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कोरोना महामारी (Covid-19) को बीते भले ही लंबा समय हो गया हो, लेकिन उसके साइड इफेक्ट्स (दुष्प्रभाव) आज भी कई लोगों का पीछा नहीं छोड़ रहे हैं। हाल ही में डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक बेहद चौंकाने वाली और चिंताजनक चेतावनी जारी की है।
डॉक्टरों के मुताबिक, कोरोना महामारी के दौरान मरीजों की जान बचाने के लिए जिन स्टेरॉयड (Steroid) दवाओं का अंधाधुंध इस्तेमाल किया गया था, उनकी वजह से अब लोगों के कूल्हे की हड्डी गलने (Hip Bone Damage) के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं।
इस गंभीर बीमारी को मेडिकल भाषा में 'एवैस्कुलर नेक्रोसिस' (Avascular Necrosis - AVN) कहा जाता है। देश के बड़े अस्पतालों में पिछले कुछ समय में इसके मरीजों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी देखी गई है। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि यह बीमारी क्या है, इसके लक्षण क्या हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है।
क्या है एवैस्कुलर नेक्रोसिस (AVN) और यह क्यों होता है?
सरल शब्दों में कहें तो एवैस्कुलर नेक्रोसिस का मतलब है हड्डियों का मरना या गलना। जब हमारे शरीर के किसी हिस्से की हड्डी तक खून की सप्लाई (Blood Supply) ठीक से नहीं पहुंच पाती, तो वहां की कोशिकाएं मरने लगती हैं और धीरे-धीरे वह हड्डी कमजोर होकर टूटने या गलने लगती है।
कोविड के समय गंभीर मरीजों के फेफड़ों को बचाने के लिए लाइफ-सेविंग ड्रग्स के रूप में स्टेरॉयड दिए गए थे। लेकिन इन स्टेरॉयड दवाओं के ज्यादा इस्तेमाल से खून की नलियों में थक्के (Clots) बनने लगे या वे सिकुड़ गईं, जिससे कूल्हे के जोड़ों की हड्डियों तक खून पहुंचना बंद हो गया। स्वास्थ्य और दवाओं के सुरक्षित उपयोग से जुड़ी अधिक गाइडलाइंस के लिए आप WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रिपोर्ट देख सकते हैं।
बीमारी के मुख्य लक्षण: इन्हें भूलकर भी न करें नजरअंदाज
कूल्हे की हड्डी गलने की शुरुआत बहुत धीरे-धीरे होती है, इसलिए शुरुआत में लोग इसे सामान्य दर्द समझकर टाल देते हैं। लेकिन समय रहते इन लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी है:
- कूल्हे और जांघ में लगातार दर्द: उठते-बैठते या चलते समय कूल्हे के जोड़ या जांघ के हिस्से में तेज दर्द होना।
- नितंबों (Buttocks) में दर्द का फैलना: यह दर्द धीरे-धीरे कमर के निचले हिस्से और नितंबों तक फैलने लगता है।
- चलने-फिरने में तकलीफ: बीमारी बढ़ने पर मरीज को पैर जमीन पर रखने में दिक्कत होती है और वह लंगड़ाकर चलने लगता है।
- जोड़ों का जाम होना: पालथी मारकर बैठने या झुकने में भयंकर दर्द होना और कूल्हे के जोड़ का पूरी तरह से लॉक (जाम) महसूस होना।
एक नजर में: सामान्य कमर दर्द और AVN में अंतर
नीचे दी गई तालिका से आप समझ सकते हैं कि साधारण दर्द और हड्डी गलने के दर्द में क्या अंतर होता है:
| लक्षण (Symptoms) | सामान्य मांसपेशियों का दर्द | हड्डी गलने का दर्द (AVN) |
|---|---|---|
| दर्द की जगह | कमर या पीठ के ऊपरी हिस्से में | कूल्हे के जोड़, जांघ या ग्रोइन एरिया में |
| आराम करने पर | आराम करने या बाम लगाने से ठीक हो जाता है | लेटने या आराम करने पर भी दर्द बंद नहीं होता |
| चलने की स्थिति | इंसान सीधा चल पाता है | मरीज दर्द के मारे लंगड़ाने लगता है |
| जांच का तरीका | एक्स-रे या सामान्य आराम | शुरुआती स्टेज के लिए **MRI स्कैन** जरूरी है |
बचाव और डॉक्टरों की सलाह
एम्स (AIIMS) और देश के अन्य बड़े हड्डी रोग विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को कोरोना के दौरान भारी मात्रा में स्टेरॉयड दिया गया था और उसे पिछले कुछ महीनों से कूल्हे में दर्द है, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। शुरुआत में दवाओं और थेरेपी से इसे ठीक किया जा सकता है, लेकिन देरी होने पर हिप रिप्लेसमेंट (कूल्हा बदलना) ही एकमात्र रास्ता बचता है। भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी विभिन्न स्वास्थ्य चेतावनियों को देखने के लिए आप MoHFW (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय) की वेबसाइट पर जा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. कोविड स्टेरॉयड के कारण होने वाली इस बीमारी को क्या कहते हैं?
स्टेरॉयड दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण कूल्हे की हड्डी गलने की इस समस्या को चिकित्सा विज्ञान में एवैस्कुलर नेक्रोसिस (Avascular Necrosis - AVN) कहा जाता है।
2. हड्डी गलने की बीमारी का पता लगाने के लिए कौन सा टेस्ट होता है?
शुरुआती स्टेज में इस बीमारी का पता सामान्य एक्स-रे (X-Ray) से नहीं चल पाता है। इसके सटीक और सही निदान के लिए डॉक्टरों द्वारा प्रभावित हिस्से का **MRI स्कैन** कराने की सलाह दी जाती है।
3. क्या AVN का इलाज बिना ऑपरेशन के संभव है?
जी हां, अगर इस बीमारी का पता पहली या दूसरी स्टेज (शुरुआती दिनों) में चल जाए, तो दवाओं, फिजियोथेरेपी और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने वाले इलाज से इसे बिना सर्जरी के ठीक किया जा सकता है। चौथी स्टेज में पहुंचने पर ही ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
कोविड-19 के दौरान मरीजों की जान बचाने के लिए स्टेरॉयड का इस्तेमाल मजबूरी थी, लेकिन अब इसके दूरगामी दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। इस खबर का मकसद आपको डराना नहीं बल्कि जागरूक करना है। यदि आपके परिवार में किसी को कोरोना हुआ था और उन्हें अक्सर जोड़ों या कूल्हों में दर्द की शिकायत रहती है, तो इसे दर्द निवारक गोलियां (Painkillers) खाकर दबाएं नहीं, बल्कि तुरंत किसी अच्छे ऑर्थोपेडिक (हड्डी रोग विशेषज्ञ) डॉक्टर को दिखाएं।

