Aymen Hussein Story: अल-कायदा ने पिता को मारा, भाई लापता हुआ, अब इराक को 40 साल बाद FIFA World Cup 2026 तक पहुंचाया

Praveen Yadav
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FIFA World Cup 2026 में हिस्सा ले रही Iraq National Football Team के स्टार स्ट्राइकर Aymen Hussein की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। जिस खिलाड़ी ने इराक को 40 साल बाद फुटबॉल विश्व कप के मंच तक पहुंचाया, उसके जीवन में संघर्ष, दर्द और त्रासदी की लंबी कहानी छिपी हुई है।

FIFA World Cup 2026 में हिस्सा ले रही Iraq National Football Team के स्टार स्ट्राइकर Aymen Hussein की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। जिस खिलाड़ी ने इराक को 40 साल बाद फुटबॉल विश्व कप के मंच तक पहुंचाया, उसके जीवन में संघर्ष, दर्द और त्रासदी की लंबी कहानी छिपी हुई है।


आज जब दुनिया Aymen Hussein को विश्व कप में गोल करते हुए देख रही है, तब शायद बहुत कम लोग जानते हैं कि बचपन में उसने अपने पिता को आतंकवाद में खो दिया था और उसका बड़ा भाई रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो गया था।


जब अल-कायदा ने छीन लिया पिता का साया

अयमेन हुसैन का जन्म इराक के किर्कुक प्रांत के हविजा जिले के अल-सफरा गांव में हुआ था। उनका बचपन युद्ध, गोलियों और धमाकों के बीच बीता।


जब वह सिर्फ 12 साल के थे, तब उनके पिता, जो इराकी सेना में सैनिक थे, घर बनाने के लिए सामान खरीदने निकले थे। उसी दौरान अल-कायदा के आतंकियों ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी।


पिता की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अयमेन ने अपनी मां और बड़े भाई को गांव छोड़ने के लिए कहा, लेकिन उनके भाई ने जाने से इनकार कर दिया। कुछ समय बाद उसे कथित तौर पर ISIS आतंकियों ने अगवा कर लिया और वह फिर कभी वापस नहीं लौटा।


अधूरा रह गया पिता का सपना

पिता जिस घर का निर्माण कर रहे थे, वह कभी पूरा नहीं हो सका। अयमेन हुसैन ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनका सबसे बड़ा सपना फुटबॉलर बनना नहीं बल्कि इतना पैसा कमाना था कि वह अपने पिता के अधूरे घर को पूरा कर सकें।


यही सपना उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देता रहा।


18 साल बाद लिखी इतिहास की नई कहानी

संघर्षों से भरे जीवन के बावजूद अयमेन ने हार नहीं मानी। लगातार मेहनत करते हुए वह इराक की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम तक पहुंचे।


फिर वह ऐतिहासिक पल आया जब उनके गोल ने इराक को 40 साल बाद पहली बार FIFA World Cup 2026 के लिए क्वालिफाई करा दिया। यह सिर्फ एक गोल नहीं था, बल्कि करोड़ों इराकी नागरिकों के सपनों को पूरा करने वाला क्षण था।


विश्व कप तक पहुंचने का सफर भी आसान नहीं था

इराक की टीम ने विश्व कप क्वालिफिकेशन के दौरान 28 महीनों में 21 मुकाबले खेले। युद्ध और सुरक्षा चुनौतियों के कारण टीम को कई बार असामान्य परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।


ईरान के साथ तनाव के कारण उड़ानें बंद हो गई थीं। खिलाड़ियों को रेगिस्तान पार कर जॉर्डन पहुंचना पड़ा। कई खिलाड़ियों ने 28 घंटे तक लगातार यात्रा की। इसके बाद 36 घंटे की अतिरिक्त देरी और लंबी उड़ानों के बाद टीम मेक्सिको पहुंच सकी।


इन तमाम मुश्किलों के बावजूद इराक ने प्लेऑफ मुकाबला जीतकर विश्व कप का टिकट हासिल किया।


कोच Graham Arnold ने बदली टीम की तस्वीर

ऑस्ट्रेलियाई कोच Graham Arnold ने इराकी टीम में नई जान फूंकी। टीम के कई खिलाड़ी अलग-अलग देशों में पले-बढ़े थे और भाषा भी एक बड़ी समस्या थी।


कोच ने अंग्रेजी और अरबी बोलने वाले खिलाड़ियों को मैदान पर अलग-अलग हिस्सों में व्यवस्थित किया ताकि संचार बेहतर हो सके। यह अनोखी रणनीति टीम के लिए काफी सफल साबित हुई।


Ali Al-Hamadi की कहानी भी प्रेरणादायक

इराक़ के एक और स्टार खिलाड़ी Ali Al-Hamadi का जीवन भी संघर्षों से भरा रहा है। उनका परिवार हिंसा से बचने के लिए इराक छोड़कर इंग्लैंड के लिवरपूल में बस गया था।


बचपन में नस्लीय भेदभाव और कठिन परिस्थितियों का सामना करने वाले अली अल-हमादी आज इराक की विश्व कप टीम के अहम सदस्य हैं।


Norway के खिलाफ भी दिखाया जज्बा

FIFA World Cup 2026 में Norway के खिलाफ मुकाबले में इराक को 4-1 से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि Aymen Hussein ने शानदार हेडर गोल कर टीम को मुकाबले में बनाए रखा।


Erling Haaland के दो गोलों की बदौलत Norway ने जीत दर्ज की, लेकिन इराक के संघर्ष और जज्बे ने दुनियाभर के फुटबॉल प्रशंसकों का दिल जीत लिया।


इराक के लिए उम्मीद का नया चेहरा

आज Aymen Hussein सिर्फ एक फुटबॉलर नहीं हैं, बल्कि उन लाखों लोगों के लिए उम्मीद की मिसाल हैं जिन्होंने युद्ध, आतंकवाद और मुश्किल हालात के बीच अपने सपनों को जिंदा रखा।


जिस बच्चे ने अपने पिता को खोया, भाई को खोया और अधूरा घर देखा, वही आज FIFA World Cup 2026 में इराक की सबसे बड़ी उम्मीद बनकर खड़ा है।

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