पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी आंतरिक विवाद ने अब खुली बगावत का रूप ले लिया है। बागी गुट ने पार्टी की मौजूदा संरचना को चुनौती देते हुए बड़ा फैसला लिया है, जिसमें Mamata Banerjee को चेयरपर्सन पद से हटाने और Abhishek Banerjee को पार्टी से सस्पेंड करने की घोषणा शामिल है।
TMC बगावत और नई संगठनात्मक समिति का ऐलान
उलुबेरिया पूर्व के विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने न्यू टाउन के एक होटल में हुई अहम बैठक में खुद को “असली तृणमूल कांग्रेस” बताते हुए नई संगठनात्मक समिति का गठन किया। इस बैठक में कई विधायक और कोलकाता नगर निगम (KMC) सहित विभिन्न जिलों के करीब 70 पार्षद शामिल हुए।
बैठक में बागी गुट ने दावा किया कि पार्टी का संगठनात्मक ढांचा लंबे समय से पुनर्गठित नहीं हुआ था, जिससे “संवैधानिक संकट” पैदा हो गया है। इसी आधार पर नई राष्ट्रीय कार्य समिति के गठन का प्रस्ताव पारित किया गया।
नई नेतृत्व संरचना का दावा
बागी गुट ने वरिष्ठ विधायक Arup Roy को नई गठित संगठनात्मक समिति का चेयरमैन घोषित किया है। साथ ही यह भी दावा किया गया कि अब पार्टी का नया नेतृत्व ढांचा लागू कर दिया गया है।
ऋतब्रत बनर्जी ने बयान में कहा कि पार्टी संविधान के अनुसार हर तीन साल में राष्ट्रीय कार्यकारी समिति का गठन जरूरी है, लेकिन फरवरी 2022 के बाद से यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इसी कारण संगठन को पुनर्गठित करने की आवश्यकता पड़ी।
नई कार्यसमिति में शामिल प्रमुख नाम
बागी गुट द्वारा घोषित राष्ट्रीय कार्यसमिति में कुल 29 विधायकों को शामिल करने का दावा किया गया है। प्रमुख नामों में फिरहाद हकीम, अरूप विश्वास, रथिन घोष और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हैं।
इस सूची के जारी होने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
TMC का पलटवार और अनुशासनात्मक कार्रवाई
दूसरी ओर, आधिकारिक तृणमूल कांग्रेस ने बागी खेमे में शामिल नेताओं के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। पार्टी ने इन नेताओं पर अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाया है।
जिन प्रमुख नेताओं को नोटिस भेजा गया है उनमें फिरहाद हकीम, अरूप विश्वास, अरूप रॉय, जावेद खान और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हैं।
राजनीतिक बयानबाजी और तीखी प्रतिक्रिया
TMC नेता कुणाल घोष ने बागी गुट के फैसले को “कॉमेडी शो” बताते हुए कहा कि यह कदम राजनीतिक रूप से गंभीर नहीं है। उन्होंने दावा किया कि मामला अदालत में है और पार्टी को न्याय मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने यह भी कहा कि टीएमसी का मतलब ममता बनर्जी है और बाकी सभी गतिविधियां महत्वहीन हैं।
तीन गुटों में बंटी TMC का दावा
ताजा घटनाक्रम के बाद राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार TMC अब तीन अलग-अलग धड़ों में बंटी हुई नजर आ रही है—
- ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला आधिकारिक गुट
- ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी गुट
- लोकसभा सांसदों का एक अलग समूह, जो अलग राजनीतिक रुख अपना रहा है
पार्टी सिंबल और फंड पर विवाद
बागी गुट ने संकेत दिया है कि वह पार्टी के चुनाव चिन्ह पर दावा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है। इसके अलावा लगभग 1100 करोड़ रुपये के पार्टी फंड पर अधिकार को लेकर भी विवाद गहरा गया है।
हाल ही में बैंक खातों पर लगाए गए डेबिट फ्रीज के बाद वित्तीय पारदर्शिता को लेकर जांच की मांग तेज हो गई है।
निष्कर्ष
TMC के भीतर यह सियासी संकट आने वाले दिनों में और गंभीर मोड़ ले सकता है। नेतृत्व, संगठन और वित्तीय नियंत्रण को लेकर उठे सवालों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में अनिश्चितता बढ़ा दी है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि पार्टी इस संकट से कैसे उबरती है और असली नेतृत्व किसके हाथ में रहता है।

