NFHS-6 Health Data: देश में संस्थागत प्रसव 90.6% पहुंचा, 96 फीसदी से अधिक बच्चों का हुआ टीकाकरण; राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में बड़ा खुलासा

Praveen Yadav
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National Family Health Survey-6 Key Findings: केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) द्वारा राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के आंकड़े आधिकारिक तौर पर जारी कर दिए गए हैं. इस नवीनतम सर्वेक्षण के आंकड़े मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और वित्तीय सुरक्षा के मोर्चे पर भारत की "तेज प्रगति" (Accelerated Progress) को दर्शाते हैं.

National Family Health Survey-6 Key Findings: केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) द्वारा राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के आंकड़े आधिकारिक तौर पर जारी कर दिए गए हैं. इस नवीनतम सर्वेक्षण के आंकड़े मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और वित्तीय सुरक्षा के मोर्चे पर भारत की "तेज प्रगति" (Accelerated Progress) को दर्शाते हैं. 


रिपोर्ट के अनुसार, देश में संस्थागत प्रसव (अस्पतालों में होने वाले जन्म) की दर बढ़कर 90.6% तक पहुंच गई है, जबकि 12 से 23 महीने की उम्र के 96% से अधिक बच्चों को महत्वपूर्ण टीके लग चुके हैं.


इस राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण (NFHS-6) को साल 2023-24 के दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पापुलेशन साइंसेज (IIPS), मुंबई को नोडल एजेंसी बनाकर पूरा किया गया है. इस व्यापक सर्वे के तहत देश के 715 जिलों के लगभग 6.79 lakh घरों को कवर किया गया है, जो जिला स्तर तक नीति निर्माण और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए बेहद महत्वपूर्ण और पुख्ता सबूत प्रदान करता है.


मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में अभूतपूर्व सुधार: आंकड़ों की ज़ुबानी

मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, देश के भीतर गर्भवती महिलाओं और माताओं को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता में व्यापक सुधार दर्ज किया गया है:

  • प्रसव पूर्व देखभाल (Antenatal Care - ANC): देश में अब रिकॉर्ड 95.9% गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व देखभाल (ANC) की सुविधा मिल रही है.
  • पहली तिमाही में देखभाल: गर्भावस्था की पहली तिमाही (First Trimester) के दौरान ही प्रसव पूर्व देखभाल प्राप्त करने वाली माताओं की संख्या 70.0% से बढ़कर अब 76.2% हो गई है.
  • न्यूनतम 4 प्रसव पूर्व दौरे: ऐसी माताएं जिन्होंने गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार बार प्रसव पूर्व जांच (ANC Visits) कराई, उनका आंकड़ा भी 58.5% से सुधरकर अब 65.2% पर पहुंच गया है.
  • अस्पतालों में प्रसव (Institutional Deliveries): भारत अब सार्वभौमिक कवरेज (Universal Coverage) के बेहद करीब है, जहाँ संस्थागत प्रसव का ग्राफ 88.6% से बढ़कर अब 90.6% हो चुका है.
  • कुशल स्वास्थ्य कर्मियों की मौजूदगी: कुशल स्वास्थ्य कर्मियों (Skilled Health Personnel) की देखरेख में होने वाले जन्मों की संख्या 89.4% से सुधरकर 91.3% हो गई है.
  • प्रसवोत्तर देखभाल (Postnatal Care): नवजात शिशुओं के जन्म के दो दिनों के भीतर डॉक्टर, नर्स, एलएचवी (LHV), एएनएम (ANM) या अन्य मिडवाइफ कर्मियों द्वारा दी जाने वाली प्रसवोत्तर देखभाल का दायरा 79.1% से बढ़कर 85.3% हो गया है.

NFHS-6 स्वास्थ्य और पोषण संकेतक: तुलनात्मक डेटा तालिका

सर्वेक्षण के मुख्य निष्कर्षों, स्वास्थ्य पैमानों और पोषण संबंधी बदलावों के सटीक आंकड़ों को नीचे दी गई तालिका में विस्तार से प्रस्तुत किया गया है:

स्वास्थ्य एवं सामाजिक विकास संकेतक (Indicators) पिछला स्तर / संदर्भ NFHS-6 के नवीनतम आंकड़े
अस्पतालों में प्रसव (Institutional Deliveries) 88.6% 90.6%
गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व देखभाल (ANC) - 95.9%
पहली तिमाही में ANC प्राप्त करने वाली माताएं 70.0% 76.2%
कम से कम 4 बार ANC विजिट कराने वाली माताएं 58.5% 65.2%
कुशल स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा कराए गए प्रसव 89.4% 91.3%
जन्म के 2 दिन के भीतर नवजात की प्रसवोत्तर देखभाल 79.1% 85.3%
100 दिन या अधिक आयरन फोलिक एसिड (IFA) का सेवन 44.1% 54.9%
180 दिन या अधिक आयरन फोलिक एसिड (IFA) का变न 26.0% 37.8%
बच्चों का पूर्ण टीकाकरण (12-23 महीने - कोई भी टीका) - 96% से अधिक
शिशुओं को जन्म के 1 घंटे के भीतर स्तनपान 41.8% 50.1%
बच्चों में नाटापन / बौनापन (Stunting) दर 35.5% 29.3%
बच्चों में गंभीर कुपोषण / सूखापन (Severe Wasting) 7.7% 5.2%
कम वजन वाले बच्चे (Underweight) 32.1% 31.8%
पारिवारिक स्तर पर स्वास्थ्य बीमा कवरेज (Health Insurance) 41.0% 60.2%

मातृ-शिशु पोषण और टीकाकरण के मोर्चे पर बड़ी राहत

मातृ पोषण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया है. गर्भावस्था के दौरान 100 दिन या उससे अधिक समय तक आयरन फोलिक एसिड (IFA) सप्लीमेंट का सेवन करने वाली माताओं की संख्या 44.1% से बढ़कर 54.9% हो गई है. वहीं, 180 दिन या उससे अधिक दिनों तक सप्लीमेंट लेने वाली महिलाओं का प्रतिशत भी 26.0% से बढ़कर 37.8% पर पहुंच गया है.


शिशु टीकाकरण के मामले में, 12-23 महीने की उम्र के बच्चों में किसी भी वैक्सीन को प्राप्त करने की दर लगातार 96% से ऊपर बनी हुई है, और प्रमुख टीकों के कवरेज में भारी सुधार हुआ है. 


सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, 95.6% बच्चों ने अपनी अधिकांश वैक्सीन सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं (Public Health Facilities) के माध्यम से प्राप्त की हैं, जो दर्शाता है कि सरकारी स्वास्थ्य तंत्र जनता की पहली पसंद बना हुआ है. इस सफलता का श्रेय यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम के तहत काम करने वाले फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स, बेहतर कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर और 'U-WIN' जैसे डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को जाता है.


बाल पोषण (Child Nutrition) के मोर्चे पर, सर्वेक्षण अवधि के दौरान 6 महीने से कम उम्र के 95.6% बच्चे स्तनपान करते पाए गए. इसके अलावा, जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराने वाले 3 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का प्रतिशत लगभग 10 अंक सुधरकर 41.8% से 50.1% हो गया है. 


5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में नाटापन (Stunting) 35.5% से घटकर 29.3% रह गया है, जो दीर्घकालिक पोषण सुधार की पुष्टि करता है. इसी तरह गंभीर रूप से कमजोर/पतले बच्चों (Severe Wasting) का आंकड़ा भी 7.7% से गिरकर 5.2% पर आ गया है, जबकि कम वजन (Underweight) वाले बच्चों की दर में 32.1% से 31.8% की मामूली गिरावट दर्ज की गई है.


स्वास्थ्य बीमा कवरेज का विस्तार और उभरती हुई चुनौतियाँ

वित्तीय सुरक्षा के क्षेत्र में सरकार के फ्लैगशिप कार्यक्रमों के सकारात्मक परिणाम दिखे हैं. घरेलू स्तर पर स्वास्थ्य बीमा या स्वास्थ्य वित्तपोषण योजनाओं (Health Insurance/Financing Schemes) का दायरा 41.0% से बढ़कर सीधे 60.2% हो गया है, जो स्वास्थ्य क्षेत्र में लोगों को मिलने वाली वित्तीय सुरक्षा की सफलता को साबित करता है.


रिपोर्ट में जहाँ एक तरफ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और महिलाओं के सशक्तिकरण में निरंतर सुधार की बात कही गई है, वहीं कुछ उभरती हुई स्वास्थ्य चुनौतियों (Emerging Challenges) की तरफ भी ध्यान आकर्षित किया गया है. डेटा के अनुसार, देश में गैर-संचारी रोग (Non-Communicable Diseases), जीवनशैली से जुड़े जोखिम (Lifestyle-related risks) और वयस्कों के भीतर एक तरफ कुपोषण तो दूसरी तरफ बढ़ता हुआ मोटापा/अतिरिक्त वजन (Overweight/Obesity) एक दोहरी चुनौती बनकर उभर रहा है. 


इन चुनौतियों से निपटने के लिए आने वाले समय में निवारक स्वास्थ्य देखभाल (Preventive Healthcare), व्यवहार परिवर्तन (Behavioural Change) और संतुलित पोषण रणनीतियों पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है.


राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6, देश के स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्रों में नीति निर्माण और कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रदान करता है.

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