अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे और दान की रकम में कथित गड़बड़ी का मामला इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा करोड़ों रुपये के चढ़ावे के गायब होने का आरोप लगाए जाने के बाद यह मामला और ज्यादा सुर्खियों में आ गया। आरोपों और पलटवारों के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
राम मंदिर में चढ़ावे और दान की राशि को लेकर स्थानीय स्तर पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, लेकिन यह मुद्दा तब राष्ट्रीय चर्चा में आया जब 7 जून को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि राम मंदिर के चढ़ावे की करोड़ों रुपये की रकम गायब पाई गई है।
अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में कहा कि यह मामला दुनिया भर के राम भक्तों की आस्था से जुड़ा हुआ है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने की मांग भी की।
इसके बाद उन्होंने एक और पोस्ट में कहा कि ट्रस्ट के सभी सदस्यों को एक साथ बैठकर चढ़ावे से जुड़े आंकड़ों का मिलान करना चाहिए और CCTV फुटेज के आधार पर पूरे मामले की जांच होनी चाहिए।
यूपी सरकार ने बनाई SIT
मामले ने तूल पकड़ने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
SIT में शामिल अधिकारी:
- आईएएस विजय विश्वास पंत
- आईपीएस किरण एस
- वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन
यह टीम अयोध्या पहुंच चुकी है और पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी।
अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने कहा है कि चढ़ावे से जुड़े सभी आरोपों की जांच की जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों को सार्वजनिक किया जाएगा।
विपक्ष को SIT पर भरोसा नहीं
समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों ने SIT जांच पर सवाल उठाए हैं।
अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने मांग की है कि मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट की निगरानी में गठित स्वतंत्र समिति से कराई जाए।
उन्होंने कहा कि यदि जांच निष्पक्ष करनी है तो पहले ट्रस्ट के सभी सदस्यों को उनके पदों से हटाया जाना चाहिए ताकि जांच प्रभावित न हो।
अवधेश प्रसाद ने इसे "प्रभु श्रीराम के मंदिर की सबसे बड़ी लूट" बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने लगाए गंभीर आरोप
समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रहे और अयोध्या के पूर्व विधायक पवन पांडेय ने दावा किया कि यह कोई नया मामला नहीं है।
उनका आरोप है कि जब से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन हुआ है, तभी से अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं।
उन्होंने कहा कि पहले भूमि खरीद से जुड़े विवाद सामने आए और बाद में चढ़ावे की रकम की कथित गड़बड़ी की शिकायतें भी हुईं, लेकिन किसी पर कार्रवाई नहीं हुई।
पवन पांडेय ने यह भी दावा किया कि मंदिर से जुड़े कुछ लोगों की संपत्ति पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है, जिसकी जांच होनी चाहिए।
पूर्व लेखा प्रभारी ने क्या कहा?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में जनवरी 2021 से मई 2022 तक लेखा प्रभारी रहे महिपाल सिंह ने भी पहले चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे।
उनका कहना था कि चढ़ावे की गिनती के दौरान उन्हें कई अनियमितताएं दिखाई दी थीं। जब उन्होंने इसकी जानकारी ट्रस्ट की साप्ताहिक बैठक में वरिष्ठ पदाधिकारियों को दी, तो जल्द ही उन्हें उस जिम्मेदारी से हटा दिया गया।
महिपाल सिंह ने एक यूट्यूब इंटरव्यू में यह भी आरोप लगाया था कि केवल नकदी ही नहीं बल्कि मंदिर में आने वाली धातुओं और अन्य दान सामग्री के प्रबंधन में भी अनियमितताएं थीं।
हालांकि हाल के दिनों में उन्होंने मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया है और दावा किया है कि उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
ट्रस्ट ने सभी आरोपों को किया खारिज
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सभी आरोपों को निराधार बताया है।
उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि मंदिर के सभी वित्तीय कार्यों का समय-समय पर ऑडिट कराया जाता है।
उनके मुताबिक:
- दान पेटियों (हुंडी) की गिनती पूरी पारदर्शिता से होती है।
- इस प्रक्रिया में ट्रस्ट के सदस्य, कार्यकर्ता और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारी शामिल होते हैं।
- पूरे रिकॉर्ड का ऑडिट नियमित रूप से किया जाता है।
- अब तक किसी भी बड़ी गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई है।
चंपत राय ने कहा कि वर्तमान में भी ऑडिट प्रक्रिया चल रही है और किसी भी स्तर पर कोई उल्लेखनीय अनियमितता सामने नहीं आई है।
भाजपा नेताओं के अलग-अलग बयान
इस पूरे विवाद के बीच भाजपा के कुछ नेताओं के बयान भी चर्चा में हैं।
राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे और बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार ने आरोपों को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि किसी ने गड़बड़ी की है तो उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए।
वहीं भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि वह इस मुद्दे पर खुलकर बोलने की स्थिति में नहीं हैं क्योंकि ट्रस्ट से जुड़े लोग बेहद प्रभावशाली हैं।
उन्होंने कहा कि समय आने पर वह सच सामने लाएंगे।
स्थानीय भाजपा नेता ने भी की जांच की मांग
अयोध्या के भाजपा नेता रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मामले की जांच सीबीआई और ईडी से कराने की मांग की है।
उन्होंने दावा किया है कि मंदिर से जुड़े कुछ लोगों की संपत्तियों में असामान्य वृद्धि हुई है और इसकी विस्तृत जांच होनी चाहिए।
भाजपा का आधिकारिक रुख
भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि समाजवादी पार्टी को राम मंदिर के मुद्दे पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं है क्योंकि पार्टी ने हमेशा राम मंदिर निर्माण का विरोध किया है।
हालांकि उन्होंने यह भी माना कि जो आरोप लगाए गए हैं वे गंभीर हैं और राम भक्तों के मन में सवाल पैदा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि SIT की जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आएगी और यदि किसी भी व्यक्ति की भूमिका गड़बड़ी में पाई जाती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब आगे क्या?
फिलहाल पूरा मामला SIT जांच के अधीन है। जांच टीम अयोध्या पहुंचकर दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड, दान पेटियों की गिनती प्रक्रिया, ऑडिट रिपोर्ट और संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज कर रही है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोपों में कितना सच है और क्या वास्तव में किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता हुई है या नहीं।
राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच को लेकर पूरे देश की नजरें अयोध्या पर टिकी हुई हैं।

