भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता ने रचा इतिहास, FY 2025-26 में ₹1.78 लाख करोड़ का रिकॉर्ड; राजनाथ सिंह ने बताया आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि

Praveen Yadav
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नई दिल्ली: भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल रक्षा उत्पादन (Defence Production) बढ़कर रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 15.6 प्रतिशत अधिक है और वर्ष 2020-21 के मुकाबले 110 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि को दर्शाता है।

नई दिल्ली: भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल रक्षा उत्पादन (Defence Production) बढ़कर रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 15.6 प्रतिशत अधिक है और वर्ष 2020-21 के मुकाबले 110 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि को दर्शाता है।

रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलाए जा रहे आत्मनिर्भर भारत (Aatmanirbhar Bharat) अभियान और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने वाली नीतियों का परिणाम है।

राजनाथ सिंह ने जताई खुशी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता हर साल नई ऊंचाइयों को छू रही है।

उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन का आंकड़ा ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंचना देश की बढ़ती औद्योगिक क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रमाण है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्ष 2020-21 में जहां रक्षा उत्पादन ₹84,643 करोड़ था, वहीं अब यह दोगुने से भी अधिक बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ हो गया है। वहीं 2013-14 में स्वदेशी रक्षा उत्पादन का स्तर केवल ₹43,746 करोड़ था, जो अब लगभग चार गुना बढ़ चुका है।

रक्षा उत्पादन में सार्वजनिक क्षेत्र का दबदबा

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, कुल रक्षा उत्पादन में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (DPSUs) और अन्य सरकारी इकाइयों का योगदान लगभग 76 प्रतिशत रहा।

हालांकि निजी क्षेत्र की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में निजी कंपनियों का योगदान बढ़कर 24 प्रतिशत पहुंच गया, जो पिछले वर्ष 22 प्रतिशत था।

निजी क्षेत्र द्वारा किया गया रक्षा उत्पादन लगभग ₹42,000 करोड़ तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इससे स्पष्ट है कि भारत का निजी रक्षा उद्योग तेजी से मजबूत हो रहा है।

रक्षा निर्यात ने भी बनाया नया रिकॉर्ड

रक्षा उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ भारत के रक्षा निर्यात में भी ऐतिहासिक उछाल देखने को मिला है।

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ दर्ज किया गया, जो देश के इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा निर्यात आंकड़ा है।

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने मिसाइल सिस्टम, रडार, आर्टिलरी उपकरण, नौसैनिक प्लेटफॉर्म, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सैन्य उपकरणों के निर्यात में उल्लेखनीय प्रगति की है।

आत्मनिर्भर भारत अभियान का असर

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार द्वारा लागू की गई कई नीतियों ने रक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। इनमें शामिल हैं:

- स्वदेशी रक्षा खरीद को प्राथमिकता
- रक्षा क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा
- विदेशी कंपनियों के साथ तकनीकी साझेदारी
- रक्षा कॉरिडोर का विकास
- मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान
- रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने वाली नीतियां

इन पहलों के कारण भारत धीरे-धीरे दुनिया के सबसे बड़े रक्षा आयातकों में से एक देश से रक्षा उत्पादों के प्रमुख निर्माता और निर्यातक के रूप में उभर रहा है।

भविष्य में और तेज होगी वृद्धि

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा उत्पादन में लगातार हो रही वृद्धि देश के मजबूत होते रक्षा औद्योगिक आधार का संकेत है।

उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार की नीतिगत सहायता, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी, नई तकनीकों में निवेश और बढ़ते निर्यात अवसरों के चलते आने वाले वर्षों में भारत का रक्षा उत्पादन और अधिक गति से बढ़ेगा।

भारत का रक्षा क्षेत्र वैश्विक मंच पर मजबूत

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अब केवल अपनी सैन्य जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

रिकॉर्ड रक्षा उत्पादन और निर्यात के ये आंकड़े बताते हैं कि भारत का लक्ष्य केवल आत्मनिर्भर बनना नहीं, बल्कि दुनिया के प्रमुख रक्षा निर्माण केंद्रों में शामिल होना भी है।

वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़े इस दिशा में भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माने जा रहे हैं।

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