नई दिल्ली: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि की कथित हेराफेरी को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
केजरीवाल ने दावा किया कि यदि मीडिया रिपोर्ट्स सही हैं और राम मंदिर ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को वित्तीय जानकारी देने से इनकार किया है, तो यह बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि देश के सर्वोच्च कार्यालय की ओर से मांगी गई जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई गई।
केजरीवाल ने PM की ‘बेबसी’ पर उठाए सवाल
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट करते हुए कहा कि अगर चंपत राय ने वास्तव में प्रधानमंत्री कार्यालय को दान राशि का हिसाब देने से मना कर दिया है, तो यह कई नए सवाल खड़े करता है।
उन्होंने लिखा, “सोचिए, चंपत राय ने प्रधानमंत्री को हिसाब देने से मना कर दिया। आखिर चंपत राय में इतनी हिम्मत कहां से आई? वह ऐसा कौन सा राज जानते हैं कि प्रधानमंत्री भी उनके सामने बेबस दिखाई दे रहे हैं?”
केजरीवाल के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है और विपक्षी दल इस मामले में पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने राम मंदिर ट्रस्ट से मंदिर में प्राप्त दान और चढ़ावे का विस्तृत ब्योरा मांगा था। रिपोर्ट्स के अनुसार, जिला प्रशासन के माध्यम से जब ट्रस्ट से जानकारी मांगी गई तो ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कथित रूप से वित्तीय विवरण साझा करने से इनकार कर दिया।
बताया गया कि चंपत राय ने कहा कि मामले की जांच पहले से विशेष जांच दल (SIT) द्वारा की जा रही है, इसलिए फिलहाल कोई जानकारी साझा नहीं की जा सकती।
हालांकि, इस संबंध में ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
SIT जांच को भी बताया ‘ढकोसला’
अरविंद केजरीवाल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि SIT केवल छोटे कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है और असली जिम्मेदार लोगों तक नहीं पहुंच रही।
उन्होंने कहा कि यह जांच लोगों की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश है। उनके अनुसार SIT के पास वास्तविक जांच करने की पर्याप्त शक्तियां नहीं हैं और इसका उद्देश्य केवल प्रभावशाली लोगों को बचाना है।
केजरीवाल ने कहा कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच करनी है तो स्वतंत्र एजेंसी या न्यायिक निगरानी में जांच कराई जानी चाहिए।
दान राशि और जमीन खरीद को लेकर पहले भी लगे हैं आरोप
राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े वित्तीय मामलों को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि मंदिर से जुड़े कुछ भूमि सौदों में बाजार मूल्य से कहीं अधिक कीमत पर जमीन खरीदी गई।
इसके अलावा मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई नकदी और बहुमूल्य वस्तुओं को लेकर भी अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि ट्रस्ट इन आरोपों को पहले भी खारिज करता रहा है।
दान हेराफेरी मामले में FIR दर्ज
इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर अयोध्या राम मंदिर में कथित दान हेराफेरी मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
एफआईआर में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, टिन्नू यादव, मनीष यादव समेत कई लोगों को नामजद किया गया है। पुलिस और SIT दोनों मामले की जांच कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा मामला
मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। शीर्ष अदालत में दायर एक याचिका में कथित वित्तीय अनियमितताओं, दान राशि के गायब होने और प्रशासनिक गड़बड़ियों की कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई है।
याचिका में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की निगरानी में विशेष जांच दल गठित करने की भी मांग की गई है ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।
राजनीतिक बहस तेज
राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में मंदिर से जुड़े वित्तीय मामलों पर उठ रहे सवालों ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। एक तरफ विपक्ष जवाब मांग रहा है तो दूसरी तरफ जांच एजेंसियां मामले की तह तक पहुंचने का दावा कर रही हैं।
आने वाले दिनों में SIT जांच, पुलिस कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती है। फिलहाल राम मंदिर दान विवाद राष्ट्रीय राजनीति और जनचर्चा का बड़ा मुद्दा बन चुका है।

