नई दिल्ली: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह एक बार फिर विवादों और चर्चाओं के केंद्र में हैं। साध्वियों के यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा काट रहे राम रहीम को सक्षम राज्य प्राधिकारियों द्वारा एक बार फिर 30 दिनों की पैरोल (Parole) मंजूर की गई है। अगस्त 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद से यह उनकी 16वीं अस्थायी रिहाई है।
राम रहीम सुबह करीब 6:34 बजे रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर निकले। जेल परिसर के बाहर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। रिहाई के तुरंत बाद राम रहीम का काफिला सीधा सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय के लिए रवाना हो गया। इस बार-बार मिलने वाली राहत ने न्याय प्रणाली और कानून के समान अधिकार पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
30 दिनों की पैरोल और कानूनी अधिकार
राम रहीम के वकील जितेंद्र खुराना ने इस रिहाई की पुष्टि करते हुए बताया कि पैरोल राज्य के सक्षम अधिकारियों द्वारा नियमानुसार दी गई है। इस 30 दिनों की अवधि के दौरान राम रहीम सिरसा स्थित अपने डेरा मुख्यालय में ही समय बिताएंगे। गौर करने वाली बात यह है कि इसी साल जनवरी में भी उन्हें 40 दिनों की पैरोल मिली थी, जिससे लौटने के बाद अब साल 2026 में यह उनकी दूसरी और कुल मिलाकर 16वीं अस्थायी रिहाई है।
राम रहीम की अब तक की जेल यात्रा और पैरोल का इतिहास
पिछले लगभग 8 वर्षों (लगभग 3,193 दिन) की सजा के दौरान राम रहीम 400 से अधिक दिन जेल की चहारदीवारी से बाहर खुली हवा में बिता चुके हैं। हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स (टेम्परेरी रिलीज) एक्ट, 2022 के तहत कैदियों को मिलने वाली इस छूट का राम रहीम ने सिलसिलेवार ढंग से लाभ उठाया है। नीचे दी गई तालिका में उनके हालिया वर्षों के पैरोल पैटर्न को समझा जा सकता है:
| वर्ष / तारीख | रिहाई का प्रकार | अवधि (दिनों में) |
|---|---|---|
| मई 2026 (वर्तमान) | पैरोल (Parole) | 30 दिन |
| जनवरी 2026 | पैरोल (Parole) | 40 दिन |
| अगस्त 2025 | पैरोल (Parole) | 40 दिन |
| अप्रैल 2025 | फर्लो (Furlough) | 21 दिन |
| जनवरी 2025 | पैरोल (Parole) | 30 दिन |
| अक्टूबर 2024 | पैरोल (Parole) | 20 दिन |
अदालती फैसलों से मिली बड़ी राहतें
राम रहीम को कानून के मोर्चे पर पिछले कुछ समय में बड़ी राहतें भी मिली हैं। विशेष सीबीआई अदालत द्वारा पत्रकार रामचन्द्र छत्रपति हत्याकांड और पूर्व डेरा प्रबंधक रंजीत सिंह हत्याकांड में सुनाई गई उम्रकैद की सजाओं के खिलाफ पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में अपील की गई थी।
उच्च न्यायालय ने साक्ष्यों की कमी और जांच की कमियों का हवाला देते हुए रंजीत सिंह हत्याकांड (2024 में) और हाल ही में मार्च 2026 में पत्रकार रामचन्द्र छत्रपति हत्याकांड में राम रहीम को पूरी तरह बरी (Acquit) कर दिया था। वर्तमान में वह केवल दो साध्वियों के यौन शोषण मामले में मिली 20 साल की सजा काट रहे हैं।
बार-बार पैरोल मिलने पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
राम रहीम को मिलने वाली लगातार पैरोल पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, विपक्षी दलों और न्यायविदों द्वारा लगातार आपत्तियां जताई जाती रही हैं। इसके पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण हैं:
- क्रोनोलॉजी और टाइमिंग: आलोचकों का आरोप है कि राम रहीम की रिहाई अक्सर किसी बड़े चुनाव (जैसे दिल्ली विधानसभा चुनाव या स्थानीय चुनाव) या डेरा के बड़े धार्मिक आयोजनों (जैसे शाह सतनाम महाराज की जयंती) के ठीक आसपास होती है, जिससे राजनीतिक लाभ-हानि की चर्चाएं गर्म हो जाती हैं।
- आम कैदियों के साथ तुलना: सवाल उठाए जाते हैं कि क्या जेलों में बंद अन्य सामान्य कैदियों को भी इतनी ही आसानी और बार-बार पैरोल की सुविधा मिल पाती है?
- न्याय की गंभीरता पर असर: कई सामाजिक संगठनों का मानना है कि इतने गंभीर मामलों के दोषी को बार-बार जेल से बाहर आने देने से पीड़ित परिवारों के मन में असुरक्षा की भावना पैदा होती है और कानून का डर कम होता है।
दूसरी तरफ, प्रशासन और जेल अधिकारियों का हमेशा से यह तर्क रहा है कि पैरोल या फर्लो पाना किसी भी कैदी का कानूनी और वैधानिक अधिकार है। यदि कैदी का जेल के अंदर आचरण (Good Conduct) सही रहता है, तो नियमों के दायरे में रहकर ही उसे तय समय के लिए अस्थाई रिहाई दी जाती है और इसमें किसी भी तरह का वीआईपी ट्रीटमेंट या पक्षपात नहीं किया जाता है।
FAQ: राम रहीम की 16वीं पैरोल से जुड़े अहम सवाल
राम रहीम को इस बार कितने दिनों की पैरोल मिली है?
राम रहीम जेल से बाहर आकर कहाँ रुकेंगे?
अब तक राम रहीम कुल कितनी बार जेल से बाहर आ चुके हैं?
निष्कर्ष (Conclusion)
राम रहीम को मिली 16वीं पैरोल ने एक बार फिर कानून, राजनीति और न्याय व्यवस्था के अंतर्संबंधों को बहस के चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। जहाँ एक तरफ इसे कानून के तहत कैदियों को मिलने वाला सामान्य अधिकार बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बार-बार मिलने वाली इस वीआईपी राहत पर समाज का एक बड़ा वर्ग असंतोष व्यक्त कर रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पैरोल के इन नियमों की समीक्षा के लिए अदालतें कोई नया रुख अपनाती हैं या नहीं।

