नई दिल्ली/होर्मुज, 14 जून। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। भारत द्वारा हाल ही में विरोध जताए जाने के बावजूद एक बार फिर भारतीय चालक दल वाले एक जहाज पर हमला हुआ है।
रिपोर्टों के अनुसार 12 और 13 जून की रात होर्मुज क्षेत्र से गुजर रहे तेल और रसायन ले जाने वाले टैंकर बोकेम मरेंगो (Bowchem Marengo) पर ड्रोन हमला किया गया। राहत की बात यह रही कि जहाज पर सवार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
बताया जा रहा है कि बोकेम मरेंगो एक तेल और रसायन ढोने वाला टैंकर है, जिस पर हांगकांग का झंडा लगा हुआ था। जहाज का संचालन एंग्लो-ईस्टर्न शिप मैनेजमेंट (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जा रहा था।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जहाज पर मौजूद पूरा चालक दल भारतीय नाविकों का था।
यह टैंकर होर्मुज क्षेत्र से गुजर रहा था, तभी देर रात एक मानवरहित ड्रोन ने उसे निशाना बनाया।
जहाज को कितना नुकसान हुआ?
हमले के बाद जहाज के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा।
- नंबर-1 पोर्ट वाटर बैलास्ट टैंक प्रभावित हुआ।
- नंबर-2 पोर्ट वाटर बैलास्ट टैंक को भी नुकसान पहुंचा।
- नंबर-2 पोर्ट कार्गो टैंक भी हमले की चपेट में आया।
बैलास्ट टैंक जहाज का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं, जबकि कार्गो टैंक में तेल और रसायन जैसे सामान रखे जाते हैं।
हालांकि नुकसान होने के बावजूद जहाज डूबा नहीं और अपनी यात्रा जारी रखने में सफल रहा।
सभी भारतीय नाविक सुरक्षित
हमले के बाद सबसे बड़ी राहत की खबर यह रही कि जहाज पर मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं।
किसी भी चालक दल सदस्य के घायल होने या जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।
घटना के बाद जहाज पर मौजूद कर्मचारियों ने सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया और स्थिति को नियंत्रित रखा।
तुरंत सक्रिय हुई आपातकालीन टीम
हमले की जानकारी मिलते ही आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (Emergency Response Team) को सक्रिय कर दिया गया।
जहाज प्रबंधन ने संबंधित नौसैनिक एजेंसियों और यूकेएमटीओ (UKMTO) को भी घटना की सूचना दी।
यूकेएमटीओ इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा गतिविधियों पर नजर रखने वाली महत्वपूर्ण संस्था मानी जाती है।
फुजैराह पहुंचा जहाज
हमले के बाद जहाज धीरे-धीरे अपनी यात्रा जारी रखते हुए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के फुजैराह बंदरगाह पहुंच गया।
फुजैराह खाड़ी क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण बंदरगाह है, जहां जहाजों की जांच और मरम्मत की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
शिपिंग कंपनी ने जहाज की तकनीकी जांच और मरम्मत के लिए विशेषज्ञों की एक टीम वहां भेजी है।
होर्मुज में क्यों बढ़ा है तनाव?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
पिछले कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ने से व्यापारिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी बढ़ी हैं।
इसी वजह से होर्मुज से गुजरने वाले जहाज लगातार जोखिम का सामना कर रहे हैं।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब हाल ही में भारतीय नाविकों से जुड़े एक अन्य समुद्री हादसे को लेकर भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत कर नागरिक जहाजों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था।
भारत ने स्पष्ट कहा था कि आम व्यापारिक जहाजों पर होने वाले हमले स्वीकार नहीं किए जा सकते और समुद्री मार्गों पर काम कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
विदेश मंत्रालय ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की थी और भारतीय नाविकों पर हो रहे हमलों को तुरंत रोकने की मांग की थी।
दुनिया की नजर होर्मुज पर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो इसका असर केवल समुद्री सुरक्षा पर ही नहीं बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
दुनिया के कई देश इस क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
निष्कर्ष
भारतीय चालक दल वाले टैंकर बोकेम मरेंगो पर हुआ ड्रोन हमला एक बार फिर समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। राहत की बात यह है कि सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं, लेकिन लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने होर्मुज क्षेत्र में काम कर रहे हजारों समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। भारत भी इस मुद्दे पर लगातार नजर बनाए हुए है और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बता रहा है।

