाकी लगभग 400 ढांचे पूरी तरह अवैध पाए गए हैं, जिन्हें हटाया जा रहा है।


मामले पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

इस कार्रवाई को लेकर मुंबई की राजनीति भी गरमा गई है। बांद्रा पूर्व से शिवसेना (UBT) के विधायक वरुण सरदेसाई ने भाजपा नेताओं पर इस इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया।


दरअसल, भाजपा नेता किरीट सोमैया ने इस अभियान को 'लैंड जिहाद' के खिलाफ कार्रवाई बताया था, जिसपर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। विपक्ष का कहना है कि यह केवल अदालती आदेशों और रेलवे विकास से जुड़ी प्रशासनिक कार्रवाई है, इसे सांप्रदायिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।


फिलहाल, भारी तनाव के बीच भी रेलवे और पुलिस प्रशासन पीछे हटने को तैयार नहीं है। संवेदनशील माहौल को देखते हुए पूरे बांद्रा ईस्ट इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और लगातार पुलिस गश्त जारी है ताकि बाकी बचे अतिक्रमण को भी तय समय सीमा के भीतर हटाया जा सके।

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