Deepti Sharma भारतीय महिला क्रिकेट टीम की वह खिलाड़ी हैं, जिनकी अहमियत अक्सर आंकड़ों से कहीं ज्यादा होती है। पाकिस्तान के खिलाफ महिला टी20 विश्व कप 2026 के पहले मुकाबले में पांच विकेट लेकर उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि क्यों उन्हें टीम इंडिया की "Quiet Constant" कहा जाता है। मैदान पर भले ही सुर्खियां किसी और के हिस्से जाएं, लेकिन मुश्किल समय में टीम को संभालने का काम अक्सर दीप्ती शर्मा ही करती हैं।
भारतीय क्रिकेट में जब भी बड़े सितारों की चर्चा होती है, तो हरमनप्रीत कौर, स्मृति मंधाना और युवा खिलाड़ियों के नाम सबसे पहले सामने आते हैं। लेकिन पिछले एक दशक में यदि किसी खिलाड़ी ने लगातार प्रदर्शन करते हुए टीम की रीढ़ बनने का काम किया है, तो वह दीप्ती शर्मा हैं।
पूर्व पाकिस्तानी कप्तान और दिग्गज ऑलराउंडर सना मीर ने 2017 में पहली बार दीप्ती को खेलते हुए देखा था। उस समय दीप्ती केवल 19 साल की थीं। पाकिस्तान के खिलाफ उस वनडे मैच में उन्होंने 10 ओवर में सिर्फ छह रन देकर एक विकेट लिया और फिर नाबाद 29 रन बनाकर भारत को जीत दिलाई। आंकड़े भले सामान्य दिखते हों, लेकिन सना मीर को उस युवा खिलाड़ी की मैच समझ और परिपक्वता ने प्रभावित कर दिया था।
16 साल की उम्र में डेब्यू, फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा
दीप्ति शर्मा ने महज 16 साल की उम्र में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। शुरुआत से ही उनके भीतर असाधारण प्रतिभा दिखाई देती थी। लेकिन महिला क्रिकेट के तेजी से पेशेवर होते दौर में भी दीप्ती ने खुद को लगातार बेहतर बनाया और दुनिया की सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडरों में जगह बनाई।
आज उनके नाम हजारों अंतरराष्ट्रीय रन, सैकड़ों विकेट और कई मैच जिताऊ प्रदर्शन दर्ज हैं। हाल ही में वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज बनने के बेहद करीब पहुंच चुकी हैं।
हरमनप्रीत का सबसे बड़ा भरोसा
हाल ही में आयोजित बीसीसीआई अवॉर्ड्स समारोह में भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर से पूछा गया कि आखिरी ओवर फेंकने के लिए वह किस गेंदबाज पर सबसे ज्यादा भरोसा करेंगी। उनका जवाब सिर्फ एक शब्द था – "दीप्ति"।
यह जवाब सिर्फ तारीफ नहीं था, बल्कि 12 वर्षों से साथ खेल रही साथी खिलाड़ी पर जताया गया भरोसा था। भारतीय कप्तान जानती हैं कि दबाव की परिस्थितियों में दीप्ती सबसे अधिक प्रभावी साबित होती हैं।
दिलचस्प बात यह है कि दीप्ती को अक्सर उनके योगदान के अनुरूप प्रशंसा नहीं मिलती। क्रिकेट विशेषज्ञ और प्रशंसक उनकी उपयोगिता को स्वीकार तो करते हैं, लेकिन उनकी चर्चा अक्सर तभी होती है जब वह कोई असाधारण प्रदर्शन कर दें।
आलोचनाएं ज्यादा, तारीफ कम
दीप्ति शर्मा के करियर में आलोचनाओं की कमी नहीं रही है। बल्लेबाजी में धीमी शुरुआत, स्ट्राइक रोटेट करने में परेशानी और मैदान पर अपेक्षाकृत धीमी फील्डिंग को लेकर कई बार सवाल उठे हैं।
इसके अलावा बड़े टूर्नामेंटों के कुछ अहम क्षणों में भी वह आलोचना का शिकार बनीं। 2022 विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ महत्वपूर्ण मुकाबले में नो-बॉल और 2025 विश्व कप सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तेज सिंगल नहीं ले पाने की घटनाएं लंबे समय तक चर्चा में रहीं।
हालांकि इन घटनाओं के पीछे छिपे उनके लगातार योगदान पर कम ही ध्यान दिया गया।
गेंदबाजी में निरंतर विकास बना सफलता का राज
दीप्ति शर्मा उन ऑफ स्पिनरों में शामिल नहीं हैं जो गेंद को सबसे ज्यादा टर्न कराती हों या असाधारण ड्रिफ्ट हासिल करती हों। लेकिन उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी विविधता, सटीकता और मैच की परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता है।
वह पावरप्ले, मिडिल ओवर्स और डेथ ओवर्स – तीनों चरणों में प्रभावी गेंदबाजी कर सकती हैं। दाएं और बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ उनकी सफलता लगभग समान रही है।
दीप्ति अपनी गति में शानदार बदलाव करती हैं। कभी 90 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास की तेज गेंद, तो कभी 69 किलोमीटर प्रति घंटे की धीमी गेंद बल्लेबाजों को लगातार भ्रमित करती रहती है।
2022 के बाद उनकी गेंदबाजी में जबरदस्त सुधार देखने को मिला है। इस दौरान वह महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की सबसे सफल विकेट लेने वाली गेंदबाजों में शामिल रही हैं।
अनोखे अभ्यास से मिली सटीकता
दीप्ति ने खुलासा किया कि वह अभ्यास के दौरान पांच से छह अलग-अलग वजन और आकार की गेंदों का इस्तेमाल करती हैं। इनमें हल्की, भारी और छोटी गेंदें भी शामिल होती हैं।
उनका मानना है कि अलग-अलग गेंदों से एक ही स्थान पर लगातार गेंदबाजी करने का अभ्यास उन्हें बेहतर नियंत्रण और आत्मविश्वास देता है। यही कारण है कि मैच के दौरान उनकी लाइन और लेंथ बेहद सटीक रहती है।
बल्लेबाजी में भी अहम योगदान
गेंदबाजी के अलावा दीप्ती शर्मा के नाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 4000 से अधिक रन दर्ज हैं। उन्होंने ओपनर, मिडिल ऑर्डर और फिनिशर – हर भूमिका निभाई है।
उनके नाम भारतीय महिला क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े व्यक्तिगत वनडे स्कोर में से एक भी दर्ज है। हालांकि बल्लेबाजी में उनकी कुछ सीमाएं भी रही हैं। तेज रन गति से बल्लेबाजी करना और स्ट्राइक रोटेशन उनकी कमजोरियों में शामिल हैं।
इसके बावजूद वह कई मौकों पर टीम को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकाल चुकी हैं।
अभी और ऊंचाइयां बाकी हैं
महज 28 वर्ष की उम्र में दीप्ती शर्मा ने भारतीय महिला क्रिकेट में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। वह उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने भारत को एक साधारण टीम से विश्व क्रिकेट की ताकत बनने की यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पाकिस्तान के खिलाफ पांच विकेट लेकर उन्होंने एक बार फिर दिखा दिया कि वह सिर्फ एक ऑलराउंडर नहीं, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में से एक हैं।
शायद यही वजह है कि जब भी टीम इंडिया को संकट से बाहर निकालने की जरूरत पड़ती है, तो सबसे पहले नजर दीप्ती शर्मा पर ही जाती है। मैदान पर भले ही रोशनी किसी और पर हो, लेकिन भारतीय टीम की इस "Quiet Constant" की अहमियत किसी से कम नहीं है।

