पोर्टल का नाम: JanDrishti Today
श्रेणी: ऊर्जा विश्लेषण / राष्ट्रीय रिपोर्ट | दिनांक: 25 मई 2026
भारत इस समय भीषण लू (Heatwave) की चपेट में है। तापमान के 45-48 डिग्री तक पहुँचने के साथ ही घरों में एसी (AC), कूलर्स और पंखों का इस्तेमाल चरम पर है, जिसके चलते देश की बिजली की माँग (Peak Power Demand) ने 250 गीगावाट (GW) के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया है। इस मांग को पूरा करने के लिए भारत का थर्मल पावर सेक्टर, जो कुल उत्पादन का लगभग 70% है, युद्धस्तर पर काम कर रहा है।
कोयला प्रबंधन: मांग बनाम आपूर्ति का गणित
बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत के पास इतनी बिजली बनाने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं? रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश भर के थर्मल पावर प्लांट्स में फिलहाल 19 दिनों का कोयला स्टॉक मौजूद है। लेकिन कोयले के इस 'सप्लाई चेन' को समझना जरूरी है:
- घरेलू उत्पादन: कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) और अन्य सहायक कंपनियां प्रति वर्ष लगभग 950-1000 मिलियन टन (MT) कोयले का उत्पादन कर रही हैं, जो देश की कुल खपत का लगभग 80% है।
- आयात (Import): विशेष रूप से उच्च कैलोरी (High-grade) कोयले के लिए भारत को इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। वार्षिक आधार पर लगभग 200-250 मिलियन टन कोयला आयात किया जाता है।
- लॉजिस्टिक्स: खदानों से पावर प्लांट तक कोयला पहुँचाने के लिए रेलवे रैक (Railway Rakes) की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती होती है।
बिजली की मांग पूरी करने का रोडमैप
भीषण गर्मी में बिजली कटौती से बचने के लिए सरकार तीन मोर्चों पर काम कर रही है:
- नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy): दिन के समय सोलर पावर की भारी हिस्सेदारी ग्रिड को दबाव से बचा रही है। 2026-27 तक 500 GW का गैर-जीवाश्म ईंधन लक्ष्य पूरा करने की दिशा में तेजी है।
- ग्रिड बैलेंसिंग: जिन राज्यों में बिजली की कमी है, उन्हें सरप्लस वाले राज्यों से 'पावर एक्सचेंज' के जरिए बिजली की आपूर्ति की जा रही है।
- हाइड्रो-पावर बूस्ट: पीक आवर्स (शाम के समय) में डिमांड मैनेज करने के लिए हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स को फुल कैपेसिटी पर चलाया जा रहा है।
ऊर्जा उपलब्धता: एक नजर में
| पैरामीटर | आंकड़े (अनुमानित) |
|---|---|
| कुल कोयला खपत | ~1200 MT वार्षिक |
| घरेलू उत्पादन | ~80% हिस्सा |
| आयातित कोयला | ~20% हिस्सा (High Grade) |
| कोयला स्टॉक लक्ष्य | 20 दिन का स्टॉक अनिवार्य |
निष्कर्ष
भारत की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह से कोयले के कुशल परिवहन और समय पर आयात पर टिकी है। आने वाले समय में, थर्मल पावर के साथ बड़े पैमाने पर बैटरी स्टोरेज (BESS) तकनीक ही वह समाधान है जो भविष्य के ऐसे संकटों से देश को बचाएगी।
महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs)
भारत कोयले का आयात क्यों करता है?
भारतीय कोयले में राख (Ash content) की मात्रा अधिक होती है। विशेष थर्मल पावर प्लांट्स की कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए कम राख वाले उच्च कैलोरी कोयले की जरूरत पड़ती है, जिसके लिए आयात अनिवार्य है।

