यरुशलम: इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। इजरायली सेना ने शुक्रवार को दावा किया कि उसने रातभर दक्षिणी लेबनान में कई ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए। वहीं, हिज्बुल्लाह ने भी इलाके में भीषण लड़ाई की पुष्टि की है। इस नए तनाव ने हाल ही में हुए अमेरिका-ईरान समझौते पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस बीच, स्विट्जरलैंड में शुक्रवार को होने वाली अमेरिका और ईरान की महत्वपूर्ण वार्ता भी स्थगित कर दी गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बैठक में शामिल होने वाले थे, लेकिन क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के चलते बातचीत को फिलहाल टाल दिया गया।
अमेरिका-ईरान वार्ता पर पड़ा असर
क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, मध्यस्थ अब वार्ता की नई तारीख तय करने की कोशिश कर रहे हैं। यह बैठक ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही थी।
हालांकि लेबनान में जारी संघर्ष ने इस प्रक्रिया को मुश्किल बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि क्या दोनों पक्ष जल्द ही दोबारा बातचीत की मेज पर लौट पाएंगे।
लेबनान में बढ़ा मौत का आंकड़ा
लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी ने बताया कि इजरायली हवाई हमलों में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई है। कई अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं।
इजरायली सेना ने कहा कि उसके अभियान अभी भी जारी हैं और दक्षिणी लेबनान के अलावा पूर्वी बेका घाटी क्षेत्र में भी कई ठिकानों को निशाना बनाया गया है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, डौरिस गांव पर भी हमला किया गया।
इजरायल के चार सैनिक भी मारे गए
इजरायल ने भी अपने चार सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि की है। मृतकों में एक लेफ्टिनेंट कर्नल भी शामिल हैं।
इसके अलावा विस्फोटकों से लैस ड्रोन हमले में पांच अन्य सैनिक घायल हुए हैं। इजरायली सेना के मुताबिक दक्षिणी लेबनान में जमीनी लड़ाई बेहद तीव्र हो चुकी है।
समझौते पर मंडरा रहा खतरा
हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते में सभी मोर्चों पर तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने की बात कही गई थी। इस समझौते में विशेष रूप से लेबनान का भी उल्लेख था, जहां इजरायल और ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के बीच लंबे समय से संघर्ष जारी है।
समझौते में लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया था। लेकिन मौजूदा घटनाक्रम से यह समझौता खतरे में पड़ता नजर आ रहा है।
क्षेत्र में बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लेबनान में लड़ाई इसी तरह जारी रही तो अमेरिका-ईरान समझौता कमजोर पड़ सकता है और पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ सकती है।
फिलहाल सभी पक्षों की नजर कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि युद्धविराम और शांति प्रक्रिया आगे बढ़ती है या क्षेत्र एक बार फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता है।

