Padmini Ekadashi 2026: आज रखा जाएगा पद्मिनी एकादशी व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कथा और पारण का सही समय

Praveen Yadav
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Padmini Ekadashi 2026 आज मनाई जा रही है। जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत नियम, पारण समय, धार्मिक महत्व और भगवान विष्णु की कृपा पाने के उपाय।

Padmini Ekadashi 2026 आज मनाई जा रही है। जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत नियम, पारण समय, धार्मिक महत्व और भगवान विष्णु की कृपा पाने के उपाय।

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। वर्ष 2026 में पड़ने वाली पद्मिनी एकादशी का महत्व और भी खास है क्योंकि यह अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास में आई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति, सुख-समृद्धि और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।


धार्मिक ग्रंथों में पद्मिनी एकादशी को “कमला एकादशी” और “पुरुषोत्तमी एकादशी” के नाम से भी जाना जाता है। यह एकादशी लगभग तीन साल में एक बार आती है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। 


पद्मिनी एकादशी 2026 कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 26 मई 2026 को प्रारंभ हुई और 27 मई की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर पद्मिनी एकादशी व्रत 27 मई 2026, बुधवार को रखा जा रहा है। 

जानकारी समय / तिथि
एकादशी तिथि प्रारंभ 26 मई 2026, सुबह 07:40 बजे
एकादशी तिथि समाप्त 27 मई 2026, सुबह 07:50 बजे
व्रत तिथि 27 मई 2026, बुधवार
पारण तिथि 28 मई 2026, गुरुवार

पद्मिनी एकादशी का शुभ मुहूर्त

इस बार पद्मिनी एकादशी पर कई शुभ योग बन रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है। 


  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह लगभग 04:03 से 04:45 बजे तक
  • पूजा का शुभ समय: सूर्योदय के बाद से दोपहर तक
  • पारण समय: 28 मई को सुबह 05:25 से 07:56 बजे तक

पद्मिनी एकादशी का धार्मिक महत्व

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अधिक मास में आने वाली यह एकादशी अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से व्यक्ति को हजारों यज्ञों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।


पद्म पुराण में बताया गया है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्त होकर भगवान विष्णु के धाम को प्राप्त करता है।


पद्मिनी एकादशी पूजा विधि

इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। पूजा विधि इस प्रकार मानी जाती है:

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
  2. घर के मंदिर की सफाई करें।
  3. भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, फूल और तुलसी अर्पित करें।
  4. घी का दीपक जलाएं।
  5. विष्णु सहस्रनाम या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
  6. एकादशी कथा पढ़ें या सुनें।
  7. रात में जागरण और भजन-कीर्तन करें।

धार्मिक मान्यता है कि तुलसी के बिना भगवान विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है। 


क्या खाएं और क्या नहीं?

एकादशी व्रत में सात्विक भोजन का विशेष महत्व होता है। इस दिन अन्न का सेवन वर्जित माना जाता है।

क्या खाएं क्या न खाएं
फल, दूध, मखाना, साबूदाना चावल और गेहूं
सिंघाड़े का आटा लहसुन-प्याज
सूखे मेवे तामसिक भोजन

पद्मिनी एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन समय में राजा कृतवीर्य और उनकी पत्नी रानी पद्मिनी ने भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए यह व्रत किया था। उनकी कठोर भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें संतान प्राप्ति का आशीर्वाद दिया। इसी कारण इस एकादशी को “पद्मिनी एकादशी” कहा जाता है। 


पारण का सही नियम

एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सही समय पर पारण करना अत्यंत आवश्यक होता है। पारण में सबसे पहले भगवान विष्णु को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करना चाहिए। 


इन बातों का रखें विशेष ध्यान

  • व्रत के दिन क्रोध और विवाद से बचें
  • किसी गरीब या जरूरतमंद को दान दें
  • तुलसी दल जरूर अर्पित करें
  • नकारात्मक विचारों से दूर रहें
  • रात में भजन-कीर्तन करना शुभ माना जाता है

FAQ

पद्मिनी एकादशी 2026 कब है?

पद्मिनी एकादशी 27 मई 2026, बुधवार को मनाई जा रही है।

पारण का समय क्या है?

28 मई 2026 को सुबह 05:25 से 07:56 बजे तक पारण करना शुभ माना गया है।

पद्मिनी एकादशी किस भगवान को समर्पित है?

यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है।

क्या एकादशी में चावल खा सकते हैं?

नहीं, धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी में चावल खाना वर्जित माना गया है।

Conclusion

पद्मिनी एकादशी हिंदू धर्म की सबसे महत्वपूर्ण और पुण्यदायी एकादशियों में से एक मानी जाती है। अधिक मास में आने के कारण इसका महत्व और बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और नियमपूर्वक यह व्रत करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

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