'कॉकरोच जनता पार्टी' पेज पर ट्विटर (X) ने भारत में लगाई रोक, जानिए क्या है पूरा विवाद

Praveen Yadav
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सोशल मीडिया और अभिव्यक्ति की आजादी के बीच एक बार फिर बड़ा टकराव देखने को मिल रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर तेजी से वायरल हुए पैरोडी अकाउंट ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (@CockroachJanta) को भारत में ब्लॉक कर दिया गया है। एक्स ने इस अकाउंट पर “कानूनी मांग” (Legal Demand) के तहत रोक लगाने की पुष्टि की है।

नई दिल्ली: सोशल मीडिया और अभिव्यक्ति की आजादी के बीच एक बार फिर बड़ा टकराव देखने को मिल रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर तेजी से वायरल हुए पैरोडी अकाउंट ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (@CockroachJanta) को भारत में ब्लॉक कर दिया गया है। एक्स ने इस अकाउंट पर “कानूनी मांग” (Legal Demand) के तहत रोक लगाने की पुष्टि की है।


इस कार्रवाई के बाद इंटरनेट पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सेंसरशिप, न्यायपालिका की आलोचना और सोशल मीडिया कंट्रोल जैसे मुद्दों पर नई बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे लोकतंत्र में व्यंग्य और विरोध की आवाज दबाने की कोशिश बता रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ कानूनी विशेषज्ञ इसे अदालत की गरिमा बनाए रखने के लिए जरूरी कदम मान रहे हैं।


कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

इस विवाद की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट में चल रही एक सुनवाई के दौरान हुई। जानकारी के अनुसार, देश में कुछ संवेदनशील मुद्दों और न्यायपालिका के फैसलों को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार आलोचना की जा रही थी। इसी दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग “कॉकरोच की तरह” व्यवहार करते हैं, जो अंधेरे से निकलकर शोर मचाते हैं और फिर गायब हो जाते हैं।


सीजेआई की इस टिप्पणी का वीडियो क्लिप और टेक्स्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसके बाद हजारों यूजर्स ने इस बयान पर मीम्स, पोस्ट और प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं।


रातों-रात वायरल हुआ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’

सीजेआई की टिप्पणी के कुछ ही घंटों बाद एक्स पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से एक पैरोडी अकाउंट बनाया गया। इस पेज ने खुद को “अंधेरे से आवाज उठाने वाले नागरिकों का मंच” बताया और राजनीतिक व सामाजिक मुद्दों पर व्यंग्यात्मक पोस्ट शेयर करना शुरू कर दिया।


धीरे-धीरे यह अकाउंट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। लाखों यूजर्स ने इस हैंडल को फॉलो करना शुरू कर दिया। कई पत्रकारों, एक्टिविस्ट्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने भी इस अकाउंट की पोस्ट्स शेयर कीं।


पेज पर न्यायपालिका, महंगाई, बेरोजगारी, राजनीतिक फैसलों और सरकारी नीतियों को लेकर लगातार मीम्स और व्यंग्यात्मक कंटेंट पोस्ट किया जा रहा था। कुछ ही दिनों में यह अकाउंट सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा।


भारत में क्यों ब्लॉक हुआ अकाउंट?

बुधवार रात से भारत में इस अकाउंट को खोलने पर यूजर्स को संदेश दिखाई देने लगा कि:

“@CockroachJanta’s account has been withheld in India in response to a legal demand.”

यानी कानूनी मांग के जवाब में इस अकाउंट को भारत में ब्लॉक किया गया है।


एक्स (X) की नीति के अनुसार, यदि किसी देश की सरकार, अदालत या कानून प्रवर्तन एजेंसी किसी कंटेंट को स्थानीय कानूनों का उल्लंघन मानती है और आधिकारिक नोटिस जारी करती है, तो प्लेटफॉर्म उस कंटेंट या अकाउंट को उस देश की सीमा के भीतर ब्लॉक कर सकता है।


हालांकि यह अकाउंट अभी भी भारत के बाहर कई देशों में दिखाई दे रहा है। यानी इसे पूरी दुनिया से नहीं हटाया गया बल्कि केवल भारत में “जियो-ब्लॉक” किया गया है।


सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस

इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया है। एक वर्ग इसे लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष कह रहा है कि किसी संवैधानिक संस्था और न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखना जरूरी है।


समर्थकों का क्या कहना है?

डिजिटल राइट्स एक्टिविस्ट्स और पेज के समर्थकों का कहना है कि व्यंग्य और पैरोडी लोकतंत्र का अहम हिस्सा हैं। उनका तर्क है कि किसी बयान पर शांतिपूर्ण तरीके से प्रतिक्रिया देना नागरिकों का अधिकार है।


कई यूजर्स ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर व्यंग्यात्मक पोस्ट्स के कारण अकाउंट ब्लॉक किए जाने लगे तो इंटरनेट पर स्वतंत्र अभिव्यक्ति खतरे में पड़ सकती है।


कानूनी विशेषज्ञों की राय

दूसरी तरफ कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी अभियान के जरिए न्यायपालिका की छवि खराब करने या अदालत की अवमानना जैसी स्थिति पैदा होती है, तो संबंधित एजेंसियां कार्रवाई कर सकती हैं।


कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किसी पोस्ट में संस्थाओं के प्रति अपमानजनक भाषा, गलत जानकारी या संगठित ट्रोलिंग शामिल हो, तो आईटी एक्ट और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई संभव है।


क्या यह सेंसरशिप है?

इस सवाल पर देशभर में बहस छिड़ गई है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स इसे “डिजिटल सेंसरशिप” बता रहे हैं। उनका कहना है कि लोकतंत्र में सरकार, न्यायपालिका और अन्य संस्थाओं की आलोचना करना नागरिकों का अधिकार है।


वहीं कुछ लोगों का मानना है कि सोशल मीडिया की आजादी का मतलब यह नहीं कि किसी संस्था की गरिमा को नुकसान पहुंचाया जाए।


विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को आईटी नियमों का पालन करना होता है और कानूनी आदेश मिलने पर उन्हें कार्रवाई करनी पड़ती है।


नए अकाउंट्स भी आने लगे सामने

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ अकाउंट पर रोक लगने के बाद सोशल मीडिया पर इसी तरह के कई नए पैरोडी अकाउंट्स बनना शुरू हो गए हैं। कुछ यूजर्स नए हैशटैग चलाकर इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं।


हालांकि अभी तक मूल अकाउंट चलाने वालों की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।


पहले भी हो चुकी हैं ऐसी कार्रवाइयां

यह पहला मौका नहीं है जब भारत में किसी सोशल मीडिया अकाउंट या पोस्ट पर कानूनी कार्रवाई हुई हो। इससे पहले भी कई बार सरकार, अदालतों या एजेंसियों की शिकायत पर अकाउंट्स ब्लॉक किए जा चुके हैं।


सोशल मीडिया कंपनियां आमतौर पर स्थानीय कानूनों का पालन करने के लिए संबंधित कंटेंट को हटाती या सीमित करती हैं।


फ्री स्पीच बनाम जिम्मेदारी

यह मामला एक बार फिर उस पुराने सवाल को सामने लेकर आया है कि सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी की सीमा क्या होनी चाहिए।


क्या इंटरनेट पर हर तरह का व्यंग्य और आलोचना स्वीकार्य है? या फिर संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ कंटेंट पर सीमाएं तय होनी चाहिए? यही सवाल अब सोशल मीडिया, कानूनी जगत और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन चुका है।


निष्कर्ष

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ अकाउंट पर भारत में लगी रोक ने सोशल मीडिया और कानून के बीच टकराव को फिर चर्चा में ला दिया है। एक तरफ लोग इसे फ्री स्पीच का मुद्दा बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ इसे संस्थाओं की गरिमा से जोड़कर देखा जा रहा है।


फिलहाल एक्स की ओर से अकाउंट को भारत में ब्लॉक कर दिया गया है, लेकिन इस विवाद ने इंटरनेट पर अभिव्यक्ति की आजादी, डिजिटल सेंसरशिप और सोशल मीडिया की सीमाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह मामला और ज्यादा राजनीतिक और कानूनी चर्चा का केंद्र बन सकता है।

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