यरुशलम/न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक नई रिपोर्ट ने इजरायल और संयुक्त राष्ट्र के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। रिपोर्ट में इजरायली सुरक्षा बलों, जेल प्रशासन और अन्य सुरक्षा इकाइयों पर फिलिस्तीनी बंदियों के साथ रेप, यौन उत्पीड़न, जबरन कपड़े उतरवाने, जननांगों पर हिंसा और अपमानजनक व्यवहार जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद इजरायल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के कार्यालय से सभी संबंध समाप्त करने की घोषणा कर दी है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की वार्षिक रिपोर्ट में इजरायली सुरक्षा बलों को उन संस्थाओं की सूची में शामिल किया गया है जिन पर संघर्ष क्षेत्रों में यौन हिंसा से जुड़े गंभीर आरोप हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2023 से 2025 के बीच फिलिस्तीनी बंदियों के खिलाफ यौन हिंसा और दुर्व्यवहार के कई मामलों का सत्यापन किया गया।
रिपोर्ट में क्या कहा गया?
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार फिलिस्तीनी बंदियों के साथ हिरासत और पूछताछ के दौरान कई प्रकार की यौन हिंसा और अपमानजनक व्यवहार के आरोप सामने आए हैं। रिपोर्ट में रेप, गैंगरेप, यौन यातना, जननांगों पर हिंसा, जबरन नग्न करना, बिना सुरक्षा कारण के स्ट्रिप सर्च और रेप की धमकियों जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकांश आरोप गाजा और वेस्ट बैंक से हिरासत में लिए गए लोगों से जुड़े हैं। इनमें पुरुष और महिला दोनों बंदियों के मामले शामिल बताए गए हैं। कुछ मामलों में पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का भी उल्लेख किया गया है।
31 मामलों का सत्यापन
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2023 से 2025 के बीच फिलिस्तीनियों के खिलाफ यौन हिंसा से जुड़े 31 मामलों का सत्यापन किया गया। रिपोर्ट के अनुसार ये घटनाएं मुख्य रूप से हिरासत केंद्रों, जेलों और पूछताछ स्थलों पर हुईं।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि कई मामलों में बंदियों को अपमानित करने और मानसिक रूप से तोड़ने के लिए यौन हिंसा का इस्तेमाल किया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि जांच एजेंसियों को कई हिरासत केंद्रों तक पर्याप्त पहुंच नहीं दी गई।
UN ब्लैकलिस्ट में शामिल हुआ इजरायल
रिपोर्ट जारी होने के साथ ही संयुक्त राष्ट्र ने पहली बार इजरायली सुरक्षा बलों को संघर्ष क्षेत्रों में यौन हिंसा से जुड़े आरोपों वाली अपनी ब्लैकलिस्ट में शामिल किया है। इस सूची में पहले से रूस, हमास और ISIS जैसे नाम शामिल रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यह फैसला उपलब्ध सबूतों, गवाहियों और सत्यापित मामलों के आधार पर लिया गया है।
इजरायल ने रिपोर्ट को बताया पक्षपातपूर्ण
रिपोर्ट सामने आने के बाद इजरायल ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। इजरायली अधिकारियों ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट राजनीतिक रूप से प्रेरित है और इसमें इजरायल को गलत तरीके से निशाना बनाया गया है।
इजरायल का कहना है कि उसकी सुरक्षा एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय कानूनों और नियमों के तहत काम करती हैं तथा लगाए गए आरोप वास्तविकता को नहीं दर्शाते।
गुटेरेस के कार्यालय से संबंध समाप्त
इजरायल ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के कार्यालय के साथ अपने संबंध समाप्त करने की घोषणा की है। इजरायली नेतृत्व का आरोप है कि संयुक्त राष्ट्र लंबे समय से उसके खिलाफ पक्षपातपूर्ण रुख अपनाता रहा है।
रिपोर्ट के बाद यह फैसला दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक तनाव को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
रिपोर्ट के सामने आने के बाद कई मानवाधिकार संगठनों ने आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों और युद्ध संबंधी नियमों का गंभीर उल्लंघन होगा।
कुछ संगठनों ने पहले भी फिलिस्तीनी बंदियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और हिरासत केंद्रों में अमानवीय व्यवहार को लेकर चिंता जताई थी।
इजरायल और UN के बीच बढ़ा तनाव
गाजा युद्ध के बाद से इजरायल और संयुक्त राष्ट्र के बीच संबंध लगातार तनावपूर्ण रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के कई अधिकारियों और एजेंसियों ने गाजा में मानवीय स्थिति को लेकर चिंता जताई है, जबकि इजरायल ने कई रिपोर्टों और बयानों को पक्षपातपूर्ण बताया है।
ताजा रिपोर्ट और उसके बाद उठाए गए कदमों ने दोनों पक्षों के बीच चल रहे टकराव को और गहरा कर दिया है।
मुख्य बातें
- UN रिपोर्ट में इजरायली सुरक्षा बलों पर यौन हिंसा के गंभीर आरोप लगाए गए।
- फिलिस्तीनी बंदियों के साथ रेप, यौन उत्पीड़न और जबरन नग्न करने के आरोप।
- 2023 से 2025 के बीच 31 मामलों के सत्यापन का दावा।
- संयुक्त राष्ट्र ने इजरायल को यौन हिंसा ब्लैकलिस्ट में शामिल किया।
- इजरायल ने रिपोर्ट को राजनीतिक और पक्षपातपूर्ण बताया।
- एंटोनियो गुटेरेस के कार्यालय से संबंध समाप्त करने की घोषणा।
- मानवाधिकार संगठनों ने स्वतंत्र जांच की मांग उठाई।
- गाजा युद्ध के बाद UN और इजरायल के बीच तनाव और बढ़ा।

