🔴 JanDrishti रिपोर्ट (कानपुर): कानपुर में एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इंडो-तिब्बती बॉर्डर पुलिस (ITBP) के करीब 50 से ज्यादा जवान शनिवार को हथियारों के साथ कानपुर पुलिस कमिश्नरेट पहुँच गए। यह 'शक्ति प्रदर्शन' एक साथी जवान की मां के साथ हुई कथित मेडिकल लापरवाही और उस पर हो रही ढीली कार्रवाई के विरोध में किया गया था।
आईटीबीपी की 32वीं बटालियन में तैनात सिपाही विकास सिंह की मां, निर्मला देवी (56), को 13 मई को सांस लेने में तकलीफ के चलते टाटमिल स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि इलाज के दौरान अस्पताल की लापरवाही से हाथ में ऐसा संक्रमण फैला कि 17 मई को महिला का दाहिना हाथ काटना पड़ा। इस घटना के बाद से ही सिपाही विकास सिंह इंसाफ की मांग को लेकर दर-दर भटक रहा था, लेकिन कथित तौर पर स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती जांच रिपोर्ट में अस्पताल को क्लीन चिट दे दी गई, जिससे जवान और उनके साथी आक्रोशित हो गए।
आखिर क्यों सड़कों पर उतरे जवान?
पीड़ित जवान विकास सिंह का आरोप है कि कृष्णा अस्पताल के डॉक्टरों ने गलत इंजेक्शन और लापरवाही से उनकी मां का हाथ खराब कर दिया। जब उन्होंने इसकी शिकायत की, तो मेडिकल टीम की जांच रिपोर्ट को 'अस्पताल को बचाने वाली' बताया गया।
इसी से नाराज होकर विकास सिंह अपने कमांडेंट और करीब 50 साथियों के साथ पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे। हालांकि, आईटीबीपी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कमिश्नरेट को 'घेरा' नहीं था, बल्कि वे अपने साथी को न्याय दिलाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से बात करने आए थे।
इस घटना के बाद कानपुर पुलिस कमिश्नर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुरानी जांच रिपोर्ट को खारिज कर दिया है और एक नई 'संयुक्त जांच' (Joint Probe) के आदेश दिए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वास्तव में इलाज में कहां चूक हुई।
क्या मेडिकल लापरवाही पर रुकेगी जवाबदेही?
यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि आम जनता के लिए चिकित्सा व्यवस्था की सुरक्षा का भी है। एक फौजी, जो देश की सरहदों की रक्षा करता है, उसे अपनी मां के इलाज के लिए इंसाफ की गुहार लगानी पड़ रही है।
सोशल मीडिया पर भी इस मामले की चर्चा तेज है, जहां लोग अस्पताल की जवाबदेही तय करने और लापरवाह डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। फिलहाल, नई जांच टीम के गठन के बाद अब पीड़ित परिवार को एक निष्पक्ष रिपोर्ट की उम्मीद है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: यह मामला क्या है और क्यों चर्चा में है?
Q2: क्या आईटीबीपी जवानों ने पुलिस ऑफिस को घेर लिया था?
Q3: इस मामले में पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
Q4: क्या अस्पताल पर कोई कार्रवाई हुई है?
Q5: पीड़ित महिला की वर्तमान स्थिति क्या है?
निष्कर्ष: कानपुर की यह घटना यह दर्शाती है कि जब सिस्टम में भरोसा कम होता है, तो लोग इंसाफ के लिए हर संभव रास्ता अपनाते हैं। आशा है कि नई जांच में सच्चाई सामने आएगी और दोषी चाहे कोई भी हो, उसे सजा मिलेगी।

