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| रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने कहा कि मॉस्को इस प्रक्रिया में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। |
JanDrishti Today | इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक बातचीत के बीच Russia US-Iran Deal को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। रूस ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता तय हो जाता है तो वह United Nations Security Council (UNSC) में इस समझौते को मंजूरी देने वाले प्रस्ताव का समर्थन करेगा।
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने कहा कि मॉस्को इस प्रक्रिया में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच तकनीकी स्तर की वार्ता पूरी हो चुकी है और अगले 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते का मसौदा तैयार करने की दिशा में काम जारी है।
रूस ने क्या कहा?
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने गुरुवार को आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हस्ताक्षरित 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के तीसरे पैराग्राफ के तहत दोनों देशों को अंतिम समझौता तैयार करने के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है। यदि दोनों पक्ष सहमत हों तो इस समय सीमा को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
UNSC में प्रस्ताव होगा पेश
ज़खारोवा ने बताया कि MoU के 14वें पैराग्राफ के अनुसार अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के माध्यम से मंजूरी दी जाएगी। यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों के लिए बाध्यकारी होगा। रूस का कहना है कि जैसे ही अमेरिका और ईरान अंतिम दस्तावेज पर सहमति दर्ज करेंगे, मॉस्को सुरक्षा परिषद में संबंधित प्रस्ताव पर रचनात्मक तरीके से चर्चा में भाग लेगा।
60 दिनों में तैयार होगा अंतिम समझौता
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में स्विट्जरलैंड में तकनीकी स्तर की पहली बैठक हुई थी। इस बैठक के बाद दोनों देशों ने एक हाई लेवल कमेटी बनाने और 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते का रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई। जरूरत पड़ने पर समय सीमा को दोनों देशों की आपसी सहमति से बढ़ाया भी जा सकता है।
क्या है समझौते का उद्देश्य?
यह समझौता पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव और सैन्य टकराव को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि दोनों देश अंतिम समझौते पर पहुंचते हैं तो इससे क्षेत्रीय स्थिरता मजबूत हो सकती है और भविष्य में कूटनीतिक संबंधों को नई दिशा मिल सकती है।
रूस की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के रूप में रूस की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। किसी भी महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव को पारित कराने में रूस की सहमति आवश्यक होती है। ऐसे में मॉस्को का यह बयान संकेत देता है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम सहमति बनती है तो वैश्विक स्तर पर उसे मंजूरी मिलने की संभावना मजबूत हो सकती है।
स्विट्जरलैंड में हुई तकनीकी वार्ता
स्विट्जरलैंड में आयोजित शुरुआती तकनीकी वार्ता के दौरान दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने एक साझा रोडमैप तैयार करने और उच्च स्तरीय समिति के गठन पर सहमति व्यक्त की। आने वाले हफ्तों में इसी समिति की बैठकों के आधार पर अंतिम दस्तावेज तैयार किया जाएगा।
आगे क्या होगा?
अब पूरी दुनिया की नजर अगले 60 दिनों पर रहेगी। यदि अमेरिका और ईरान तय समय के भीतर अंतिम समझौते पर पहुंच जाते हैं तो इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पेश किया जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव पारित होने की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें रूस सहित सभी स्थायी सदस्य देशों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।
निष्कर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित ऐतिहासिक समझौते को लेकर रूस का सकारात्मक रुख वैश्विक कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। हालांकि अंतिम फैसला दोनों देशों के बीच होने वाली सहमति पर निर्भर करेगा, लेकिन रूस ने स्पष्ट कर दिया है कि समझौता होने की स्थिति में वह UNSC में प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया में रचनात्मक सहयोग देगा। आने वाले दो महीने इस पूरी प्रक्रिया के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

