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| आयोग ने जूही शाक्य को महाराष्ट्र राज्य का स्टेट वाइस प्रेसिडेंट नियुक्त किया है। |
मुंबई, 26 जून: पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से निपटने और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में Environment Forest Climate Change Commission (EFCCC) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
आयोग ने जूही शाक्य को महाराष्ट्र राज्य का स्टेट वाइस प्रेसिडेंट नियुक्त किया है। यह नियुक्ति Department of Environment and Pollution Safety के अंतर्गत की गई है और इसका उद्देश्य राज्य में पर्यावरणीय नीतियों के बेहतर क्रियान्वयन तथा जनभागीदारी को मजबूत बनाना है।
EFCCC का कहना है कि यह नियुक्ति ऐसे समय में की गई है जब जलवायु परिवर्तन, बढ़ता प्रदूषण, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और सतत विकास जैसे मुद्दे राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं। आयोग का मानना है कि अनुभवी और सक्रिय नेतृत्व के माध्यम से महाराष्ट्र में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों को नई दिशा और गति मिलेगी।
नई जिम्मेदारी के तहत जूही शाक्य राज्यभर में पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विभिन्न योजनाओं को आगे बढ़ाने, प्रदूषण नियंत्रण उपायों को प्रोत्साहित करने, सरकारी विभागों तथा निजी संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और जागरूकता अभियान चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इसके अलावा वे विभिन्न सामाजिक संगठनों, उद्योग जगत, विशेषज्ञों तथा स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान खोजने का प्रयास करेंगी।
EFCCC के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस नियुक्ति का स्वागत करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि जूही शाक्य अपने नेतृत्व कौशल और सामाजिक अनुभव के माध्यम से आयोग के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाएंगी। अधिकारियों के अनुसार उनका योगदान राज्य में पर्यावरणीय सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण, प्रदूषण रोकथाम और जलवायु परिवर्तन से जुड़े अभियानों को नई मजबूती प्रदान करेगा।
अपनी नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए जूही शाक्य ने कहा कि यह जिम्मेदारी उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है।
उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार, उद्योग, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों के सहयोग से महाराष्ट्र में सतत विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रहे बल्कि यह जन आंदोलन का रूप ले।
विशेषज्ञों का मानना है कि आज तेजी से बढ़ते शहरीकरण, औद्योगिकीकरण और बदलते मौसम के कारण पर्यावरणीय चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे समय में प्रभावी नेतृत्व और विभिन्न पक्षों के बीच समन्वय अत्यंत आवश्यक हो जाता है। EFCCC द्वारा की गई यह नियुक्ति इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
आयोग के अनुसार आने वाले समय में महाराष्ट्र में पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम, प्रदूषण नियंत्रण अभियान, वृक्षारोपण, जैव विविधता संरक्षण, जल संरक्षण तथा सतत विकास से जुड़े कई नए कार्यक्रमों को गति दी जाएगी। इन पहलों में सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ नागरिकों की भागीदारी भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी आधारित अभियान बनाया जा सके।
EFCCC का उद्देश्य केवल नीतियां बनाना ही नहीं बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन को भी सुनिश्चित करना है। आयोग विभिन्न सरकारी संस्थानों, उद्योगों, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रम संचालित करता है। इसके माध्यम से प्रदूषण नियंत्रण, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देने का कार्य किया जाता है।
जूही शाक्य की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब देशभर में हरित विकास, स्वच्छ पर्यावरण और जलवायु अनुकूल नीतियों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। आयोग को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में महाराष्ट्र में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों का विस्तार होगा और लोगों की भागीदारी पहले की तुलना में अधिक मजबूत होगी।
Disclaimer: यह समाचार उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें व्यक्त दावे संबंधित संस्था द्वारा जारी जानकारी पर आधारित हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए आर्थिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है। यदि विकास योजनाओं के साथ पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जाए तो भविष्य में जल संकट, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसी सोच के साथ EFCCC राज्य स्तर पर विभिन्न कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रहा है।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में उद्योगों, शैक्षणिक संस्थानों, स्थानीय निकायों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर कई नई पहल शुरू की जाएंगी। इन पहलों का उद्देश्य पर्यावरण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना, हरित विकास को बढ़ावा देना और प्रदूषण नियंत्रण के लिए सामूहिक प्रयास सुनिश्चित करना होगा।
महाराष्ट्र देश के सबसे बड़े औद्योगिक और आर्थिक राज्यों में से एक है। ऐसे में यहां पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से जुड़े कार्यक्रमों का प्रभाव पूरे देश के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि उद्योगों और आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ेगी तो राज्य में स्वच्छ पर्यावरण और हरित विकास के लक्ष्य को तेजी से हासिल किया जा सकेगा।
EFCCC ने कहा कि संगठन भविष्य में भी पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से निपटने, जैव विविधता संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में विभिन्न संस्थाओं के साथ मिलकर काम करता रहेगा। आयोग का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं बल्कि व्यावहारिक स्तर पर ऐसे कार्यक्रम लागू करना भी है जिनका सीधा लाभ समाज और पर्यावरण दोनों को मिल सके।
नोट: यह समाचार उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें व्यक्त विचार एवं दावे संबंधित संस्था द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित हैं।

