🔴 JanDrishti Today: देश के आम नागरिकों और नौकरीपेशा वर्ग की जेब पर एक बार फिर महंगाई की तगड़ी मार पड़ी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी के बाद देश की सरकारी तेल कंपनियों ने घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी है।
मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी भारी सैन्य तनाव और अमेरिका-इरान संकट के बीच, आज शनिवार (23 मई 2026) को सुबह से ही पेट्रोल और डीजल की नई दरें लागू हो गई हैं, जिसने आम आदमी के बजट को पूरी तरह से बिगाड़ कर रख दिया है।
यह पिछले 10 दिनों के भीतर ईंधन की घरेलू दरों में की गई तीसरी बड़ी बढ़ोतरी है, जो यह साफ दर्शाती है कि आने वाले दिनों में महंगाई की रफ्तार और तेज होने वाली है। इससे पहले ठीक 10 दिन पहले यानी 15 मई को तेल कंपनियों ने कीमतों में बदलाव करते हुए पूरे 3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी वृद्धि की थी।
उस झटके से अभी आम जनता उबर भी नहीं पाई थी कि तेल विपणन कंपनियों ने आम उपभोक्ताओं को एक और तगड़ा करंट दे दिया है। इस लगातार हो रही बढ़ोतरी से अब देश भर में ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ने का खतरा भी पैदा हो गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चल रही उथल-पुथल का असर अब सीधे तौर पर भारत के खुदरा बाजारों में देखने को मिल रहा है। सरकारी तेल कंपनियों के इस फैसले के बाद देश के विभिन्न राज्यों में स्थानीय करों और वैट (VAT) की दरों के आधार पर पेट्रोल-डीजल के दाम अलग-अलग स्तर पर पहुंच गए हैं।
उत्तर प्रदेश, दिल्ली और बिहार जैसे राज्यों में सुबह से ही पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी गईं और लोग इस अचानक बढ़ी कीमतों से काफी परेशान नजर आए।
दिल्ली सहित देश के प्रमुख महानगरों में बढ़े दाम, जेब पर बढ़ा अतिरिक्त बोझ
ताजा संशोधन के बाद देश की राजधानी नई दिल्ली सहित तमाम राज्यों और प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम अपने ऑल-टाइम रिकॉर्ड स्तर की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं।
सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने इस बार पेट्रोल की खुदरा कीमतों में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने का बड़ा फैसला किया है। यह बढ़ोतरी देखने में भले ही पैसों में लग रही हो, लेकिन जब गाड़ी की टंकी फुल कराई जाती है, तो यह जेब पर एक बड़ा अतिरिक्त बोझ डालती है।
तेल कंपनियों ने साफ किया है कि वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ रहे कच्चे तेल के दामों के कारण घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रख पाना अब उनके नियंत्रण से बाहर हो चुका है।
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले हफ्तों में भी आम जनता को ऐसी ही छोटी-बड़ी बढ़ोतरी के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना होगा। इस मूल्य वृद्धि के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में परिवहन संघों ने भी अपने किराए में बढ़ोतरी करने के संकेत दे दिए हैं।
📊 देश के मुख्य शहरों में पेट्रोल और डीजल के नए रेट्स (23 मई 2026):
📌 नई दिल्ली: पेट्रोल ₹99.51 प्रति लीटर | डीजल ₹92.49 प्रति लीटर
📌 लखनऊ (उत्तर प्रदेश): पेट्रोल ₹98.45 प्रति लीटर | डीजल ₹92.05 प्रति लीटर
कच्चे तेल की कीमतों में भयंकर उछाल और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का गहराता संकट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें लगातार 111 डॉलर से लेकर 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जिसने भारतीय आयात बिल पर भारी और अभूतपूर्व दबाव डाल दिया है।
पश्चिम एशिया में जारी ईरान संघर्ष और अमेरिकी-इजरायली हमलों के बाद 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) से होने वाली वैश्विक तेल सप्लाई बाधित होने की आशंका ने दुनिया भर के ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है। चूंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है, इसलिए वहां जरा सी भी हलचल वैश्विक बाजार में तेल की किल्लत पैदा कर देती है।
भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से कच्चे तेल के रूप में आयात करता है, जिससे वैश्विक बाजार में होने वाले किसी भी छोटे-बड़े बदलाव का सीधा और त्वरित असर यहां के घरेलू बाजारों पर पड़ता है।
तेल समीक्षकों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसी स्थितियां शांत नहीं होतीं, तब तक कच्चे तेल के दामों में नरमी आने की कोई गुंजाइश नहीं दिखती। इसका मतलब यह है कि भारतीय उपभोक्ताओं को अभी कुछ और समय तक इस महंगाई का सामना करना पड़ेगा।
📊 घरेलू ईंधन कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी की मुख्य वजहें:
🔴 कंपनियों का भारी घाटा: तेल कंपनियों ने हाल ही में केंद्र सरकार को सूचित किया था कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के कारण उन्हें हर महीने करीब 1,000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था, जिसकी भरपाई जरूरी थी।
🔴 वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची दरें: अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतें लंबे समय के बाद 110 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर चुकी हैं, जिससे तेल का आयात बेहद महंगा हो गया है
🔴 रशियन डिस्काउंट का कम होना: पिछले दो वर्षों से भारत को रूस से मिल रहे बेहद सस्ते और रियायती कच्चे तेल का फायदा भी अब धीरे-धीरे खत्म हो गया है, जिससे घरेलू स्तर पर रेट्स बढ़ाना कंपनियों की मजबूरी बन गया है।
आम उपभोक्ता और देश की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा इसका असर?
लगभग दो साल से अधिक समय तक घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पूरी तरह से स्थिर बनी हुई थीं। लेकिन मई 2026 के इस महीने में लगातार तीन बार हुई इस बैक-टू-बैक बढ़ोतरी से अब देश के आर्थिक गलियारों में भी चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।
डीजल की कीमतों में इजाफा होने का सीधा मतलब होता है कि माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स की लागत में भारी बढ़ोतरी होना। इसके चलते आने वाले दिनों में फल, सब्जियां, दूध और अन्य दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं के दाम भी महंगे हो सकते हैं।
मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह स्थिति दोहरी मार जैसी है। एक तरफ जहां भीषण गर्मी के इस मौसम में बिजली और अन्य खर्च बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दफ्तर आने-जाने के लिए ईंधन पर होने वाला मासिक खर्च भी अब 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा।
जानकारों का कहना है कि अगर सरकार ने एक्साइज ड्यूटी या राज्यों ने वैट में थोड़ी कटौती करके जनता को राहत नहीं दी, तो खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) एक बार फिर रिजर्व बैंक के तय दायरे से बाहर निकल सकती है।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आने वाले दिनों में तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता आने का इंतजार करेंगी या फिर कच्चे तेल के ग्राफ को देखते हुए कीमतों में बढ़ोतरी का यह सिलसिला जून के महीने में भी ऐसे ही जारी रहेगा। फिलहाल के लिए, आम जनता को अपनी जेब और मासिक बजट को नए सिरे से री-मैनेज करना होगा।

