कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को लगातार झटके लग रहे हैं। पार्टी के कई सांसद, विधायक और वरिष्ठ नेता संगठन छोड़ चुके हैं, जिससे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व और पार्टी के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने एक विशेष इंटरव्यू में पार्टी के सामने खड़ी चुनौतियों, नेताओं के पलायन, अभिषेक बनर्जी की भूमिका और भाजपा के बढ़ते प्रभाव पर खुलकर अपनी बात रखी।
सबसे अधिक चर्चा महुआ मोइत्रा के उस बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने टीएमसी छोड़कर भाजपा में गए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि शुभेंदु अधिकारी ने पार्टी छोड़ते समय कम से कम ईमानदारी दिखाई और अपने राजनीतिक मतभेदों को खुलकर सामने रखा।
टीएमसी छोड़ने वालों पर महुआ का हमला, कहा- अवसरवादियों की पहचान हुई
महुआ मोइत्रा ने कहा कि टीएमसी से बड़ी संख्या में नेताओं के जाने को लेकर पार्टी नेतृत्व को इस स्तर के संकट की उम्मीद नहीं थी। हालांकि उन्होंने दावा किया कि यह जनसमर्थन में कमी नहीं बल्कि कुछ नेताओं के अवसरवाद का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में भाजपा और टीएमसी के वोट प्रतिशत में बहुत बड़ा अंतर नहीं था। भाजपा को लगभग 45 प्रतिशत वोट मिले जबकि टीएमसी को करीब 41 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए। ऐसे में यह कहना गलत होगा कि पूरा जनमत भाजपा के पक्ष में चला गया है।
महुआ ने कहा कि पार्टी छोड़ने वाले अधिकांश नेता व्यक्तिगत लाभ और राजनीतिक महत्वाकांक्षा के कारण ऐसा कर रहे हैं। उनके अनुसार, जिन नेताओं ने टीएमसी के मंच और चुनाव चिह्न के सहारे पहचान बनाई, उनमें से अधिकांश अपने दम पर चुनाव जीतने की स्थिति में नहीं हैं।
भाजपा पर लगाया दबाव और लालच का आरोप
टीएमसी सांसद ने आरोप लगाया कि भाजपा क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने के लिए लगातार दबाव, जांच एजेंसियों और राजनीतिक प्रलोभनों का इस्तेमाल कर रही है।
उन्होंने कहा कि भाजपा को यह एहसास है कि भविष्य में उसके लिए सत्ता में बने रहना आसान नहीं होगा। इसी कारण विपक्षी दलों को कमजोर करने और राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
महुआ के मुताबिक भाजपा दो तरीकों से काम कर रही है—पहला लालच देकर और दूसरा डर दिखाकर। उन्होंने कहा कि कई नेता इन दोनों रणनीतियों के कारण पार्टी छोड़ रहे हैं।
ममता बनर्जी की सबसे बड़ी ताकत ही उनकी कमजोरी?
इंटरव्यू के दौरान महुआ मोइत्रा ने ममता बनर्जी के नेतृत्व पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ी कमजोरी एक ही है—उनका भावनात्मक स्वभाव।
महुआ ने कहा कि ममता बनर्जी बेहद नरम दिल की नेता हैं। वे अपने सहयोगियों के साथ व्यक्तिगत संबंध बनाकर रखती हैं और आसानी से किसी को संगठन से बाहर नहीं करतीं। यही कारण है कि कई नेता वर्षों तक पार्टी में बने रहते हैं, भले ही उनका जनाधार कमजोर हो चुका हो।
उन्होंने भाजपा की कार्यशैली का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां नेतृत्व राजनीतिक रूप से अधिक कठोर है। पार्टी जरूरत पड़ने पर वरिष्ठ नेताओं को भी किनारे कर देती है, जबकि टीएमसी में ऐसा नहीं होता।
महुआ ने माना कि यदि समय-समय पर नेताओं के प्रदर्शन की समीक्षा कर कठोर फैसले लिए जाते, तो शायद आज पार्टी को इतनी बड़ी टूट का सामना नहीं करना पड़ता।
अभिषेक बनर्जी पर उठ रहे सवालों पर क्या बोलीं महुआ?
पार्टी छोड़ने वाले कई नेताओं ने टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए महुआ मोइत्रा ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल में नेतृत्व पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं भी कई मुद्दों पर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से अलग राय रखी है और उस पर चर्चा की है। लेकिन यदि किसी नेता को गंभीर आपत्ति थी तो उसे पार्टी मंच पर अपनी बात रखनी चाहिए थी।
महुआ ने कहा कि पार्टी छोड़ने वाले कई नेता कभी अभिषेक बनर्जी के सबसे करीबी माने जाते थे। ऐसे में आज अचानक उन्हें अभिषेक से समस्या होने का दावा करना राजनीतिक सुविधा के अलावा कुछ नहीं लगता।
शुभेंदु अधिकारी की तारीफ कर चौंकाया
इंटरव्यू का सबसे चर्चित हिस्सा वह रहा जब महुआ मोइत्रा ने भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी की तारीफ की।
उन्होंने कहा कि शुभेंदु अधिकारी ने जब महसूस किया कि पार्टी में भविष्य में नेतृत्व की कमान उनके हाथ में नहीं आएगी, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से अपनी असहमति जताई और पार्टी छोड़ दी।
महुआ ने कहा कि शुभेंदु ने अपने मतभेदों को छिपाया नहीं और खुलकर कहा कि वे भाजपा में जा रहे हैं। उनके अनुसार यह एक सम्मानजनक राजनीतिक निर्णय था।
उन्होंने यह भी बताया कि शुभेंदु अधिकारी के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध कभी काफी अच्छे रहे हैं। महुआ ने याद किया कि राजनीतिक जीवन के शुरुआती दिनों में शुभेंदु ने उन्हें काफी समर्थन दिया था और कठिन समय में उनका हौसला बढ़ाया था।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि आज दोनों अलग-अलग राजनीतिक दलों में हैं और वैचारिक रूप से विरोधी पक्ष में खड़े हैं।
सायोनी घोष के पार्टी छोड़ने पर जताई हैरानी
महुआ मोइत्रा ने टीएमसी छोड़ने वाले नेताओं में सबसे अधिक आश्चर्य अभिनेत्री और नेता सायोनी घोष के फैसले पर जताया।
उन्होंने कहा कि सायोनी घोष को पार्टी ने बहुत कम समय में बड़ी जिम्मेदारियां दी थीं। उन्हें विधायक बनाया गया, युवा संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया और महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर दिए गए।
महुआ ने कहा कि ऐसे में उनका पार्टी छोड़ना कई कार्यकर्ताओं के लिए हैरानी की बात है।
कांग्रेस में विलय की अटकलों को किया खारिज
हाल के दिनों में टीएमसी और कांग्रेस के संभावित विलय की चर्चाएं भी राजनीतिक गलियारों में तेज रही हैं। इस पर महुआ मोइत्रा ने साफ कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव कभी नहीं रहा।
उन्होंने कहा कि न ममता बनर्जी, न अभिषेक बनर्जी और न ही कांग्रेस नेतृत्व ने कभी किसी विलय की बात कही है। उनके अनुसार यह केवल राजनीतिक अफवाह है।
महुआ ने कहा कि टीएमसी और कांग्रेस दोनों भाजपा विरोधी दल हैं और भविष्य में चुनावी सहयोग संभव है, लेकिन इसका मतलब विलय नहीं है।
फिरहाद हाकिम और अन्य नेताओं के जाने पर प्रतिक्रिया
टीएमसी के वरिष्ठ नेता फिरहाद हाकिम सहित कई नेताओं के फैसलों पर टिप्पणी करते हुए महुआ ने कहा कि किसी नेता के पार्टी छोड़ने के पीछे वास्तविक कारण वही बता सकता है।
उन्होंने कहा कि राजनीति में दलबदल के पीछे आमतौर पर दो कारण होते हैं—लालच या डर। कौन किस कारण से गया, इसका जवाब संबंधित नेता ही दे सकते हैं।
महुआ ने दावा किया कि किसी ने भी वैचारिक कारणों से पार्टी नहीं छोड़ी है।
आईपैक की भूमिका पर भी बोलीं महुआ
चुनावी रणनीतिकार संस्था आईपैक की भूमिका को लेकर भी लंबे समय से टीएमसी में चर्चा रही है। महुआ ने माना कि आधुनिक चुनावों में डेटा और रणनीति महत्वपूर्ण हैं, लेकिन स्थानीय नेतृत्व और कार्यकर्ताओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि जहां नेताओं को अपने क्षेत्र की बुनियादी राजनीतिक जानकारी तक नहीं होती, वहां पेशेवर चुनावी प्रबंधन संस्थाओं की जरूरत पड़ती है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इस बात पर चर्चा हो सकती है कि आईपैक को कितना प्रभाव दिया जाना चाहिए।
क्या कभी भाजपा में शामिल होंगी महुआ मोइत्रा?
इंटरव्यू के अंत में जब उनसे पूछा गया कि क्या भविष्य में वे भाजपा में शामिल हो सकती हैं, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में इनकार कर दिया।
महुआ ने कहा कि उन्होंने राजनीति में आने का फैसला एक विशेष विचारधारा के लिए किया था। उनका मानना है कि भारत की ताकत उसकी विविधता और धर्मनिरपेक्षता में है।
उन्होंने कहा कि जब तक वे राजनीति में सक्रिय रहेंगी, तब तक भाजपा की विचारधारा का विरोध करती रहेंगी और खुद को उसके खिलाफ राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा मानती रहेंगी।
टीएमसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट रखना और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखना है।
हालांकि महुआ मोइत्रा का दावा है कि पार्टी का जमीनी आधार अब भी मजबूत है, लेकिन लगातार हो रहे दलबदल से यह स्पष्ट है कि टीएमसी को संगठनात्मक स्तर पर गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता है।
आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी इस राजनीतिक संकट से पार्टी को किस तरह बाहर निकालते हैं और क्या टीएमसी अपने खोए हुए नेताओं और जनाधार की भरपाई कर पाती है या नहीं।
