मुंबई: खनन और प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी वेदांता के बड़े कॉर्पोरेट पुनर्गठन (डिमर्जर) के बाद निवेशकों को बड़ा फायदा मिला है। कंपनी के पांच अलग-अलग कारोबारों में विभाजन के बाद समूह की कुल वैल्यू में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सोमवार को शेयर बाजार में डेब्यू करने वाली वेदांता की चार नई कंपनियों के शेयर शुरुआती बढ़त बरकरार नहीं रख सके और अंत में 1 से 5 फीसदी तक की गिरावट के साथ बंद हुए। इसके बावजूद इन चार कंपनियों और मूल वेदांता इकाई का संयुक्त मूल्य लगभग 902 रुपये पहुंच गया, जो 29 अप्रैल को डिमर्जर से पहले वेदांता के 773.25 रुपये के अंतिम कारोबार मूल्य से करीब 20 फीसदी अधिक है।
एल्यूमिनियम यूनिट बनी सबसे बड़ी कंपनी
डिमर्जर के बाद वेदांता एल्युमिनियम मेटल समूह की सबसे मूल्यवान कंपनी बनकर उभरी है। भारत में एल्यूमिनियम उत्पादन में अग्रणी वेदांता के इस कारोबार का मूल्यांकन बाजार विशेषज्ञों के अनुमान के अनुरूप रहा।
वहीं वेदांता आयरन एंड स्टील समूह की सबसे छोटी कंपनी के रूप में सामने आई है, हालांकि इसकी लिस्टिंग उम्मीद से बेहतर मूल्य पर हुई थी। इसके बावजूद कारोबार के अंत तक इसके शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली।
नई कंपनियों का प्रदर्शन
वेदांता के डिमर्जर के तहत निवेशकों को उनके पास मौजूद प्रत्येक वेदांता शेयर के बदले चार नई कंपनियों के एक-एक शेयर आवंटित किए गए। शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई नई कंपनियां हैं:
- Vedanta Aluminium Metal
- Vedanta Oil & Gas
- Vedanta Power
- Vedanta Iron & Steel
इनमें पावर कारोबार का मूल्यांकन बाजार की उम्मीदों से बेहतर रहा, जबकि ऑयल एंड गैस यूनिट निचले अनुमानित दायरे में सूचीबद्ध हुई।
तीन साल बाद पूरा हुआ डिमर्जर
यह भारत के सबसे बड़े कॉर्पोरेट पुनर्गठन अभियानों में से एक माना जा रहा है। लगभग तीन साल पहले घोषित इस योजना का उद्देश्य कंपनी की जटिल कॉर्पोरेट संरचना को सरल बनाना और प्रत्येक कारोबार को स्वतंत्र पहचान देना था।
विश्लेषकों का मानना है कि अलग-अलग व्यवसायों के स्वतंत्र रूप से सूचीबद्ध होने से निवेशकों को प्रत्येक सेक्टर में निवेश का स्पष्ट विकल्प मिलेगा और कंपनियों का वास्तविक मूल्य बेहतर तरीके से सामने आएगा।
अनिल अग्रवाल ने क्या कहा?
वेदांता के गैर-कार्यकारी चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने इस अवसर को समूह के इतिहास का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि 24 साल पहले लंदन स्टॉक एक्सचेंज में वेदांता की शुरुआत हुई थी और उसी दिन इस विशाल समूह का बीज बोया गया था।
उन्होंने कहा, "24 साल पहले बोया गया वह बीज आज एक विशाल वृक्ष का रूप ले चुका है। अब इसकी हर शाखा एक मजबूत और स्वतंत्र वृक्ष बनने के लिए तैयार है।"
निवेशकों के लिए क्या मायने?
विशेषज्ञों का मानना है कि डिमर्जर से वेदांता समूह के विभिन्न कारोबारों का वास्तविक मूल्य सामने आया है। एल्यूमिनियम, ऊर्जा, तेल एवं गैस और स्टील जैसे क्षेत्रों में अलग-अलग निवेश अवसर बनने से निवेशकों को बेहतर विकल्प मिलेंगे।
हालांकि बाजार में शुरुआती उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन कुल मिलाकर डिमर्जर को निवेशकों के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है। आने वाले महीनों में इन कंपनियों के स्वतंत्र प्रदर्शन पर बाजार की नजर बनी रहेगी।
निष्कर्ष: वेदांता के डिमर्जर ने न केवल समूह की वैल्यू बढ़ाई है, बल्कि निवेशकों के लिए नए अवसर भी पैदा किए हैं। एल्यूमिनियम कारोबार सबसे बड़ी इकाई के रूप में उभरा है, जबकि अन्य व्यवसाय भी अपने-अपने क्षेत्रों में स्वतंत्र विकास की राह पर आगे बढ़ेंगे।

