Pakistan Requests India To Respect Indus Water Treaty: सिंधु जल संधि पर भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ा विवाद
भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को लेकर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत से इस ऐतिहासिक जल समझौते का सम्मान करने की अपील की है। पाकिस्तान का कहना है कि यदि भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखा या इसमें एकतरफा बदलाव किए, तो इसका असर केवल दक्षिण एशिया ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के जल संसाधन प्रबंधन पर पड़ेगा।
पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसद्दिक मलिक ने एक अंतरराष्ट्रीय जल सम्मेलन में भारत पर साझा जल संसाधनों का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सिंधु नदी प्रणाली करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है और इस पर किसी भी प्रकार का एकतरफा फैसला क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
क्या है सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty)?
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी। इस समझौते पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे।
संधि के अनुसार भारत को रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का अधिकार मिला जबकि पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों के पानी के उपयोग का अधिकार दिया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार यह दुनिया की सबसे सफल जल संधियों में से एक मानी जाती रही है क्योंकि कई युद्धों और राजनीतिक तनाव के बावजूद यह दशकों तक लागू रही।
भारत ने क्यों उठाए सख्त कदम?
भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को अस्थायी रूप से स्थगित करने का फैसला लिया था। भारत का आरोप था कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद लगातार भारतीय सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है।
भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अब अपने हिस्से के जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग करेगा। गृह मंत्री अमित शाह ने पहले कहा था कि भारत पाकिस्तान को जाने वाले पानी को अपने राज्यों के लिए इस्तेमाल करेगा।
पाकिस्तान की बढ़ती चिंता
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और कृषि काफी हद तक सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान की लगभग 80 प्रतिशत कृषि सिंधु बेसिन के पानी पर आधारित है। ऐसे में यदि जल प्रवाह प्रभावित होता है तो वहां खाद्य संकट और आर्थिक समस्याएं बढ़ सकती हैं।
पाकिस्तान ने चेतावनी दी है कि यदि पानी के प्रवाह को रोका गया तो इसे युद्ध जैसी कार्रवाई माना जा सकता है। पाकिस्तान के कई नेताओं और सैन्य अधिकारियों ने पानी को देश की रेड लाइन बताया है।
कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन पर भी विवाद
सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच पहले से कई विवाद चल रहे हैं। पाकिस्तान ने भारत की कुछ जलविद्युत परियोजनाओं पर आपत्ति जताते हुए अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन का रुख किया था।
हालांकि भारत ने इस कोर्ट की वैधता पर सवाल उठाए और हाल ही में इसके फैसले को अवैध और शून्य करार दिया।
वैश्विक स्तर पर बढ़ सकती है चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियर पिघलने और पानी की कमी के बीच सिंधु जल संधि का विवाद वैश्विक चिंता का विषय बन सकता है।
चिंता की बात यह भी है कि भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं। ऐसे में पानी को लेकर बढ़ता तनाव क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
क्या फिर शुरू होगी भारत-पाकिस्तान बातचीत?
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ लगातार दोनों देशों से बातचीत बहाल करने की अपील कर रहे हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि सिंधु जल संधि को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं होगा क्योंकि यह केवल राजनीतिक नहीं बल्कि मानवीय और आर्थिक मुद्दा भी है।
हालांकि फिलहाल दोनों देशों के रुख काफी सख्त दिखाई दे रहे हैं। भारत आतंकवाद के मुद्दे पर कठोर रुख अपनाए हुए है जबकि पाकिस्तान जल संकट का हवाला देकर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में लगा है।
निष्कर्ष
सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ता विवाद आने वाले समय में दक्षिण एशिया की राजनीति और सुरक्षा पर बड़ा असर डाल सकता है। पाकिस्तान लगातार भारत से संधि का सम्मान करने की मांग कर रहा है जबकि भारत राष्ट्रीय सुरक्षा और अपने जल अधिकारों को प्राथमिकता दे रहा है।
अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकाल पाएंगे या यह विवाद और गहराएगा।

