वॉशिंगटन, 13 जून। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति के सभी मुख्य उद्देश्यों को पूरा करता है और आने वाले कुछ दिनों में इस पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।
अधिकारी ने कहा कि यह समझौता केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे मध्य पूर्व क्षेत्र में लंबे समय तक शांति और स्थिरता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
समझौते से क्या-क्या होगा?
व्हाइट हाउस के अधिकारी के अनुसार इस समझौते में कई महत्वपूर्ण बातें शामिल हैं।
सबसे पहले, समुद्री रास्तों और जलडमरूमध्यों पर लगी रुकावटों को हटाया जाएगा। इससे जहाजों की आवाजाही सामान्य हो सकेगी और व्यापार को फायदा मिलेगा।
दूसरा, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने की प्रक्रिया शुरू होगी। अमेरिका का कहना है कि समझौते के तहत ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को बंद करेगा और उसकी परमाणु सुविधाओं को हटाया जाएगा।
तीसरा, ईरान के पास मौजूद संवर्धित (Enriched) परमाणु सामग्री अमेरिका को सौंपी जाएगी। अधिकारी ने बताया कि इस सामग्री को पहले सुरक्षित तरीके से नष्ट किया जाएगा और फिर देश से बाहर ले जाया जाएगा।
शांति की गारंटी का दावा
व्हाइट हाउस ने दावा किया है कि यह समझौता क्षेत्र में लंबे समय की शांति की गारंटी देगा।
अधिकारी ने कहा कि इसके बाद ईरान क्षेत्र में हिंसा फैलाने वाले समूहों को आर्थिक मदद देना बंद करेगा। साथ ही अन्य देश भी ईरान की क्षेत्रीय संप्रभुता यानी उसकी सीमाओं और अधिकारों का सम्मान करेंगे।
अमेरिका का मानना है कि इससे मध्य पूर्व में तनाव कम होगा और कई वर्षों से चल रहे विवादों को कम करने में मदद मिलेगी।
जांच की सख्त व्यवस्था होगी
समझौते में एक विशेष निरीक्षण व्यवस्था भी शामिल होगी।
इस व्यवस्था के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ईरान समझौते की सभी शर्तों का पालन कर रहा है।
व्हाइट हाउस के अनुसार यह व्यवस्था समझौते को लंबे समय तक लागू रखने और उसे प्रभावी बनाने में मदद करेगी।
ईरानी मीडिया के दावों पर अमेरिका की चेतावनी
व्हाइट हाउस अधिकारी ने कहा कि ईरान के कुछ कट्टरपंथी नेता और सरकारी मीडिया इस समझौते को अपने देश के लोगों के सामने अलग तरीके से पेश कर सकते हैं।
उनका कहना है कि ऐसे लोग समझौते को इस तरह दिखाने की कोशिश करेंगे जिससे उन्हें राजनीतिक फायदा मिले और अमेरिका की उपलब्धियां कम दिखाई दें।
अधिकारी ने कहा कि अमेरिका को पहले से उम्मीद थी कि ईरान के भीतर इस तरह का प्रचार किया जाएगा। इसलिए लोगों को ऐसे दावों को सावधानी से देखना चाहिए।
समझौते की संभावना 80 से 85 प्रतिशत
अधिकारी ने बताया कि समझौते को लेकर बातचीत लगातार आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि अगर सुबह उनसे पूछा जाता तो वह समझौते की संभावना लगभग 75 प्रतिशत बताते, लेकिन अब यह बढ़कर 80 से 85 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि अभी समझौता पूरी तरह तय नहीं हुआ है और अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है।
ईरान के अंदर मतभेद बने हुए हैं
अमेरिकी अधिकारी के अनुसार ईरान की राजनीतिक व्यवस्था काफी जटिल है।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों से अमेरिका की बातचीत हो रही है, उनमें से अधिकांश समझौते के पक्ष में हैं। लेकिन सभी लोग इसके समर्थन में नहीं हैं।
कुछ समूह अब भी समझौते का विरोध कर रहे हैं और इन्हीं अंदरूनी मतभेदों को सुलझाने की कोशिश की जा रही है।
अधिकारी का मानना है कि जब ईरान के भीतर सहमति बन जाएगी, तभी अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
क्या ईरान को तुरंत पैसे मिलेंगे?
हाल के दिनों में कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि समझौते पर हस्ताक्षर होते ही ईरान को 1 अरब, 6 अरब या 12 अरब डॉलर जैसी बड़ी रकम दी जाएगी।
व्हाइट हाउस ने इन सभी दावों को गलत बताया है।
अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर करते ही ईरान को कोई पैसा नहीं मिलेगा। न ही केवल बातचीत होने पर उसे कोई आर्थिक लाभ दिया जाएगा।
नियम मानने पर मिलेगा आर्थिक लाभ
अमेरिका के अनुसार ईरान को आर्थिक लाभ तभी मिलेगा जब वह समझौते की शर्तों को पूरा करेगा।
उदाहरण के लिए:
- यदि ईरान परमाणु सामग्री सौंप देता है तो उसे कुछ आर्थिक लाभ मिल सकता है।
- यदि वह अपनी परमाणु सुविधाओं को खत्म करता है तो उसे अतिरिक्त राहत दी जा सकती है।
- यदि वह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने में सहयोग करता है तो उसे और लाभ मिल सकते हैं।
यानी ईरान को मिलने वाले सभी फायदे उसके प्रदर्शन और समझौते के पालन पर निर्भर करेंगे।
दुनिया की नजर समझौते पर
यह समझौता केवल अमेरिका और ईरान के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की नजर इस पर बनी हुई है।
यदि समझौता सफल होता है तो इससे:
- मध्य पूर्व में तनाव कम हो सकता है।
- वैश्विक तेल बाजारों को राहत मिल सकती है।
- व्यापारिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
- परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।
निष्कर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौता कई बड़े बदलाव ला सकता है। व्हाइट हाउस का दावा है कि इससे ईरान का परमाणु कार्यक्रम खत्म होगा, परमाणु सामग्री देश से बाहर जाएगी और क्षेत्र में लंबे समय तक शांति बनी रहेगी। हालांकि ईरान के अंदर अभी भी कुछ मतभेद मौजूद हैं, इसलिए अंतिम हस्ताक्षर होने तक स्थिति पर नजर बनी रहेगी। आने वाले कुछ दिन इस समझौते और मध्य पूर्व की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

