🔴 JanDrishti Today: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के आगामी मून मिशन को ध्यान में रखते हुए एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) ने इतिहास का सबसे बड़ा और शक्तिशाली रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है।
स्पेसएक्स ने शुक्रवार (22 मई 2026) को अपने मेगा रॉकेट स्टारशिप (Starship) के अपग्रेडेड और रीडिजाइन वर्जन को पहली बार टेस्ट फ्लाइट के लिए अंतरिक्ष में रवाना किया।
यह स्टारशिप रॉकेट का 12वां सबऑर्बिटल टेस्ट फ्लाइट (Flight 12) था, जिसे दक्षिण टेक्सास के बोका चिका में बने स्पेसएक्स के बिल्कुल नए दूसरे लॉन्चपैड (Starbase) से लॉन्च किया गया।
स्टारशिप वर्जन 3 (V3) की पहली उड़ान और इसकी खासियतें
इस मिशन के जरिए स्पेसएक्स ने अपनी नई पीढ़ी के 'स्टारशिप वर्जन 3' (Starship V3) का पहली बार प्रदर्शन किया है, जो पुराने मॉडलों की तुलना में काफी उन्नत है।
यह महाकाय रॉकेट पूरी तरह से रीयूजेबल (Reusable) तकनीक पर आधारित है और इसमें अधिक शक्तिशाली रैप्टर इंजनों (Raptor Engines) का इस्तेमाल किया गया है।
📊 स्टारशिप फ्लाइट 12 और नए वर्जन (V3) से जुड़े मुख्य आंकड़े:
📌 कुल ऊंचाई: 407 फीट (लगभग 124 मीटर), जो पुराने स्टारशिप मॉडल से कुछ फीट अधिक लंबा है।
📌 पेलोड प्रदर्शन: परीक्षण के तौर पर यह रॉकेट अपने साथ 20 मॉक स्टारलिंक सैटेलाइट लेकर अंतरिक्ष में गया।
📌 मिशन का लक्ष्य: इसका मुख्य उद्देश्य नए लॉन्चपैड, रैप्टर इंजनों की क्षमता और थर्मल हीट शील्ड की मजबूती की जांच करना था।
नासा का चंद्रमा मिशन और मस्क का बड़ा फैसला
नासा (NASA) अपने महत्वाकांक्षी आर्टेमिस (Artemis) कार्यक्रम के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को फिर से चंद्रमा की सतह पर उतारने के लिए स्टारशिप के इसी नए वर्जन पर भरोसा कर रहा है।
यह सफल लॉन्चिंग स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क द्वारा कंपनी को पब्लिक (IPO) ले जाने की बड़ी घोषणा के ठीक दो दिन बाद की गई है।
गुरुवार को एक तकनीकी खराबी (लॉन्च टॉवर के आर्म की हाइड्रोलिक पिन न हटने) के कारण इस काउंटडाउन को अंतिम 30 सेकंड पहले रोक दिया गया था, जिसे शुक्रवार शाम को ठीक कर सफलतापूर्वक उड़ाया गया।
📊 लॉन्चिंग और लैंडिंग का परिणाम:
🔴 बूस्टर की स्थिति: फर्स्ट-स्टेज सुपर हैवी बूस्टर ने उड़ान भरने और स्टेज सेपरेशन के बाद मैक्सिको की खाड़ी में अपनी यात्रा समाप्त की।
🔴 स्पेसक्राफ्ट की स्थिति: स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट अपनी तय सबऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी को पूरा करने के बाद हिंद महासागर (Indian Ocean) में क्रैश-लैंड/स्प्लैशडाउन हुआ।
इस टेस्ट फ्लाइट के जरिए मिले डेटा का इस्तेमाल कंपनी भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों को चांद और उसके बाद सीधे मंगल ग्रह (Mars) पर भेजने वाले ऑपरेशन्स के लिए करेगी।

