पिछले कुछ महीनों में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अब सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना सात महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है, जबकि चांदी की कीमत भी जनवरी के मुकाबले लगभग आधी रह गई है। आमतौर पर जब सोने और चांदी के दाम गिरते हैं तो बाजार में खरीदारी बढ़ जाती है, लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है। कीमतों में भारी गिरावट के बावजूद ज्वेलरी बाजार में ग्राहकों की भीड़ नहीं है और कारोबारियों का कहना है कि बिक्री उम्मीद से काफी कम बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार केवल कीमतों में गिरावट ही बाजार को प्रभावित नहीं कर रही, बल्कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर बढ़ती आशंकाएं, डॉलर की मजबूती और भारत में आयात शुल्क जैसी कई वजहें भी सोने और चांदी की मांग पर असर डाल रही हैं।
ईरान-अमेरिका तनाव कम होने के बाद बदला माहौल
हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच अस्थायी युद्धविराम की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में जोखिम का स्तर कम हुआ। इससे निवेशकों ने सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी से दूरी बनानी शुरू कर दी। जब दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा था तब निवेशकों ने बड़ी मात्रा में सोना खरीदा था, जिससे इसकी कीमत रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी।
अब युद्धविराम की घोषणा के बाद निवेशकों का भरोसा शेयर बाजार और अन्य निवेश विकल्पों की ओर लौटने लगा है। इसका सीधा असर बुलियन मार्केट पर पड़ा और सोने तथा चांदी दोनों की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिली।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई बड़ी गिरावट
बाजार के आंकड़ों के अनुसार जनवरी के अंत तक 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग 2 लाख रुपये तक पहुंच गई थी। वहीं एक किलोग्राम चांदी की कीमत 4 लाख रुपये से अधिक हो गई थी। लेकिन अब सोने की कीमत करीब 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी लगभग 2.15 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच चुकी है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमत प्रति औंस 4,000 डॉलर से नीचे आ गई है। केवल एक ही कारोबारी सत्र में सोने की कीमत में 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जिसे पिछले कई महीनों की सबसे बड़ी गिरावट माना जा रहा है।
डॉलर की मजबूती ने बढ़ाया दबाव
कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है। जब डॉलर मजबूत होता है तो दूसरी मुद्राओं वाले देशों के लिए सोना खरीदना महंगा पड़ता है। इसका असर वैश्विक मांग पर पड़ता है और कीमतों में कमजोरी देखने को मिलती है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के संकेत मिलने के बाद निवेशकों ने सोने और चांदी से पैसा निकालकर डॉलर आधारित निवेशों और सरकारी बॉन्ड की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। यही कारण है कि बुलियन बाजार पर लगातार दबाव बना हुआ है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
कमोडिटी मार्केट विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका में महंगाई अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। ऐसे में अमेरिकी केंद्रीय बैंक आने वाले महीनों में ब्याज दरों में एक या दो बार और बढ़ोतरी कर सकता है। यदि ऐसा होता है तो सोने और चांदी की कीमतों पर आगे भी दबाव बना रह सकता है। हालांकि यदि वैश्विक तनाव दोबारा बढ़ता है या आर्थिक अनिश्चितता पैदा होती है तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग फिर से बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि निवेशकों को केवल कीमतों में गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला नहीं लेना चाहिए, बल्कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और ब्याज दरों की दिशा पर भी नजर रखनी चाहिए।
ज्वेलरी कारोबारियों की बढ़ी चिंता
सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के बावजूद देशभर के ज्वेलरी कारोबारियों को उम्मीद के मुताबिक कारोबार नहीं मिल रहा है। अहमदाबाद, मुंबई, दिल्ली, जयपुर और लखनऊ जैसे बड़े बाजारों के व्यापारियों का कहना है कि ग्राहक अभी केवल कीमतों पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन खरीदारी का फैसला नहीं ले रहे। इससे खुदरा बाजार में कारोबार सुस्त बना हुआ है।
व्यापारियों का कहना है कि आमतौर पर जब सोना सस्ता होता है तो निवेशक और ग्राहक दोनों बाजार में लौट आते हैं, लेकिन इस बार आर्थिक परिस्थितियां अलग हैं। लोगों की प्राथमिकताएं बदल चुकी हैं और वे फिलहाल केवल जरूरी खर्चों पर ही पैसा खर्च करना चाहते हैं।
महंगाई और घरेलू खर्च बना बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार स्कूलों का नया सत्र शुरू होने के कारण अधिकांश परिवारों का बजट बच्चों की फीस, किताबों, यूनिफॉर्म और अन्य जरूरी खर्चों में लग रहा है। इसके अलावा घरेलू महंगाई का असर भी लोगों की बचत पर पड़ा है। ऐसे में सोना खरीदने का फैसला लोग फिलहाल टाल रहे हैं।
यही कारण है कि कीमतें कम होने के बावजूद ज्वेलरी शोरूम में पहले जैसी रौनक दिखाई नहीं दे रही। कई दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक केवल भाव पूछकर लौट जा रहे हैं और खरीदारी बाद में करने की बात कह रहे हैं।
आयात शुल्क और जीएसटी ने बढ़ाई मुश्किल
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना सस्ता होने के बावजूद भारत में आयात शुल्क और 3 प्रतिशत जीएसटी की वजह से ग्राहकों को अपेक्षित राहत नहीं मिल रही है। आयात शुल्क बढ़ने के बाद ज्वेलरी उद्योग की लागत भी बढ़ी है, जिसका असर खुदरा बिक्री पर साफ दिखाई दे रहा है।
छोटे ज्वेलर्स का कहना है कि नए ऑर्डर पहले की तुलना में काफी कम मिले हैं। कई छोटे निर्माता सीमित उत्पादन कर रहे हैं क्योंकि मांग में अपेक्षित तेजी नहीं आई है।
चांदी की मांग भी कमजोर
सोने के साथ-साथ चांदी की खरीदारी भी कमजोर बनी हुई है। पिछले कुछ महीनों में चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है, लेकिन इसके बावजूद निवेशकों और खुदरा ग्राहकों की दिलचस्पी सीमित है। औद्योगिक मांग में कमी और निवेशकों की बिकवाली का असर भी चांदी के बाजार पर दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में तेजी आती है तो चांदी की औद्योगिक मांग फिर बढ़ सकती है, जिससे इसकी कीमतों में सुधार देखने को मिल सकता है।
क्या आने वाले महीनों में बढ़ेगी खरीदारी?
ज्वेलरी कारोबारियों को उम्मीद है कि अगस्त से शुरू होने वाला त्योहारों और शादी-ब्याह का सीजन बाजार में नई जान फूंक सकता है। रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेश उत्सव, नवरात्रि, धनतेरस और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान सोने और चांदी की खरीदारी पारंपरिक रूप से बढ़ जाती है। यदि कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं तो त्योहारी सीजन में बाजार में अच्छी मांग देखने को मिल सकती है।
क्या निवेशकों के लिए यह सही अवसर है?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर साबित हो सकती है। हालांकि निवेशकों को एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करने की सलाह दी जा रही है। इससे बाजार में आगे होने वाले उतार-चढ़ाव का जोखिम कम किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले महीनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है तो सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव कुछ समय और बना रह सकता है। वहीं यदि वैश्विक आर्थिक स्थिति कमजोर होती है या किसी नए भू-राजनीतिक तनाव की शुरुआत होती है तो निवेशक फिर से सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर लौट सकते हैं।
त्योहारी सीजन से बाजार को उम्मीद
ज्वेलरी कारोबारियों को उम्मीद है कि अगस्त से शुरू होने वाला त्योहारों और शादी-ब्याह का सीजन बाजार में नई रौनक लेकर आएगा। रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, धनतेरस और दिवाली जैसे अवसरों पर भारत में पारंपरिक रूप से सोने और चांदी की खरीदारी बढ़ जाती है।
यदि कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं तो त्योहारी सीजन के दौरान खुदरा बाजार में अच्छी मांग देखने को मिल सकती है। हालांकि व्यापारियों का कहना है कि फिलहाल ग्राहकों की ओर से एडवांस बुकिंग अपेक्षा से काफी कम है।
सोना खरीदने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?
- केवल कीमत गिरने के आधार पर निवेश का फैसला न लें।
- हमेशा BIS हॉलमार्क वाला सोना ही खरीदें।
- सोने के साथ मेकिंग चार्ज और जीएसटी की भी तुलना करें।
- लंबी अवधि के निवेश के लिए चरणबद्ध खरीदारी बेहतर रणनीति हो सकती है।
- यदि निवेश का उद्देश्य केवल रिटर्न है तो Gold ETF और Sovereign Gold Bond जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।
निष्कर्ष
सोने और चांदी की कीमतों में हालिया गिरावट ने निवेशकों और ग्राहकों का ध्यान जरूर आकर्षित किया है, लेकिन बाजार में खरीदारी अभी भी उम्मीद से काफी कम बनी हुई है। इसकी सबसे बड़ी वजह वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, अमेरिकी ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी, डॉलर की मजबूती, घरेलू आयात शुल्क और आम लोगों के बढ़ते खर्च हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले बुलियन बाजार की दिशा तय करेंगे। वहीं भारत में त्योहारों और शादी के सीजन के दौरान यदि कीमतें स्थिर रहती हैं तो सोने और चांदी की मांग में एक बार फिर तेजी देखने को मिल सकती है। निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे बेहतर रणनीति यही होगी कि वे बाजार की चाल पर नजर रखते हुए सोच-समझकर और चरणबद्ध तरीके से निवेश करें।

