NSE Equity Cash Volume Record: भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) के लिए शुक्रवार का कारोबारी दिन उतार-चढ़ाव और बड़े ऐतिहासिक आंकड़ों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहा। जहाँ एक तरफ विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली और ब्लॉक डील्स के चलते दोनों प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए, वहीं दूसरी तरफ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने ट्रेडिंग वॉल्यूम के मामले में एक नया सर्वकालिक रिकॉर्ड (All-Time Record) बना दिया है।
ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को NSE के इक्विटी कैश सेगमेंट का कुल ट्रेडिंग वॉल्यूम रिकॉर्ड ₹2.87 लाख करोड़ (Rs 2.87 Lakh Crore) के स्तर पर पहुंच गया। यह भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में सिंगल-डे इक्विटी कैश सेगमेंट का अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक टर्नओवर है, जिसने बाजार के विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया है।
गिरावट के बीच आखिर क्यों बना वॉल्यूम का यह बड़ा रिकॉर्ड?
आमतौर पर जब बाजार में बड़ी गिरावट आती है, तो रिटेल निवेशक सहम जाते हैं। लेकिन आज का रिकॉर्ड यह दिखाता है कि बाजार में लिक्विडिटी (Liquidity) और बड़े संस्थागत सौदों की रफ्तार कितनी तेज थी:
- भारी ब्लॉक डील्स (Heavy Block Deals): आज बाजार में इंटरग्लोब एविएशन (Indigo) जैसी बड़ी लार्ज-कैप कंपनियों में विदेशी निवेशकों (FII) द्वारा की गई भारी-भरकम ब्लॉक डील्स और हिस्सेदारी बिक्री ने इस वॉल्यूम को आसमान पर पहुंचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई।
- पैनिक सेलिंग और डीआईआई की बाइंग: जहाँ एक तरफ विदेशी फंडों ने आक्रामक तरीके से मुनाफावसूली की, वहीं निचले स्तरों पर घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) और बड़े हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) ने जमकर खरीदारी की, जिससे शेयरों का लेन-देन रिकॉर्ड स्तर पर हुआ।
- इक्विटी कैश सेगमेंट की मजबूती: फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) के बजाय सीधे कैश सेगमेंट में इतना बड़ा टर्नओवर होना यह दर्शाता है कि बाजार में वास्तविक शेयर्स की डिलीवरी और लॉन्ग-टर्म पोजिशनिंग के लिए बड़े सौदे किए जा रहे हैं।
NSE रिकॉर्ड वॉल्यूम और बाजार का हाल (Market Statistics)
बाजार के इस ऐतिहासिक टर्नओवर और शुक्रवार के क्लोजिंग आंकड़ों का पूरा विवरण नीचे दी गई तालिका में विस्तार से दिया गया है:
| पैमाना / मार्केट इंडिकेटर (Metric) | महत्वपूर्ण आंकड़े और स्थिति (Key Details) |
|---|---|
| NSE इक्विटी कैश टर्नओवर | ₹2.87 लाख करोड़ (नया सर्वकालिक ऐतिहासिक रिकॉर्ड) |
| निफ्टी 50 (Nifty 50) की स्थिति | रिकॉर्ड वॉल्यूम के बावजूद इंडेक्स लाल निशान (गिरावट) में बंद हुआ। |
| सेंसेक्स (BSE Sensex) का हाल | बिकवाली के भारी दबाव के कारण सेंसेक्स भी निचले स्तरों पर बंद हुआ। |
| वॉल्यूम बढ़ने की मुख्य वजह | लार्ज-कैप स्टॉक्स में बड़े संस्थागत निवेशकों (FIIs/DIIs) के बीच ब्लॉक डील्स। |
| मार्केट सेंटिमेंट | शॉर्ट-टर्म में बिकवाली का दबाव, लेकिन लॉन्ग-टर्म लिक्विडिटी बेहद मजबूत। |
विदेशी निवेशकों के दबाव को घरेलू फंडों ने संभाला
बाजार में आई इस गिरावट और रिकॉर्ड वॉल्यूम के पीछे FII और DII के बीच की खींचतान साफ नजर आ रही है। वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लगातार भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं या फिर लार्ज-कैप कंपनियों में अपनी ब्लॉक डील्स के जरिए प्रॉफिट बुक कर रहे हैं।
हालांकि, भारतीय म्यूचुअल फंड हाउसेज और घरेलू निवेशकों (DII) के पास आ रहे मजबूत एसआईपी (SIP) इनफ्लो के कारण बाजार को हर गिरावट पर एक मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। यही वजह है कि बड़ी बिकवाली के बाद भी बाजार पूरी तरह क्रैश होने के बजाय संभल जाता है और ट्रेडिंग वॉल्यूम के नए रिकॉर्ड बनते हैं।
निवेशकों के लिए क्या है इसके मायने?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि ₹2.87 लाख करोड़ का यह रिकॉर्ड टर्नओवर भारतीय शेयर बाजार की गहराई और परिपक्वता (Maturity) को दर्शाता है। भले ही इंडेक्स शॉर्ट-टर्म में थोड़ा कमजोर होकर बंद हुए हों, लेकिन कैश सेगमेंट में इतनी बड़ी लिक्विडिटी यह साबित करती है कि भारतीय इक्विटी मार्केट ग्लोबल इनवेस्टर्स के रडार पर मजबूती से बना हुआ है। खुदरा निवेशकों को इंडेक्स की इस मामूली गिरावट से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि इसे अच्छी कंपनियों में निवेश करने के अवसर के रूप में देखना चाहिए।
निष्कर्ष: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर ₹2.87 लाख करोड़ का ऐतिहासिक कैश वॉल्यूम यह साफ करता है कि भारतीय बाजार का ढांचा अब वैश्विक स्तर पर सबसे मजबूत बाजारों में गिना जाता है। शेयर बाजार के लाइव अपडेट्स, ब्लॉक डील अलर्ट्स और कॉर्पोरेट जगत की ऐसी ही बेहद सटीक और सबसे तेज बिजनेस खबरों के लिए Jandrishti Today के साथ जुड़े रहें।

