नई दिल्ली: देश के कई मैदानी इलाकों में मानसून की बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिलनी शुरू हो गई है, लेकिन पहाड़ी राज्यों में यही मानसून बड़ी परेशानी बन गया है। पिछले 48 घंटों से हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कई हिस्सों में लगातार भारी बारिश हो रही है। इस वजह से कई जगहों पर भूस्खलन, नदियों का जलस्तर बढ़ने, सड़कें बंद होने और यात्रा प्रभावित होने जैसी घटनाएं सामने आई हैं।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दोनों राज्यों के कई जिलों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों से अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रह सकता है, इसलिए प्रशासन और राहत एजेंसियों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
हिमाचल प्रदेश में लगातार बारिश से बिगड़े हालात
हिमाचल प्रदेश के शिमला, मंडी, कुल्लू, कांगड़ा और चंबा जिलों में लगातार हो रही बारिश का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। कई इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं, जिससे सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। पहाड़ों से लगातार मलबा और पत्थर गिरने के कारण लोगों की आवाजाही भी मुश्किल हो गई है।
राज्य में बहने वाली प्रमुख नदियां भी लगातार बढ़ते जलस्तर की वजह से चिंता का कारण बनी हुई हैं। कुल्लू और मंडी क्षेत्र से गुजरने वाली ब्यास नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। वहीं सतलुज नदी के किनारे रहने वाले लोगों को प्रशासन ने सतर्क रहने की सलाह दी है। पंडोह बांध से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के बाद निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं।
चंडीगढ़-मनाली और कालका-शिमला हाईवे पर असर
लगातार बारिश के कारण प्रदेश के कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग प्रभावित हुए हैं। चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-21) पर मंडी के पास भारी भूस्खलन होने से सड़क पर मलबा जमा हो गया, जिसके कारण यातायात रोकना पड़ा। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा।
इसी तरह कालका-शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-5) पर भी सोलन क्षेत्र के पास चट्टानें गिरने से आवाजाही प्रभावित हुई। लोक निर्माण विभाग की टीमें लगातार मलबा हटाने के काम में लगी हुई हैं ताकि यातायात जल्द सामान्य किया जा सके।
शिमला में भी दिखा बारिश का असर
राजधानी शिमला में भी लगातार बारिश के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। माल रोड के आसपास और शहर के कुछ हिस्सों में पानी जमा होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग ने शिमला और सिरमौर जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।
प्रशासन ने पर्यटकों से भी अपील की है कि मौसम सामान्य होने तक पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करते समय पूरी सावधानी बरतें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें।
उत्तराखंड में लगातार बारिश से चारधाम यात्रा पर असर
उत्तराखंड में भी मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। पिछले दो दिनों से रुक-रुककर हो रही भारी बारिश ने राज्य के कई जिलों में जनजीवन प्रभावित कर दिया है। खासकर रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, बागेश्वर और देहरादून जिलों में भूस्खलन और सड़क बंद होने की कई घटनाएं सामने आई हैं।
लगातार बारिश को देखते हुए प्रशासन ने चारधाम यात्रा पर विशेष निगरानी शुरू कर दी है। केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जाने वाले श्रद्धालुओं से मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही आगे बढ़ने की अपील की गई है। कई संवेदनशील स्थानों पर यात्रियों को अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थानों पर रोका गया है ताकि किसी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके।
बद्रीनाथ और केदारनाथ मार्ग पर भूस्खलन
बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिरोबगड़ और आसपास के इलाकों में लगातार पहाड़ी से मलबा गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। सड़क पर भारी मात्रा में पत्थर और मिट्टी आने के कारण कई बार यातायात रोकना पड़ा। सीमा सड़क संगठन (BRO) और लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीमें लगातार रास्ता साफ करने में जुटी हुई हैं।
केदारनाथ यात्रा मार्ग पर भी बारिश के कारण कई स्थानों पर छोटे-छोटे भूस्खलन हुए हैं। प्रशासन ने यात्रियों को निर्धारित समय और सुरक्षित मार्ग का पालन करने की सलाह दी है।
गंगा, अलकनंदा और शारदा नदी का बढ़ा जलस्तर
लगातार बारिश का असर राज्य की प्रमुख नदियों पर भी देखने को मिल रहा है। हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। वहीं अलकनंदा, मंदाकिनी, भागीरथी और शारदा नदी में भी पानी सामान्य से अधिक बह रहा है।
जल संसाधन विभाग ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से नदी के पास न जाने की अपील की है। प्रशासन लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
देहरादून और मसूरी में भारी बारिश
राजधानी देहरादून में पिछले 24 घंटों के दौरान अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मसूरी सहित आसपास के पर्यटन स्थलों पर भी लगातार बारिश जारी है। कई स्थानों पर जलभराव और पहाड़ी रास्तों पर फिसलन बढ़ने से पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 से 72 घंटों के दौरान देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल और चंपावत समेत कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। इसी वजह से प्रशासन ने लोगों से पहाड़ी इलाकों की अनावश्यक यात्रा टालने की अपील की है।
मौसम वैज्ञानिकों ने बताई भारी बारिश की वजह
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस समय बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी वाली मानसूनी हवाएं और उत्तर-पश्चिम दिशा से सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) एक साथ प्रभाव दिखा रहे हैं। दोनों सिस्टम के मिलने से हिमालयी क्षेत्रों में बादलों का तेजी से विकास हो रहा है और कम समय में अत्यधिक बारिश देखने को मिल रही है।
पहाड़ी इलाकों की भौगोलिक संरचना के कारण नमी से भरे बादल पहाड़ों से टकराकर एक ही क्षेत्र में लगातार बारिश करते हैं। यही कारण है कि कई जगहों पर फ्लैश फ्लड और भूस्खलन जैसी घटनाओं का खतरा काफी बढ़ जाता है।
सरकार और SDRF की टीमें पूरी तरह अलर्ट
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड दोनों राज्यों की सरकारों ने हालात को देखते हुए आपदा प्रबंधन एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), पुलिस, लोक निर्माण विभाग (PWD), सीमा सड़क संगठन (BRO) और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
जहां-जहां भूस्खलन के कारण सड़कें बंद हुई हैं, वहां जेसीबी मशीनों और भारी उपकरणों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। कई इलाकों में बिजली और संचार सेवाएं प्रभावित होने के बाद उन्हें भी तेजी से बहाल करने का काम जारी है।
राज्य सरकारों ने सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि संवेदनशील गांवों पर लगातार नजर रखी जाए और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर तुरंत पहुंचाया जाए।
पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए जारी हुई एडवाइजरी
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और राज्य प्रशासन ने लोगों से मौसम को गंभीरता से लेने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।
- नदी, नालों और झरनों के आसपास जाने से बचें।
- भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में वाहन रोककर खड़े न हों।
- मौसम साफ होने तक चारधाम यात्रा या अन्य पहाड़ी यात्राओं को टाल दें।
- मौसम विभाग और जिला प्रशासन की आधिकारिक एडवाइजरी का ही पालन करें।
- भारी बारिश के दौरान बिजली के खंभों, ढीले तारों और कमजोर ढांचों से दूरी बनाए रखें।
अगले 72 घंटे क्यों हैं सबसे अहम?
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले तीन दिनों तक हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। खासकर ऊंचाई वाले जिलों में भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और सड़क बाधित होने की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि पश्चिमी विक्षोभ और मानसूनी हवाओं का असर इसी तरह बना रहा, तो जुलाई के पहले सप्ताह में भी पहाड़ी राज्यों में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।
निष्कर्ष
दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जहां मानसून लोगों को भीषण गर्मी से राहत दे रहा है, वहीं हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में यही मानसून बड़ी चुनौती बन गया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश, भूस्खलन, उफनती नदियां और बंद राष्ट्रीय राजमार्ग प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा बन चुके हैं।
यदि आप आने वाले दिनों में हिमाचल प्रदेश या उत्तराखंड की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले IMD और स्थानीय प्रशासन की ताजा मौसम चेतावनी जरूर देखें। पहाड़ों में इस समय छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। मौसम और चारधाम यात्रा से जुड़ी हर बड़ी अपडेट के लिए जनदृष्टि टुडे (JanDrishti Today) के साथ जुड़े रहें।

